संपादकीय चिट्ठा

पहलगाँव हमले के बाद भारत सरकार के कदम कितने प्रभावी?

पहलगाँव हमले के बाद भारत सरकार के कदम त्वरित, निर्णायक और प्रतीकात्मक रूप से शक्...

आतंकवाद का घिनौना चेहरा और भारत की चुनौतियाँ

पहलगाम हमला आतंकवाद का एक और घिनौना चेहरा है, जो निर्दोष लोगों की जान लेने से नह...

पृथ्वी दिवस - पर्यावरणीय क्षरण के विरुद्ध जागरूकता का आ...

पृथ्वी दिवस 2025 हमें याद दिलाता है कि हमारा ग्रह एक आपातकालीन स्थिति में है। पर...

एकल परिवार की ओर बढ़ता भारतीय समाज : अभिशाप या वरदान

भारतीय समाज का संयुक्त परिवार से एकल परिवार की ओर बढ़ना समय की माँग है, लेकिन यह ...

मुर्शिदाबाद हिंसा: विस्थापन का संकट और सामाजिक एकता की ...

मुर्शिदाबाद त्रासदी हमें याद दिलाती है कि सामाजिक एकता और शांति ही किसी समाज की ...

जागो पार्टी और भारतीय राजनीति में जाति-धर्म की राजनीति

जागो पार्टी का संघर्ष केवल राजनीतिक प्रतिस्पर्धा का नहीं, बल्कि भारतीय सामाजिक-र...

गुड फ्राइडे: मानवता की पुकार

गुड फ्राइडे दुख और आशा, बलिदान और मुक्ति का प्रतीक है। ईसा का बलिदान हमें प्रेम,...

ध्रुवीकरण का धंधा

आज सभी पार्टियाँ अपने-अपने निजी हितों की खातिर कुछ एजेंडा तय करती हैं और उसे भोल...

फूलन देवी: एक त्रासदी की सच्ची कहानी

फूलन देवी की कहानी न तो पूरी तरह नायिका की है, न खलनायिका की। वह एक ऐसी औरत थीं,...

उत्तर प्रदेश पुलिस पर तानाशाही का साया

उत्तर प्रदेश पुलिस, जो जनता की सुरक्षा और कानून व्यवस्था की रक्षा के लिए जिम्मेद...

अंबेडकर जयंती: समता और न्याय का प्रतीक

आज जब हमअंबेडकर जयंती मना रहे हैं तो हमें आत्ममंथन करना होगा कि क्या हम उनके सपन...

हिंदी पत्रकारिता की विरासत और बंगाल का योगदान

हिंदी पत्रकारिता की गौरवशाली विरासत उस मशाल की तरह है, जिसने सत्य, साहस और निष्प...

वक्फ बोर्ड संशोधन विधेयक पर बरपे हंगामे की आवश्यकता नहीं

वक्फ बोर्ड संशोधन विधेयक पर चल रही बहस को तथ्यों और संवैधानिक ढाँचे के आधार पर द...

उत्तर प्रदेश पुलिस में भ्रष्टाचार: एक गंभीर चुनौती

उत्तर प्रदेश के पुलिस प्रशासन में व्याप्त भ्रष्टाचार का सबसे बड़ा प्रभाव जनता क...

और कितने विखंडन?

महावीर के नाम पर हम छुट्टियाँ जरूर मना लेते हैं, लेकिन आज महावीर हमारे मन और सम...

लोकतंत्र के रास्ते आती तानाशाही: एक अदृश्य खतरा

लोकतंत्र, जिसे जनता की, जनता द्वारा, जनता के लिए शासन की सबसे पारदर्शी व्यवस्था ...