जन्म से पहले ही शुरू होती है शिक्षा की यात्रा: सद्दाम हुसैन की ‘0+ Education’ प्रकाशित
शब्दभूमि प्रकाशन से आई ‘0+ Education (জন্মের আগে)’ गर्भकालीन शिक्षा, बाल-विकास और जिम्मेदार अभिभावकत्व और भावी पीढ़ी के निर्माण पर केंद्रित पुस्तक; विज्ञान, मनोविज्ञान, चिकित्सा-विज्ञान और नैतिक-दर्शन के विविध संदर्भों के जरिए लेखक सद्दाम हुसैन ने प्रस्तुत किया ‘शिक्षा’ का व्यापक दृष्टिकोण....
पुस्तक में गर्भकालीन शिक्षा, शिशु के सर्वांगीण विकास, जिम्मेदार अभिभावकत्व तथा भावी पीढ़ी के निर्माण को विज्ञान, मनोविज्ञान, चिकित्सा-विज्ञान और नैतिक-दर्शन के विविध संदर्भों की प्रस्तुति
कोलकाता। शिक्षा क्या वास्तव में बच्चे के विद्यालय जाने के साथ शुरू होती है, या उसकी बुनियाद जन्म से भी पहले पड़ने लगती है? इसी विचारोत्तेजक प्रश्न को केंद्र में रखकर लेखक, शिक्षक और शोध-अध्येता सद्दाम हुसैन की नई पुस्तक ‘0+ Education (জন্মের আগে)’ प्रकाशित हो गई है। पुस्तक का प्रकाशन शब्दभूमि प्रकाशन, कोलकाता ने किया है।
‘0+ Education’ का केंद्रीय विचार शिक्षा की प्रचलित अवधारणा को एक व्यापक धरातल पर देखने का प्रयास करता है। पुस्तक में ‘0’ जन्म-पूर्व यानी गर्भावस्था के समय का संकेत है, जबकि ‘+’ सीखने और विकास की उस निरंतर प्रक्रिया को अभिव्यक्त करता है जो जन्म के बाद आगे बढ़ती रहती है। इस प्रकार लेखक शिक्षा को केवल स्कूल, पाठ्यक्रम और कक्षा तक सीमित न मानकर जीवन के आरंभिक निर्माण से जोड़कर देखते हैं। पुस्तक में गर्भकालीन अवस्था से बच्चे के शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक, भावनात्मक और नैतिक विकास से जुड़े विविध पहलुओं पर चर्चा की गई है। लेखक ने विषय को विज्ञान, मनोविज्ञान, चिकित्सा-विज्ञान तथा विभिन्न धार्मिक और नैतिक-दर्शन के संदर्भों के साथ प्रस्तुत करने का प्रयास किया है।
सिर्फ बच्चे की नहीं, माता-पिता की तैयारी पर भी सवाल
इस पुस्तक की विशेषता यह है कि इसका विमर्श केवल गर्भस्थ शिशु तक सीमित नहीं रहता। लेखक भावी माता-पिता की मानसिकता, जीवन-दृष्टि, पारिवारिक वातावरण, जीवनसाथी के चयन, गर्भधारण की तैयारी और गर्भावस्था के दौरान माता-पिता की भूमिका जैसे प्रश्नों को भी भावी पीढ़ी के निर्माण से जोड़ते हैं। पुस्तक में लेखक यह सवाल सामने रखते हैं कि हम संतान को जन्म देने की तैयारी तो करते हैं, लेकिन क्या हम एक जिम्मेदार, संवेदनशील और मूल्यबोध से संपन्न भावी मनुष्य के निर्माण के लिए भी उतने ही तैयार होते हैं? इसी प्रश्न के माध्यम से ‘0+ Education’ अभिभावकत्व को केवल पारिवारिक दायित्व नहीं, बल्कि भावी समाज के निर्माण से जुड़ी जिम्मेदारी के रूप में देखने का आग्रह करती है।
गर्भावस्था के नौ महीनों से सर्वांगीण विकास तक
पुस्तक की विषय-संरचना भी व्यापक है। इसमें जीवनसाथी के चयन और पूर्व-तैयारी से आरंभ करते हुए गर्भावस्था के नौ महीनों तथा प्रथम, द्वितीय और तृतीय त्रैमासिक अवस्थाओं पर चर्चा की गई है। इसके बाद शिशु के शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक, भावनात्मक तथा आध्यात्मिक विकास और शिक्षा से संबंधित अलग-अलग पक्षों को विषय बनाया गया है। पुस्तक में पोषण, जीवनशैली, भावनात्मक सुरक्षा, आत्मविश्वास, भाषा, श्रवण, जिज्ञासा, सामाजिक बोध, संवेदनशीलता और नैतिकता जैसे पहलुओं के साथ विशेष आवश्यकता वाले बच्चों से संबंधित विषयों को भी शामिल किया गया है।
‘गाइड बुक’ से आगे एक वैचारिक संवाद
लेखक पुस्तक को किसी त्वरित समाधान देने वाली पारंपरिक ‘गाइड बुक’ के रूप में प्रस्तुत नहीं करते। इसके बजाय यह पाठक को स्वयं की जीवनशैली, निर्णयों, जिम्मेदारियों और भावी पीढ़ी के प्रति अपने दृष्टिकोण पर विचार करने के लिए प्रेरित करने वाला संवाद है। इस दृष्टि से ‘0+ Education’ केवल गर्भावस्था अथवा बाल-पालन संबंधी पुस्तक नहीं रह जाती, बल्कि यह प्रश्न उठाती है कि एक बेहतर पीढ़ी के निर्माण की शुरुआत आखिर कहाँ से होती है? लेखक का मूल आग्रह है कि बच्चे के भविष्य की चिंता उसके जन्म के बाद से नहीं, बल्कि उससे पहले माता-पिता की तैयारी, चेतना, वातावरण और मूल्यबोध के स्तर से आरंभ होनी चाहिए।
अभिभावकों के साथ शिक्षकों और शोधार्थियों के लिए भी उपयोगी
पुस्तक की विषयवस्तु को देखते हुए इसका पाठक-वर्ग केवल गर्भवती महिलाओं या भावी माता-पिता तक सीमित नहीं है। यह अभिभावकों, शिक्षकों, शिक्षा से जुड़े शोधार्थियों, शिक्षाविदों तथा बाल-विकास और सामाजिक सरोकारों में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए भी विचारोत्तेजक हो सकती है। लेखक सद्दाम हुसैन सरकारी प्राथमिक शिक्षक होने के साथ लेखन और शोध से भी जुड़े हैं। बच्चों की भाषा एवं गणित शिक्षा को आनंदमय और सहज बनाने के उद्देश्य से वे Phonics Formula, Creative Kids सहित अन्य पुस्तकों की रचना कर चुके हैं। ‘0+ Education’ के माध्यम से उन्होंने अपने लेखन को गर्भकालीन विकास, अभिभावकत्व और भावी पीढ़ी के निर्माण के व्यापक विमर्श से जोड़ा है।
शब्दभूमि प्रकाशन से प्रकाशित
‘0+ Education (জন্মের আগে)’ का प्रथम संस्करण अगस्त 2026 में शब्दभूमि प्रकाशन, कोलकाता से प्रकाशित हुआ है। पुस्तक का ISBN 978-81-998054-0-8 तथा निर्धारित मूल्य ₹199 है।
पुस्तक ऐसे समय में सामने आई है जब बच्चों की शिक्षा को लेकर चर्चा प्रायः स्कूल, पाठ्यक्रम, परीक्षा और तकनीक के इर्द-गिर्द केंद्रित रहती है। ‘0+ Education’ इस विमर्श को एक कदम पीछे ले जाकर यह प्रश्न सामने रखती है कि यदि स्वस्थ, संवेदनशील, विवेकशील और मूल्यबोध से संपन्न भावी पीढ़ी चाहिए, तो क्या उसकी तैयारी बच्चे के जन्म से पहले ही शुरू नहीं हो जानी चाहिए?
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