बलरामपुर में आदिवासी किसान की मौत: एसडीएम करुण डहरिया समेत चार गिरफ्तार
बलरामपुर (छत्तीसगढ़) में अवैध खनन जांच के दौरान पिटाई से आदिवासी किसान की मौत। कुसुमी एसडीएम करुण डहरिया समेत चार गिरफ्तार, BNS में केस दर्ज।
एसडीएम पर आदिवासी ग्रामीणों को पीटने का आरोप
छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले में प्रशासनिक कार्रवाई के दौरान कथित मारपीट से एक आदिवासी किसान की मौत का मामला सामने आया है, जिसने पूरे इलाके में तनाव और राजनीतिक प्रतिक्रिया को जन्म दे दिया है। घटना 16 और 17 फरवरी की दरमियानी रात करीब 2 बजे कुसुमी ब्लॉक के हंसपुर गांव में हुई। पुलिस के अनुसार, कुसुमी के एसडीएम करुण डहरिया कथित अवैध बॉक्साइट खनन की जाँच के लिए क्षेत्र में पहुंचे थे। आरोप है कि वे निजी वाहन से कुछ बाहरी व्यक्तियों के साथ वहां गए थे।
क्या है आरोप?
ग्रामीणों के अनुसार, सरना स्थल के पास तीन लोगों को रोककर उनसे पूछताछ की गई और अवैध खनन का आरोप लगाया गया। इसके बाद कथित रूप से रॉड, डंडों और लात-घूंसों से उनकी पिटाई की गई।
एफआईआर और गिरफ्तारी
राजपुर थाने में एसडीएम करुण डहरिया, विक्की सिंह, मंजिल कुमार यादव और सुदीप यादव के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103, 115(2) और 35 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई। वैभव बैंकर (बलरामपुर एसपी) ने बताया कि जाँच में प्रथमदृष्टया मारपीट की पुष्टि हुई है। सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।
राजनीतिक प्रतिक्रिया और विरोध
घटना के विरोध में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने चक्का जाम कर प्रदर्शन किया। स्थानीय लोगों का आरोप है कि बिना पर्याप्त जाँच या पुष्टि के ग्रामीणों पर हमला किया गया।
कुछ चश्मदीदों का दावा है कि मारपीट के बाद राजस्व अमले की मौजूदगी दर्शाने के लिए सामरी के नायब तहसीलदार को भी मौके पर बुलाया गया।
आरोपी एसडीएम का विवादित अतीत
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, एसडीएम करुण डहरिया पहले भी विवादों में रह चुके हैं।
- चांपा जिले में एक छात्र को थप्पड़ मारने का मामला।
- वर्ष 2022 में गरियाबंद में जनपद सीईओ रहते हुए नलकूप खनन बिल पास करने के बदले ₹20,000 रिश्वत लेने के आरोप में एसीबी द्वारा गिरफ्तारी।
इन पुराने मामलों के कारण यह घटना प्रशासनिक आचरण और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।
परिजनों की माँग
मृतक राम नरेश राम के पुत्र ने आरोपियों को कड़ी सजा देने की माँग की है। परिवार और ग्रामीणों का कहना है कि निष्पक्ष जाँच हो और दोषियों को उदाहरणात्मक दंड मिले।
व्यापक सवाल
यह मामला कई गंभीर प्रश्न उठाता है:
- क्या प्रशासनिक कार्रवाई के दौरान बल प्रयोग की वैधानिक सीमाओं का पालन हुआ?
- क्या अवैध खनन की जाँच के नाम पर प्रक्रिया का उल्लंघन किया गया?
- आदिवासी क्षेत्रों में प्रशासन और जनता के बीच विश्वास की खाई क्यों बढ़ रही है?
घटना ने राज्य में प्रशासनिक जवाबदेही, मानवाधिकार और आदिवासी समुदाय की सुरक्षा को लेकर व्यापक बहस छेड़ दी है।
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