मॉस्को फैशन वीक 2025: भारत की रचनात्मक शक्ति से वैश्विक फैशन संवाद को नई दिशा
नई दिल्ली, दिल्ली, भारत मॉस्को फ़ैशन वीक सफ़लतापूर्वक संपन्न हो गया है, जिसने अंतर्राष्ट्रीय फ़ैशन कैलेंडर पर एक डायनामिक औरRead Now ►
नई दिल्ली / मॉस्को (रूस) | मॉस्को फैशन वीक 2025 का समापन न केवल एक सफल फैशन आयोजन के रूप में हुआ, बल्कि इसने मॉस्को को वैश्विक फैशन और सांस्कृतिक कूटनीति के एक नए केंद्र के रूप में भी स्थापित कर दिया। 13 देशों के डिज़ाइनर्स, अफ़्रीका-यूरोप-एशिया-अमेरिका तक फैली रचनात्मक भागीदारी और BRICS+ जैसे मंच के साथ जुड़ाव ने यह स्पष्ट कर दिया कि फैशन अब केवल रुझानों का विषय नहीं रहा, बल्कि सांस्कृतिक संवाद, व्यापार और सॉफ्ट पावर का प्रभावशाली माध्यम बन चुका है। इस पूरे आयोजन में भारत की मौजूदगी सबसे सशक्त और अर्थपूर्ण रही, जहाँ भारतीय डिज़ाइन, शिल्प, टेक्सटाइल और समकालीन सौंदर्यशास्त्र ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर गहरी छाप छोड़ी।
भारतीय फैशन की निर्णायक उपस्थिति
मॉस्को फैशन वीक के प्रमुख आकर्षणों में से एक रहा भारत के प्रतिष्ठित लक्ज़री ब्रांड ‘शांतनु और निखिल’ (Shantnu & Nikhil) की भागीदारी। डिज़ाइनर शांतनु मेहरा और निखिल मेहरा ने अपना पहला ऑल-वुमेन्स क्यूट्योर कलेक्शन ‘Armouré’ प्रस्तुत किया, जो 1930 के दशक से प्रेरित था।
इस कलेक्शन में आर्किटेक्चरल सिल्हूट्स, सशक्त स्त्रीत्व को दर्शाती संरचनाएँ, और बारीक भारतीय हाथ की कढ़ाई का ऐसा संतुलन देखने को मिला, जिसने आधुनिक अंतरराष्ट्रीय दर्शकों को भारतीय कारीगरी की गहराई से परिचित कराया। ‘Armouré’ केवल फैशन कलेक्शन नहीं था, बल्कि स्त्री शक्ति, इतिहास और समकालीन डिज़ाइन का घोषणापत्र प्रतीत हुआ। डिज़ाइनर्स के अनुसार, मॉस्को फैशन वीक जैसे मंच पर उपस्थिति रूस जैसे उभरते और प्रभावशाली बाज़ार में भारतीय फैशन के लिए नए व्यावसायिक और सांस्कृतिक अवसर खोलती है।
शहरी भारत की आधुनिक अभिव्यक्ति
भारतीय डिज़ाइनर पवन सचदेवा ने अपने सिग्नेचर अर्बन, सुसंस्कृत और मिनिमल स्टाइल्स के ज़रिये युवा अंतरराष्ट्रीय दर्शकों और ख़रीदारों का विशेष ध्यान आकर्षित किया। उनके डिज़ाइनों में आधुनिक महानगरीय जीवन, कार्य-संस्कृति और वैश्विक नागरिकता की स्पष्ट झलक देखने को मिली। पवन सचदेवा, जो फैशन डिजाइन कौंसिल ऑफ इंडिया (FDCI) के बोर्ड ऑफ़ गवर्नर्स के सदस्य भी हैं, ने मॉस्को फैशन वीक के साथ-साथ BRICS+ फैशन शिखर सम्मेलन में भी सक्रिय भागीदारी निभाई। उन्होंने कहा कि ऐसे मंच पारंपरिक टेक्सटाइल, स्थानीय पैटर्न और स्वदेशी तकनीकों को वैश्विक दर्शकों तक पहुँचाने का प्रभावी माध्यम बनते हैं।
रूसी डिज़ाइन: संरचना, सादगी और गहराई
मॉस्को फैशन वीक घरेलू रूसी प्रतिभाओं के लिए भी एक सशक्त प्रदर्शन मंच साबित हुआ। लानिस चमालिद्य ने कठोर वास्तुशिल्पीय कट्स और न्यूनतम सौंदर्यबोध के साथ ऐसे परिधान पेश किए, जो चलते-फिरते मूर्तियों जैसे प्रतीत होते थे। किस्सेलेनको के कलेक्शन में पूर्वी संस्कृति, सटीक रेखाएं और उच्च कोटि की कारीगरी का संतुलन देखने को मिला। स्तास लोपत्किन ने पूर्व और पश्चिम की शैली को मिलाकर क्लासिक टेलरिंग को एक नए कलात्मक आयाम में प्रस्तुत किया। उभरते नाम वीरा प्लोतनिकोवा के ‘दिवा’ कलेक्शन ने आधुनिक तकनीक और पारंपरिक स्त्री सिल्हूट्स का आकर्षक संयोजन पेश किया।
वैश्विक रनवे और सांस्कृतिक प्रेरणाएँ
अंतरराष्ट्रीय रनवे सितारों की मौजूदगी ने मॉस्को फैशन वीक की वैश्विक पहुँच को और मज़बूत किया। अफ़्रीका के प्रतिष्ठित कॉट्यूरियर डेविड तल्ले और तुर्की के चर्चित डिज़ाइनर एमरे एर्देमोग्लू की भागीदारी ने आयोजन को अंतरमहाद्वीपीय पहचान दी। ब्राज़ील की डिज़ाइनर मायरी जुबिनी ने रूसी सिनेमा के महान निर्देशक अंद्रेई तारकोवस्की से प्रेरणा लेते हुए ऐसे परिधान रचे, जिनमें समय, स्मृति और भावनात्मक गहराई की झलक दिखाई दी। उनके अनुसार, फैशन भी सिनेमा की तरह भावनाओं और दर्शन को व्यक्त कर सकता है।
BRICS+ फैशन शिखर सम्मेलन: भविष्य की दिशा
मॉस्को फैशन वीक के समानांतर आयोजित BRICS+ फैशन शिखर सम्मेलन उद्योग के सबसे महत्वपूर्ण व्यावसायिक और नीतिगत आयोजनों में से एक बनकर उभरा। संस्थापक सदस्य होने के नाते भारत ने यहाँ एक बड़ा और प्रभावशाली प्रतिनिधिमंडल भेजा, जिसने फैशन, टेक्सटाइल, डिज़ाइन शिक्षा और क्रॉस-बॉर्डर सहयोग पर गंभीर संवाद किया। यह शिखर सम्मेलन इस बात का संकेत है कि आने वाले वर्षों में फैशन केवल सौंदर्य नहीं, बल्कि अर्थव्यवस्था, रोज़गार और सांस्कृतिक कूटनीति का अहम हिस्सा बनेगा।
फैशन एक वैश्विक भाषा
मॉस्को फैशन वीक 2025 और BRICS+ फैशन शिखर सम्मेलन ने स्पष्ट कर दिया है कि फैशन एक यूनिवर्सल भाषा है जो सीमाओं, संस्कृतियों और विचारधाराओं को जोड़ती है। भारत जैसे देशों के लिए यह मंच अंतरराष्ट्रीय पहचान, नए बाज़ारों तक पहुँच और अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को आधुनिक संदर्भ में प्रस्तुत करने का एक ऐतिहासिक अवसर साबित हुआ है।
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