विश्व हिंदी दिवस पर वंदेमातरम् की 150वीं वर्षपूर्ति: बैंक ऑफ इंडिया कोलकाता में संगोष्ठी
कोलकाता में बैंक ऑफ इंडिया द्वारा विश्व हिंदी दिवस के अवसर पर राष्ट्रगीत वंदे मातरम् की 150वीं वर्षपूर्ति पर आयोजित राजभाषा संगोष्ठी में विद्वानों ने इसके ऐतिहासिक और राष्ट्रीय महत्व पर विचार रखे।
कोलकाता, 9 जनवरी। विश्व हिंदी दिवस के अवसर पर बैंक ऑफ इंडिया के आंचलिक कार्यालय, कोलकाता द्वारा राष्ट्रगीत वंदे मातरम् की 150वीं वर्षपूर्ति के उपलक्ष्य में एक विशेष राजभाषा संगोष्ठी का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम न केवल हिंदी भाषा बल्कि भारत की राष्ट्रीय चेतना को समर्पित एक वैचारिक मंच के रूप में सामने आया।
विशिष्ट अतिथि वक्ता विजय मोहन बरेजा, महाप्रबंधक, ऑयल इंडिया लिमिटेड ने वंदे मातरम् गीत की भावात्मक व्याख्या करते हुए कहा कि यह रचना मातृभूमि और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता, सम्मान और आत्मीयता की भावना को जाग्रत करती है। उन्होंने इसे भारतीय चेतना का जीवंत प्रतीक बताया।
मुख्य वक्ता डॉ. मधु सिंह, खुदीराम बोस सेंट्रल कॉलेज, कोलकाता ने वंदे मातरम् के ऐतिहासिक और राष्ट्रीय महत्व पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि यह गीत मात्र शब्दों का संयोजन नहीं, बल्कि भारत की पहचान है। यह देश की भौगोलिक सीमाओं के भीतर सांस्कृतिक और राष्ट्रीय सेतु का कार्य करता रहा है और स्वतंत्रता संग्राम के दौरान जनचेतना का आधार बना।
इस अवसर पर उप महाप्रबंधक (एफजीएमओ) राजेश कुमार ने कहा कि यह बंगाल के लिए गर्व का विषय है कि राष्ट्रगीत वंदे मातरम् और राष्ट्रगान दोनों की रचना इसी धरती पर हुई, जिसने पूरे देश को एक सूत्र में बांधने का कार्य किया।
कार्यक्रम के दौरान सौरभ कुमार द्वारा प्रस्तुत बांसुरी वादन ने वातावरण को सांस्कृतिक गरिमा से भर दिया। संगोष्ठी का सफल संचालन निरंजन कुमार बरनवाल, मुख्य प्रबंधक (राजभाषा) ने किया। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन हमें वर्तमान कर्तव्यों के साथ-साथ भविष्य की राष्ट्रीय जिम्मेदारियों का भी बोध कराते हैं।
अंत में धन्यवाद ज्ञापन महेंद्र नाथ सोरेन, सहायक महाप्रबंधक, एफजीएमओ कोलकाता द्वारा प्रस्तुत किया गया। संगोष्ठी में बैंक ऑफ इंडिया आंचलिक कार्यालय, कोलकाता एवं एफजीएमओ के वरिष्ठ अधिकारीगण एवं स्टाफ सदस्य बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
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