संपादकीय चिट्ठा

अनंत शक्ति का उद्घोष: स्वामी विवेकानंद और भारत की जागृत...

स्वामी विवेकानंद का जीवन, दर्शन और युवाओं के लिए उनका संदेश एक विस्तृत संपादकीय ...

विश्व हिंदी दिवस: वैश्विक पटल पर हिंदी की अखंड यात्रा औ...

विश्व हिंदी दिवस 2026 पर विशेष संपादकीय हिंदी की ऐतिहासिक यात्रा, सांस्कृतिक शक्...

सभ्यता बनाम सत्ता का अहंकार: जब विश्वविद्यालय की आत्मा ...

बिलासपुर के गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय में एक साहित्यिक कार्यक्रम के दौ...

कथाकार नहीं रहे, समय की बेचैनी रह गई

प्रख्यात कथाकार, संपादक और वैचारिक हस्तक्षेप के प्रतीक ज्ञानरंजन का निधन हिंदी स...

आज की समृद्धि, कल की कीमत: वैश्विक कर्ज का सच

वैश्विक सार्वजनिक कर्ज 100 ट्रिलियन डॉलर पार, विकास से आगे बढ़ता बोझ। 2026–29 क्...

सिर्फ जश्न नहीं, जिम्मेदारी भी | नया साल 2026 और पर्याव...

नया साल 2026 केवल उत्सव का नहीं, धरती के प्रति जिम्मेदारी निभाने का अवसर है। पढ़...

जब IG स्तरीय पूर्व IPS भी असुरक्षित हो, तब आम नागरिक की...

पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर की गिरफ्तारी और मीडिया तक उनकी पहुँच रोकने की घटनाएँ D...

एक राष्ट्र, एक शिक्षा नियामक: उच्च शिक्षा में ऐतिहासिक ...

विकसित भारत शिक्षा अधिक्षण विधेयक के माध्यम से मोदी सरकार ने यूजीसी-एआईसीटीई युग...

भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाना: क्यों 9 दिसंबर एक वैश्व...

भ्रष्टाचार लोकतंत्र और विकास की सबसे बड़ी चुनौती है। जानें कैसे अंतरराष्ट्रीय भ्...

जागो फिर एक बार: निराला की अमर पुकार | संपादकीय

भारतीय साहित्य के प्रथम उग्र मानवीय कवि निराला की विद्रोही चेतना और उनकी अमर पंक...

नेता नहीं, अफसर जिम्मेदार? भारतीय ब्यूरोक्रेसी पर बड़ा ...

पूर्व IAS डॉ. राकेश वर्मा के नजरिए से जानिए, क्यों 70 साल की नाकामियों के लिए ने...

फर्जी मुठभेड़, नया संविधान और लोकतंत्र पर संकट

फर्जी मुठभेड़ों, अफसरशाही और ‘नए संविधान’ की बहस के बीच भारतीय लोकतंत्र किस मोड़...

भारतीय लोकतंत्र का प्राणस्वर, संविधान दिवस

26 नवंबर सिर्फ संविधान की अंगीकृति नहीं, बल्कि भारतीय लोकतंत्र की नैतिक और वैचार...

छोटे कदम, बड़ा बदलाव: माँसाहार निषेध दिवस का संदेश | स्...

माँसाहार त्यागना न केवल पशु पीड़ा रोकता है, बल्कि स्वास्थ्य, जलवायु और मानवता की...

लचित बोरफुकन जयंती: सराईघाट के वीर सेनानायक की अटल विरासत

24 नवंबर को मनाया जाने वाला लचित बोरफुकन दिवस असम और भारत की वीरता का प्रतीक है।...

गुरु तेग बहादुर: समय को थामने वाला बलिदान और न्याय का अ...

गुरु तेग बहादुर की शहादत केवल सिख इतिहास की घटना नहीं, बल्कि धार्मिक स्वतंत्रता,...