हापुड़ में पुलिसिया तानाशाही का आरोप: आजाद अधिकार सेना के जिलाध्यक्ष की अवैध गिरफ्तारी
हापुड़ के थाना बाबूगढ़ में आजाद अधिकार सेना के जिलाध्यक्ष की कथित अवैध गिरफ्तारी, पूर्व IPS अमिताभ ठाकुर पर अमर्यादित टिप्पणी और जबरन चुप्पी लिखवाने का आरोप। संगठन ने NHRC से शिकायत कर कार्रवाई की माँग की।
हापुड़ | 14 जनवरी 2026 | उत्तर प्रदेश में पुलिसिया कार्रवाई को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आजाद अधिकार सेना ने थाना बाबूगढ़, जनपद हापुड़ पुलिस पर सत्ता के दबाव में लोकतांत्रिक अधिकारों के दमन का आरोप लगाते हुए कड़े शब्दों में निंदा की है।
संगठन के अनुसार, उसके हापुड़ जिलाध्यक्ष सचिन रावल को 12–13 जनवरी 2026 की रात लगभग 2 बजे बिना किसी वारंट, पूर्व सूचना या वैध कारण के उनके आवास से जबरन उठाकर थाना बाबूगढ़ ले जाया गया। आरोप है कि यह कार्रवाई किसी बड़े अपराधी की गिरफ्तारी की तरह की गई।
संवेदना जताने जा रहे थे, अपराधी बना दिए गए
आजाद अधिकार सेना के राष्ट्रीय संगठन मंत्री देवेन्द्र सिंह राणा ने बताया कि सचिन रावल 13 जनवरी को मेरठ जनपद के सरधना क्षेत्र के ग्राम कपसाड़ में हुई एक जघन्य घटना दलित महिला सुनीता देवी की हत्या और उनकी पुत्री रूबी के अपहरण के पीड़ित परिवार से मिलने और न्याय की माँग करने जा रहे थे। संगठन के अनुसार यह एक शांतिपूर्ण, मानवीय और संवैधानिक कर्तव्य था।
बिना वारंट हिरासत, मोबाइल जब्त
प्रेस नोट में कहा गया है कि थाना बाबूगढ़ पुलिस ने सचिन रावल को कई घंटों तक अवैध रूप से निरुद्ध रखा, उनका मोबाइल फोन जब्त कर बंद कर दिया गया और किसी भी परिजन या संगठन को समय पर सूचना नहीं दी गई।
थाने में धमकी और अमर्यादित भाषा का आरोप
संगठन ने आरोप लगाया कि थाना प्रभारी/कोतवाल मनीष प्रताप द्वारा थाने में सचिन रावल के साथ अपमानजनक और धमकीपूर्ण भाषा का प्रयोग किया गया। इतना ही नहीं, संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमिताभ ठाकुर (पूर्व IPS अधिकारी) के विरुद्ध भी अमर्यादित टिप्पणी की गई।
आरोप है कि पुलिस अधिकारी ने कहा, “आईपीएस अधिकारी होने के बावजूद सरकार ने उसे जबरन रिटायर किया, अगर शासन के संपर्क में रहता तो किसी प्रदेश का डीजीपी बनकर रिटायर होता।”
आजाद अधिकार सेना ने इस टिप्पणी को संवैधानिक पदों, लोकतांत्रिक संस्थाओं और असहमति के अधिकार का खुला अपमान बताया है।
जबरन लिखवाई गई ‘चुप्पी की एप्लीकेशन’
सबसे गंभीर आरोप यह है कि सायं लगभग 6 बजे सचिन रावल से जबरन एक लिखित एप्लीकेशन लिखवाई गई, जिसमें उन्हें भविष्य में किसी भी विरोध-प्रदर्शन, जनसभा या सामाजिक-राजनीतिक गतिविधि में भाग न लेने का आश्वासन देने के लिए बाध्य किया गया।
संगठन का कहना है कि यह कार्रवाई -
- संविधान के अनुच्छेद 19 (अभिव्यक्ति एवं शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार)
- अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता) का सीधा उल्लंघन है। साथ ही CrPC की धारा 50, 56 और 57 का भी खुला उल्लंघन बताया गया है।
NHRC और SP हापुड़ से शिकायत
आजाद अधिकार सेना ने पूरे घटनाक्रम को पुलिसिया दमन, राज्य शक्ति के दुरुपयोग और लोकतांत्रिक आवाज़ों को डराने की साजिश करार दिया है। संगठन ने इस मामले की औपचारिक शिकायत पुलिस अधीक्षक हापुड़ और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को भेज दी है।
संगठन की प्रमुख माँगें
1. थाना बाबूगढ़ पुलिस और संबंधित थाना प्रभारी के विरुद्ध तत्काल विभागीय व कानूनी कार्रवाई
2. जबरन लिखवाई गई एप्लीकेशन को अवैध घोषित कर निरस्त किया जाए
3. सचिन रावल की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए
4. पूरे प्रकरण की स्वतंत्र, निष्पक्ष और समयबद्ध जांच कराई जाए
आंदोलन की चेतावनी
राष्ट्रीय संगठन मंत्री देवेन्द्र सिंह राणा ने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र न्यायसंगत कार्रवाई नहीं हुई, तो आजाद अधिकार सेना इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठाएगी और एडीजी मेरठ जोन कार्यालय पर धरना-प्रदर्शन कर ज्ञापन सौंपेगी। उन्होंने कहा, “संवेदना जताना अपराध नहीं है। लोकतंत्र में पुलिस का काम संरक्षण है, दमन नहीं।”
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