बांदा: चोरी कबूल कराने के आरोप में युवक से कथित अमानवीय बर्ताव, कोर्ट के आदेश पर FIR
बांदा के पैलानी क्षेत्र में युवक की उंगलियाँ तोड़ने और पेशाब पिलाने के आरोप। सीजेएम के आदेश पर चौकी इंचार्ज समेत सात पर मुकदमा दर्ज, पुलिस ने जाँच शुरू की।
पैलानी (बांदा), संवाददाता। बांदा जनपद के पैलानी क्षेत्र अंतर्गत पिपरहरी गाँव से पुलिसिया बर्बरता का एक गंभीर और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। आरोप है कि चोरी के एक मामले में युवक से जबरन अपराध कबूल कराने के लिए न केवल बेरहमी से मारपीट की गई, बल्कि उसकी उंगलियाँ तोड़ी गईं और पत्नी व माँ के सामने अपमानजनक ढंग से पेशाब पिलाई गई। पीड़ित द्वारा स्थानीय स्तर पर न्याय न मिलने के बाद सीजेएम न्यायालय की शरण लेने पर, कोर्ट के आदेश से चौकी इंचार्ज समेत सात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस प्रशासन ने आरोपों को निराधार बताते हुए तथ्यात्मक जाँच की बात कही है।
घटना का पूरा घटनाक्रम
चोरी की घटना से शुरू हुआ मामला
जानकारी के अनुसार, पिपरहरी गाँव में 25 अगस्त 2025 की रात ज्वाला अवस्थी के घर चोरी की घटना हुई। घटना के बाद गाँव और आसपास के क्षेत्र में चर्चा का माहौल बन गया। पुलिस ने जाँच के दौरान कुछ ग्रामीणों से पूछताछ शुरू की, इसी क्रम में पप्पू उर्फ श्रवण कुमार को भी संदिग्ध मानते हुए पूछताछ के लिए बुलाया गया।
पहली पूछताछ और रिहाई
27 अगस्त 2025 को खप्टिहा कलां चौकी के तत्कालीन प्रभारी द्वारा युवक को चौकी बुलाया गया। आरोप है कि पूछताछ के नाम पर उसे मानसिक दबाव में रखा गया और बाद में पैलानी थाने ले जाया गया। हालांकि उसी दिन उसे छोड़ दिया गया। उस समय कोई औपचारिक गिरफ्तारी या प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई।
दूसरी बार बुलाकर मारपीट का आरोप
पीड़ित के अनुसार, 1 सितंबर 2025 को गाँव के कुछ प्रभावशाली लोगों रामरूप सिंह, भइया, पंकज, ज्वाला और सुनील ने उसे अपने घर बुलाया और चोरी कबूल न करने पर उसके साथ मारपीट की। इसके बाद पुलिस को सूचना देकर उसे खप्टिहा कलां चौकी ले जाया गया।
चौकी में अमानवीय बर्ताव के आरोप
पीड़ित का आरोप है कि जब उसे चौकी ले जाया गया, उस समय उसकी पत्नी हीरा और माँ कुसुमा भी वहाँ पहुँचीं। यहीं पर चौकी प्रभारी हरिशरण सिंह पर सबसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। शिकायत के मुताबिक -
- युवक के हाथ मरोड़कर उसकी उंगलियाँ तोड़ दी गईं।
- कथित रूप से रुपये लेकर उसे बेरहमी से पीटा गया।
- उसकी पत्नी और माँ के सामने उसे अपमानित करने के इरादे से पेशाब पिलाई गई। पीड़ित पक्ष का कहना है कि यह सब इसलिए किया गया ताकि वह चोरी का जुर्म कबूल कर ले, जबकि वह खुद को निर्दोष बताता रहा।
न्याय न मिलने पर कोर्ट की शरण
पीड़ित का आरोप है कि घटना के बाद उसने पुलिस अधिकारियों और प्रशासन से कई बार शिकायत की, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। अंततः उसने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) न्यायालय में प्रार्थना पत्र दाखिल किया। न्यायालय ने उपलब्ध तथ्यों और शिकायत को गंभीर मानते हुए मामले में प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया।
कोर्ट के आदेश पर दर्ज हुआ मुकदमा
सीजेएम के आदेश के अनुपालन में पुलिस ने
- चौकी इंचार्ज सहित सात नामजद आरोपियों के खिलाफ
- संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है।
यह मामला दर्ज होने के बाद पूरे क्षेत्र में चर्चा और आक्रोश का विषय बन गया है। स्थानीय लोग इसे पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल के रूप में देख रहे हैं।
पुलिस प्रशासन का पक्ष
मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए पुलिस अधीक्षक ने कहा कि
- कोर्ट के आदेश के अनुसार FIR दर्ज कर ली गई है।
- लगाए गए आरोप निराधार हैं।
- पूरे मामले की तथ्यात्मक और निष्पक्ष जाँच कराई जा रही है।
- जाँच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसी आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।
मानवाधिकार और कानून से जुड़े सवाल
यह मामला कई महत्वपूर्ण सवाल खड़े करता है:
- क्या पूछताछ के दौरान पुलिस द्वारा कानून और मानवाधिकारों का उल्लंघन हुआ?
- क्या युवक की चोटों का मेडिकल परीक्षण आरोपों की पुष्टि करेगा?
- क्या परिजनों के सामने इस तरह का कथित व्यवहार भारतीय कानून और संविधान के मूल्यों के खिलाफ नहीं है?
- क्या इस प्रकरण में स्वतंत्र एजेंसी से जाँच की जरूरत है?
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आरोप सिद्ध होते हैं, तो यह मामला केवल आपराधिक नहीं बल्कि गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन का भी बन सकता है।
बांदा का यह मामला अभी जाँच के अधीन है, लेकिन आरोपों की गंभीरता ने पुलिसिया पूछताछ की पद्धतियों पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। सच्चाई क्या है, यह जाँच के बाद ही स्पष्ट होगा, लेकिन इतना तय है कि यह प्रकरण कानून, मानव गरिमा और जवाबदेही से जुड़ी बहस को और तेज करेगा।
डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट शिकायत, न्यायालयी आदेश और पुलिस के आधिकारिक बयान पर आधारित है। जाँच लंबित है, अंतिम निष्कर्ष जाँच के बाद ही सामने आएगा।
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