हावड़ा के ‘शरद सदन’ में 15 फरवरी को सजेगा विराट कवि सम्मेलन, पद्मश्री संतोष आनंद होंगे मुख्य अतिथि
15 फरवरी 2026 को हावड़ा के शरद सदन में पद्मश्री संतोष आनंद के सान्निध्य में ‘विराट कवि सम्मेलन’ का आयोजन होगा। देशभर के प्रतिष्ठित कवियों की उपस्थिति में यह शाम हिंदी साहित्य और संस्कृति का भव्य उत्सव बनेगी।
पद्मश्री संतोष आनंद के सान्निध्य में 15 फरवरी को ऐतिहासिक कवि सम्मेलन
हावड़ा, 15 फरवरी 2026। हुगली के किनारे बसा हावड़ा एक बार फिर साहित्यिक इतिहास का साक्षी बनने जा रहा है। 15 फरवरी 2026, रविवार को शाम 4:00 बजे से हावड़ा के प्रतिष्ठित सभागार ‘शरद सदन’ में ‘विराट कवि सम्मेलन’ का आयोजन किया जा रहा है। यह केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि हिंदी भाषा, भारतीय काव्य-परंपरा और सांस्कृतिक एकात्मता का उत्सव है।
इस भव्य आयोजन के मुख्य अतिथि होंगे भारतीय गीत-संसार के अमर रचनाकार और पद्मश्री सम्मानित वरिष्ठ गीतकार संतोष आनंद। ‘एक प्यार का नगमा है’, ‘मैं न भूलूँगा’ जैसे कालजयी गीतों के सृजनकर्ता संतोष आनंद का हावड़ा आगमन साहित्यप्रेमियों के लिए एक भावनात्मक और ऐतिहासिक क्षण माना जा रहा है। उनके शब्दों ने दशकों तक भारतीय जनमानस को संवेदना, प्रेम और मानवीय मूल्यों से जोड़ा है।
पीढ़ियों के संवाद का सेतु
आयोजन समिति के अनुसार, इस सम्मेलन में देश के विभिन्न राज्यों से प्रतिष्ठित और नवोदित कवि भाग ले रहे हैं। मंच पर ओज, श्रृंगार, वीर रस, हास्य और व्यंग्य की विविध धाराएँ एक साथ प्रवाहित होंगी। कार्यक्रम का संचालन अपनी सशक्त मंचीय उपस्थिति और चुटीले अंदाज़ के लिए प्रसिद्ध कवि जय कुमार रुसवा करेंगे। उनकी शैली दर्शकों को भावनाओं की गहराई से लेकर हास्य के हल्के फव्वारों तक सहजता से ले जाती है। यह सम्मेलन वरिष्ठता और युवाशक्ति के संवाद का एक जीवंत मंच होगा, जहाँ अनुभवी रचनाकारों का अनुभव और युवा कवियों का जोश एक साथ मिलकर नई साहित्यिक ऊर्जा का संचार करेंगे।
आयोजकों की दृष्टि
इस साहित्यिक महोत्सव के सफल आयोजन में चेयरमैन तारक नाथ दुबे, अध्यक्ष संजय शुक्ला और राष्ट्रीय संरक्षक तारकेश्वर दुबे सहित परिषद के समर्पित सदस्यों की महत्वपूर्ण भूमिका है।
चेयरमैन तारक नाथ दुबे ने कहा,“साहित्य केवल शब्दों का मेल नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति की आत्मा है। ‘शरद सदन’ में यह सम्मेलन हावड़ा की धरती पर हिंदी काव्य-धारा का ऐसा संगम होगा, जहाँ अनुभवी संतोष आनंद जी के आशीर्वाद और युवा कवियों के जोश से नई चेतना का जन्म होगा।”
अध्यक्ष संजय शुक्ला ने कहा, “कविता समाज का दर्पण है। जब संतोष आनंद जी जैसे व्यक्तित्व का सान्निध्य मिलता है, तो शब्द साधना बन जाते हैं। यह शाम हावड़ा के सांस्कृतिक इतिहास में स्वर्णाक्षरों में दर्ज होगी।”
बंगाल की धरती पर हिंदी का उत्सव
बंगाल की सांस्कृतिक परंपरा सदैव बहुभाषिक और बहुसांस्कृतिक रही है। कोलकाता और हावड़ा की भूमि ने हिंदी साहित्य और पत्रकारिता को भी सशक्त मंच प्रदान किया है। ऐसे में ‘विराट कवि सम्मेलन’ का आयोजन इस सांस्कृतिक सेतु को और मजबूत करेगा।
यह आयोजन न केवल कविता प्रेमियों के लिए आनंदोत्सव है, बल्कि युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत भी है। आयोजकों का मानना है कि आज के डिजिटल युग में जब संवाद की भाषा बदल रही है, तब कविता ही वह माध्यम है जो मनुष्य के भीतर की संवेदना को जीवित रखती है।
जनसमुदाय की उत्सुकता
कार्यक्रम को लेकर हावड़ा और कोलकाता में उत्साह चरम पर है। साहित्यिक संगठनों, शिक्षण संस्थानों और सांस्कृतिक मंचों के प्रतिनिधि बड़ी संख्या में उपस्थित रहने की तैयारी कर रहे हैं। उम्मीद की जा रही है कि सभागार खचाखच भरा रहेगा और श्रोताओं की तालियाँ देर तक गूंजती रहेंगी।
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