HCBA चुनाव 2026–27 अध्यक्ष पद पर 8 दिग्गजों में घमासान; अनुभव और जमीनी पकड़ के बूते पूर्व अध्यक्षों में मुख्य मुकाबला
इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन (HCBA) के सत्र 2026–27 के चुनाव में 30 पदों के लिए 263 प्रत्याशी ताल ठोक रहे हैं, जिनमें शीर्ष अध्यक्ष पद पर 8 उम्मीदवारों के बीच मुकाबला तय हुआ है। चुनावी इतिहास, संगठनात्मक पकड़ और वकीलों के जातिगत व पेशेवर समीकरणों का विश्लेषण बताता है कि मुख्य मुकाबला पूर्व अध्यक्ष राधाकांत ओझा और वरिष्ठ अधिवक्ता पी.सी. श्रीवास्तव के इर्द-गिर्द केंद्रित है, जबकि अशोक कुमार सिंह और डॉ. सी.पी. उपाध्याय मुकाबले को बहुकोणीय बना रहे हैं।
प्रयागराज स्थित देश के सबसे बड़े उच्च न्यायालय के बार एसोसिएशन (HCBA) के सत्र 2026–27 के चुनाव का बिगुल बज चुका है। 6 सितंबर 2026 को प्रकाशित अंतिम उम्मीदवार सूची के अनुसार, कुल 30 पदों पर 263 प्रत्याशी मैदान में हैं, जबकि प्रतिष्ठा के केंद्र 'अध्यक्ष' पद पर 8 नाम आमने-सामने हैं। 17 सितंबर को मतदान हुआ है। अध्यक्ष पद के 8 उम्मीदवार अनिल श्रीवास्तव, अशोक कुमार सिंह, डॉ. सी.पी. उपाध्याय, देवी प्रसाद (डी.पी.) सिंह, हरबंश सिंह, प्रभाशंकर (पी.एस.) मिश्रा, पी.सी. श्रीवास्तव (प्रकाश चंद्र श्रीवास्तव), राधाकांत (आर.के.) ओझा हैं।
चुनावी समीकरण और तथ्यात्मक विश्लेषण: किसके जीतने की संभावना अधिक?
हाईकोर्ट बार के चुनावों में मतदान मुख्य रूप से तीन धुरियों पर घूमता है: पूर्व कार्यकाल का ट्रैक रिकॉर्ड (अधिवक्ता हित/आंदोलन), युवा वकीलों के बीच सक्रियता, और बार का पेशेवर-सामाजिक गोलबंदी समीकरण। इन मानकों पर उम्मीदवारों की स्थिति इस प्रकार है:
1. राधाकांत (आर.के.) ओझा: अनुभव और आक्रामक नेतृत्व का मजबूत आधार
पूर्व सफलताएँ: आर.के. ओझा इससे पहले भी HCBA के अध्यक्ष रह चुके हैं। बार की राजनीति में उनकी पहचान एक मुखर और जुझारू नेता की रही है।
मजबूत पक्ष: जूनियर वकीलों के चैंबर आवंटन, वित्तीय सहायता और बेंच-बार समन्वय के मुद्दों पर उनका सीधा दखल रहा है। प्रयागराज और आसपास के जिलों से आने वाले वकीलों के एक बड़े धड़े में उनका स्थाई कैडर माना जाता है।
संभावना: अध्यक्ष पद की रेस में वह सबसे आगे चल रहे प्रमुख दावेदारों में शामिल हैं।
2. पी.सी. श्रीवास्तव (प्रकाश चंद्र श्रीवास्तव): संयमित छवि और सर्वमान्य स्वीकार्यता
पूर्व सफलताएँ: पी.सी. श्रीवास्तव भी पूर्व में HCBA अध्यक्ष रह चुके हैं और बार में एक सम्मानित वरिष्ठ अधिवक्ता के रूप में पहचाने जाते हैं।
मजबूत पक्ष: उनकी कार्यशैली प्रशासनिक रूप से संतुलित मानी जाती है। बार काउंसिल और सीनियर-जूनियर अधिवक्ताओं के बीच वे एक सहज और गैर-विवादास्पद चेहरे के रूप में उभरे हैं।
संभावना: यदि चुनाव में सत्ता-विरोधी या आक्रामक राजनीति के विपरीत किसी गंभीर और सुलझे हुए नेतृत्व की ओर रुझान बढ़ा, तो पी.सी. श्रीवास्तव बाजी मारने की सबसे मजबूत स्थिति में हैं।
समीकरण बिगाड़ने की ताकत
3. अशोक कुमार सिंह व डॉ. सी.पी. उपाध्याय:
अशोक कुमार सिंह: पूर्व में बार के विभिन्न महत्वपूर्ण पदों जैसे अध्यक्ष, महासचिव पद पर रह चुके हैं और वकीलों के बीच उनकी दिन-प्रतिदिन की पहुँच बहुत गहरी है।
डॉ. सी.पी. उपाध्याय: अकादमिक और कानूनी मामलों में सक्रिय भूमिका के चलते वे वकीलों के प्रबुद्ध वर्ग से लगातार समर्थन जुटा रहे हैं।
वोट विभाजन का असर: मैदान में एक ही वर्ग/समुदाय से कई वरिष्ठ चेहरों ओझा, उपाध्याय, मिश्रा और श्रीवास्तव के होने से पारंपरिक वोट बैंक में बिखराव तय है।
निष्कर्ष: किस ओर झुक रहा है पलड़ा?
जमीनी मूल्यांकन के अनुसार, यह मुकाबला राधाकांत ओझा बनाम पी.सी. श्रीवास्तव के बीच सिमटता दिखाई दे रहा है। राधाकांत ओझा की बढ़त की संभावना इसलिए मजबूत है क्योंकि उनके पास आक्रामक प्रचार तंत्र और युवा अधिवक्ताओं का संगठित समर्थन है। वहीं, पी.सी. श्रीवास्तव तब निर्णायक बढ़त बना सकते हैं यदि 8 उम्मीदवारों के बीच वोटों के तीव्र विभाजन के दौरान तटस्थ और वरिष्ठ अधिवक्ताओं का थोक वोट उनके पक्ष में लामबंद हो जाए। अंतिम परिणाम इस बात पर निर्भर करेगा कि मतदान के दिन युवा वकीलों की भागीदारी किस स्तर की रही है और 'वन बार, वन वोट' के नियमों के तहत मतदान प्रतिशत क्या रहा है।
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