हंडिया थाना प्रभारी और दारोगा निलंबित, जमीन विवाद में एकपक्षीय कार्रवाई व रिश्वत के आरोप पर सख्त एक्शन

प्रयागराज में हंडिया थाना प्रभारी अनूप सरोज और दारोगा बृजेश कुमार को मकान विवाद में एकपक्षीय कार्रवाई व रिश्वत के आरोप पर निलंबित किया गया; पुलिस कमिश्नर ने गोपनीय जांच के बाद सख्त एक्शन लिया।

Sep 3, 2026 - 17:23
Sep 3, 2026 - 17:27
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हंडिया थाना प्रभारी और दारोगा निलंबित, जमीन विवाद में एकपक्षीय कार्रवाई व रिश्वत के आरोप पर सख्त एक्शन
प्रयागराज के हंडिया थाना प्रभारी और दारोगा सस्पेंड किए गए

प्रयागराज। पुलिस कमिश्नर पीयूष मोर्डिया ने हंडिया थाना प्रभारी (एसएचओ) अनूप सरोज और थाने के दारोगा (एसआई) बृजेश कुमार/बृजेश सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। कार्रवाई का कारण मकान विवाद में एक पक्ष की कथित पैरवी, निष्पक्ष कार्रवाई न करना और रिश्वत लेने के गंभीर आरोप हैं। शिकायतकर्ता पक्ष का दावा है कि पुलिस अधिकारियों ने मकान कब्जा कराने में भूमिका निभाई, उचित धाराओं में मुकदमा दर्ज नहीं किया और बीच में चार लाख रुपये की रिश्वत भी ली गई। शिकायत पुलिस कमिश्नर तक पहुँचने के बाद गोपनीय जाँच कराई गई; प्रारंभिक जाँच में आरोप सही पाए जाने पर निलंबन आदेश जारी हुआ और ली गई रकम वापस कराने की बात कही गई है।

घटनाक्रम और आरोपों का सार

· अल्लापुर निवासी कारोबारी रोहन/रोशन श्रीवास्तव ने हंडिया के धौरहरा में एक मकान खरीदा था।

· आरोप है कि मकान का कब्जा देने के बाद दूसरे पक्ष (अरुण कुशवाहा व साधु मौर्या) ने पुलिस के साथ मिलीभगत कर फिर से कब्जा कर लिया।

· पीड़ित परिवार हंडिया थाने में दौड़ता रहा, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई; उलटे मकान के भीतर दीवारें तोड़कर नई दीवार खड़ी कर कब्जा मजबूत किया गया।

· परिवार ने थाने में तहरीर दी, पर आरोप है कि पुलिस ने उचित धाराओं में मुकदमा दर्ज नहीं किया।

· बाद में बिचौलियों के जरिए इंस्पेक्टर और दारोगा द्वारा चार लाख रुपये रिश्वत माँगे जाने और देने के बाद भी कब्जा वापस न मिलने की शिकायत पुलिस कमिश्नर से की गई।

प्रशासनिक कार्रवाई

· पुलिस कमिश्नर पीयूष मोर्डिया ने मामले को गंभीरता से लेकर गोपनीय जाँच के निर्देश दिए।

· प्रारंभिक जाँच में आरोप सही पाए जाने पर हंडिया एसएचओ अनूप सरोज और दारोगा बृजेश कुमार/सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया।

· रिपोर्टों के मुताबिक, जाँच के दौरान ली गई चार लाख रुपये की रकम पीड़ित परिवार को वापस कराई गई।

· फिलहाल विभागीय/आंतरिक जाँच जारी बताई जा रही है।

कानूनी-प्रशासनिक संदर्भ

ऐसे मामलों में आमतौर पर पुलिस विभाग की आचरण संबंधी नियमावली और भ्रष्टाचार निरोधक प्रावधानों के तहत विभागीय कार्रवाई की जाती है; यदि जाँच में सबूत मिलते हैं तो आगे की कानूनी कार्रवाई भी संभव होती है।

 

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सुशील कुमार पाण्डेय मैं, अपने देश का एक जिम्मेदार नागरिक बनने की यात्रा पर हूँ, यही मेरी पहचान है I