लोरेटो कॉलेज में संस्कृत दिवस समारोह, श्लोकों और प्रार्थनाओं से गूँजा परिसर
लोरेटो कॉलेज (स्वायत्तशासी) में संस्कृत दिवस समारोह का आयोजन किया गया। संस्कृत श्लोकों, प्रार्थना सभा और शांति-मंत्र के माध्यम से विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति, ज्ञान-परंपरा और संस्कृत भाषा के महत्व से परिचित कराया गया।
कोलकाता। संस्कृत भाषा की समृद्ध ज्ञान-परंपरा, भारतीय संस्कृति, दर्शन, साहित्य एवं वैज्ञानिक चिंतन में उसके योगदान को रेखांकित करते हुए लोरेटो कॉलेज (स्वायत्तशासी) में संस्कृत दिवस समारोह का आयोजन किया गया। प्रातः 9:30 बजे से 10:30 बजे तक आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में महाविद्यालय की सम्मानित सिस्टर्स, प्राध्यापकगण एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।
कार्यक्रम का मुख्य केंद्र प्रार्थना सभा रही। संस्कृत के श्लोकों एवं प्रार्थनाओं के पाठ से महाविद्यालय परिसर का वातावरण आध्यात्मिक, शांतिमय एवं प्रेरणादायक बना रहा। इस अवसर पर गुरु की महिमा का स्मरण करते हुए प्रसिद्ध संस्कृत श्लोक का पाठ किया गया -
“गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः
गुरुर्देवो महेश्वरः।
गुरुः साक्षात् परब्रह्म
तस्मै श्रीगुरवे नमः॥”
कार्यक्रम का शुभारंभ प्रोफेसर ए. निर्मला के विचारों से हुआ। उन्होंने विद्यार्थियों को संस्कृत भाषा को पढ़ने, लिखने और समझने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने संस्कृत के विभिन्न श्लोकों के माध्यम से देश, समाज एवं विश्व में शांति, सद्भाव और कल्याण की भावना को बढ़ावा देने का संदेश दिया।
कार्यक्रम में संस्कृत भाषा के महत्व, उसकी समृद्ध साहित्यिक परंपरा तथा भारतीय ज्ञान-परंपरा में उसके योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला गया। बृजेश प्रसाद, हिंदी प्राध्यापक, ने कहा कि भारतीय भाषाओं के संरक्षण के साथ-साथ अपनी सांस्कृतिक धरोहर और परंपराओं के संरक्षण पर भी विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। उन्होंने संस्कृत को भारत की प्राचीनतम भाषाओं में से एक बताते हुए कहा कि यह देश की समृद्ध सांस्कृतिक एवं ज्ञान-परंपरा का महत्वपूर्ण आधार है।
वक्ताओं ने संस्कृत की वैज्ञानिकता, भाषायी समृद्धि और वर्तमान समय में उसकी प्रासंगिकता पर भी विचार व्यक्त किए। विद्यार्थियों ने संस्कृत भाषा के प्रति अपनी रुचि और सम्मान व्यक्त करते हुए कार्यक्रम में सक्रिय सहभागिता की।
संस्कृत दिवस समारोह का उद्देश्य विद्यार्थियों को संस्कृत की समृद्ध परंपरा, उसकी वैज्ञानिकता तथा भारतीय संस्कृति एवं ज्ञान-विरासत में उसके महत्वपूर्ण योगदान से परिचित कराना था।
कार्यक्रम के समापन अवसर पर सभी के सुख, शांति, समृद्धि एवं कल्याण की मंगलकामना की गई। विश्व शांति एवं मानवता के कल्याण की भावना को व्यक्त करते हुए ‘ॐ असतो मा सद्गमय’ शांति-मंत्र का पाठ किया गया-
“ॐ असतो मा सद्गमय।
तमसो मा ज्योतिर्गमय।
मृत्योर्मा अमृतं गमय।
ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥”
इस प्रकार लोरेटो कॉलेज में आयोजित संस्कृत दिवस समारोह ज्ञानवर्धक, आध्यात्मिक, प्रेरणादायक एवं स्मरणीय रहा। कार्यक्रम ने विद्यार्थियों को संस्कृत भाषा के साथ-साथ भारतीय ज्ञान, संस्कृति और मानवीय मूल्यों से जुड़ने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान किया।
कॉलेज के हिंदी प्राध्यापक डॉ. बृजेश प्रसाद द्वारा प्रेषित प्रेस विज्ञप्ति के आधार पर यह समाचार केंद्रित है।
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