वायरल दावा फर्जी: IPS अजय पाल शर्मा को पश्चिम बंगाल में 5 साल की प्रतिनियुक्ति पर भेजने का MHA आदेश नहीं
IPS अजय पाल शर्मा को बंगाल में 5 साल की ट्रांसफर? वायरल फेसबुक पोस्ट फर्जी साबित। असल में वे चुनाव आयोग के अस्थायी पुलिस ऑब्जर्वर हैं। पूरी फैक्ट-चेक रिपोर्ट पढ़ें।
सोशल मीडिया पर एक वायरल फेसबुक पोस्ट तेजी से फैल रहा है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि गृह मंत्रालय ने यूपी कैडर के IPS अधिकारी डॉ. अजय पाल शर्मा को अगले 5 वर्षों के लिए पश्चिम बंगाल में प्रतिनियुक्ति पर स्थानांतरित कर दिया है। कई फैक्ट-चेक रिपोर्ट्स ने इस क्लेम को पूरी तरह फर्जी बताया है। यह दावा मूल रूप से एक सैटायर (व्यंग्य) अकाउंट से शुरू हुआ था, जिसे बाद में बिना जांच के शेयर किया गया। वास्तव में, अजय पाल शर्मा चुनाव आयोग द्वारा अस्थायी रूप से पुलिस ऑब्जर्वर के रूप में दक्षिण 24 परगना में तैनात हैं, जो बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद समाप्त हो जाएगी। कोई स्थायी या लंबी अवधि की MHA डेपुटेशन नहीं हुई है।
पृष्ठभूमि
यूपी के 2011 बैच के IPS अधिकारी डॉ. अजय पाल शर्मा (जिन्हें 'सिंघम' या 'एनकाउंटर स्पेशलिस्ट' के नाम से जाना जाता है) हाल ही में बंगाल चुनावों में चर्चा में आए। वे प्रयागराज में लॉ एंड ऑर्डर के एडिशनल कमिश्नर/डीआईजी के रूप में तैनात थे। चुनाव आयोग ने उन्हें दक्षिण 24 परगना जिले (फलता, डायमंड हार्बर आदि क्षेत्रों) के लिए पुलिस ऑब्जर्वर नियुक्त किया। उनके एक वायरल वीडियो में TMC उम्मीदवार जहांगीर खान के समर्थकों को सख्त चेतावनी देने के बाद विवाद खड़ा हो गया। TMC ने उनकी तैनाती पर सवाल उठाए, सुप्रीम कोर्ट में PIL दायर की गई, और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गए। इसी माहौल में 5 साल की ‘ट्रांसफर’ वाली अफवाह वायरल हुई।
वायरल पोस्ट की सचाई
- फर्जी दावा: गृह मंत्रालय (MHA) का कोई आधिकारिक आदेश नहीं है। कोई PIB रिलीज, गजट नोटिफिकेशन या आधिकारिक वेबसाइट पर जानकारी नहीं मिली।
- मूल स्रोत: X (Twitter) पर एक पैरोडी/सैटायर अकाउंट से शुरू हुआ, जिसे बाद में कई पेजेस ने बिना वेरिफाई किए फैलाया।
- वास्तविक स्थिति: केवल इलेक्शन कमीशन (ECI) द्वारा अस्थायी ड्यूटी। चुनाव समाप्त होने के बाद अधिकारी यूपी लौट आएंगे।
IPS अजय पाल शर्मा कौन हैं?
- 2011 बैच, उत्तर प्रदेश कैडर।
- डेंटल सर्जन से सिविल सेवक बने।
- रामपुर, शामली, जौनपुर, हाथरस, प्रयागराज आदि में सेवा।
- सख्त पुलिसिंग और एनकाउंटर के लिए चर्चित।
मीडिया और सोशल मीडिया पर प्रभाव
यह अफवाह बंगाल चुनाव 2026 के दौरान राजनीतिक ध्रुवीकरण को बढ़ावा देने के लिए इस्तेमाल हो रही है। कई फेसबुक पेजेस, इंस्टाग्राम रील्स और X पोस्ट्स पर इसे "बड़ी खबर" बताकर शेयर किया गया, जिससे गलतफहमी फैली।
निष्कर्ष और सलाह:
सोशल मीडिया पर वायरल खबरों को आधिकारिक स्रोतों (MHA.gov.in, PIB.gov.in, ECI.gov.in, UP Police वेबसाइट) से क्रॉस-चेक करें। अफवाहें चुनावी मौसम में आम हैं और कानून-व्यवस्था तथा लोकतंत्र दोनों को प्रभावित कर सकती हैं।
यह रिपोर्ट निष्पक्ष और सत्यापन-आधारित है। यदि नई आधिकारिक जानकारी आए तो अपडेट किया जाएगा।
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