प्रयागराज के सुआट्स विश्वविद्यालय में वेतन संकट, शिक्षकों का 2 दिनों तक चला धरना
प्रयागराज के SHUATS विश्वविद्यालय में शिक्षकों को कई महीनों से वेतन नहीं मिला। नाराज शिक्षक रजिस्ट्रार कार्यालय पर 2 दिन तक धरने पर बैठे और प्रशासन पर शोषण का आरोप लगाया है।
प्रयागराज, उत्तर प्रदेश। प्रयागराज के प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थान Sam Higginbottom University of Agriculture, Technology and Sciences (SHUATS) (सुआट्स) में इन दिनों वेतन संकट गंभीर रूप लेता जा रहा है। विश्वविद्यालय के शिक्षकों को पिछले कई महीनों से नियमित वेतन नहीं मिला है, जिसके कारण उनके सामने आर्थिक परेशानियाँ खड़ी हो गई हैं। वेतन न मिलने से शिक्षक वर्ग मानसिक तनाव, पारिवारिक जिम्मेदारियों और दैनिक खर्चों को लेकर परेशान है। कई शिक्षकों ने बताया कि बच्चों की फीस, घर का किराया, बैंक ऋण की किश्तें और घरेलू खर्च चलाना मुश्किल हो गया है।
इसी समस्या को लेकर नाराज़ शिक्षकों ने विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ धरना शुरू कर दिया है। पिछले दो दिनों तक बड़ी संख्या में शिक्षक रजिस्ट्रार कार्यालय के बाहर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करते रहे। प्रदर्शनकारी शिक्षकों का कहना है कि उन्होंने कई बार विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार और प्रशासनिक अधिकारियों से वार्ता की, लेकिन हर बार केवल आश्वासन मिला, समाधान नहीं।
शिक्षकों ने सवाल उठाया कि जब छात्रों से समय पर फीस वसूली जा रही है, संस्थान के अन्य खर्च नियमित रूप से किए जा रहे हैं, तब केवल शिक्षकों के वेतन को ही क्यों रोका जा रहा है। उनका आरोप है कि प्रशासन वित्तीय संकट का हवाला देकर केवल कर्मचारियों और शिक्षकों का शोषण कर रहा है।
धरने पर बैठे शिक्षकों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द बकाया वेतन जारी नहीं किया गया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। इसमें कक्षाओं का बहिष्कार, सामूहिक अवकाश और उच्च शिक्षा विभाग से शिकायत जैसे कदम शामिल हो सकते हैं।
वहीं विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से अभी तक कोई स्पष्ट आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। कर्मचारियों और छात्रों के बीच भी इस मुद्दे को लेकर चर्चा तेज है।
शिक्षा जगत के जानकारों का कहना है कि किसी भी विश्वविद्यालय की गुणवत्ता उसके शिक्षकों पर निर्भर करती है। यदि शिक्षक आर्थिक संकट में रहेंगे तो इसका असर सीधे शिक्षण व्यवस्था और छात्रों के भविष्य पर पड़ेगा। ऐसे में प्रशासन को संवेदनशीलता दिखाते हुए तत्काल समाधान निकालना चाहिए।
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