उदयपुर के लोहार मोहम्मद शेर खान का कमाल
उदयपुर लोहार मोहम्मद शेर खान का विश्वगुरु चूल्हा: 2 किलो लकड़ी से 30 मिनट में 30 लोगों का खाना। धुआं कम, 10,000+ बिके।
2 किलो लकड़ी से 30 मिनट में 30 लोगों का खाना तैयार करने वाला 'विश्वगुरु चूल्हा'
उदयपुर के सुखेर इलाके के लोहार मोहम्मद शेर खान ने केवल 8वीं पास होने के बावजूद 27 साल के अनुभव से 'विश्वगुरु चूल्हा' आविष्कृत किया। यह 3-इन-1 चूल्हा दाल-सब्जी पकाने, तलने और रोटी-बाटी सेंकने का काम एक साथ करता है। सिर्फ 2 किलो लकड़ी से 30 मिनट में 25-30 लोगों का भोजन तैयार हो जाता है, धुआँ कम निकलता है और ईंधन की 70% बचत होती है। अब तक 10,000 से ज्यादा चूल्हे बिक चुके हैं, जो ग्रामीण भारत की रसोई क्रांति ला रहा है।
राजस्थान के उदयपुर जिले के मोहम्मद शेर खान, जो पेशे से लोहार हैं, अपनी सीमित पढ़ाई (केवल कक्षा 8 तक) के बावजूद विज्ञान की दुनिया में छा गए हैं। उन्होंने 'विश्वगुरु चूल्हा' नामक अनोखा आविष्कार किया है, जो गांवों की महिलाओं की पुरानी समस्या ज्यादा लकड़ी की खपत, धुएं से आंखों-फेफड़ों की बीमारी और घंटों की मेहनत का पूरा समाधान है।
यह चूल्हा 3-इन-1 सिस्टम पर आधारित है। इसमें एक साथ दाल या सब्जी पकाई जा सकती है, तली हुई चीजें बनाई जा सकती हैं और रोटी या बाटी सेंकी जा सकती है। खासियत यह है कि बेहतर इंसुलेशन और डिजाइन से गर्मी का अधिकतम उपयोग होता है। पारंपरिक चूल्हे में जहां 10-12 किलो लकड़ी लगती है, वहीं यह सिर्फ 2 किलो लकड़ी से 30 मिनट में 25-30 लोगों का पूर्ण भोजन तैयार कर देता है। धुआँ भी न्यूनतम निकलता है, जिससे पर्यावरण संरक्षण और स्वास्थ्य लाभ दोनों मिलते हैं।
शेर खान ने बताया, "गांव की बहनों की परेशानी देखकर मैंने इसे बनाया। अब तक 10,000 से ज्यादा चूल्हे बिक चुके हैं, और सरकारी योजनाओं से मान्यता मिल रही है।" यह आविष्कार समय, ईंधन और मेहनत तीनों बचाता है, खासकर राजस्थान जैसे सूखाग्रस्त क्षेत्रों में। स्थानीय प्रशासन और इनोवेशन सेंटर इसे बढ़ावा दे रहे हैं।
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