“जय हिंद, वंदे मातरम्…” से शुरू हुई भ्रष्टाचार के विरुद्ध बगावत
लखनऊ कमिश्नरेट के सिपाही सुनील कुमार शुक्ला ने यूपी पुलिस में अवैध वसूली और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए। वीडियो वायरल होने के बाद उनका फेसबुक अकाउंट भारत में ब्लॉक कर दिया गया।
“जय हिंद, वंदे मातरम्…” से शुरू हुई एक बगावत
UP Police में भ्रष्टाचार का आरोप लगाने वाले सिपाही का फेसबुक अकाउंट भारत में ब्लॉक
उत्तर प्रदेश पुलिस के सिपाही सुनील कुमार शुक्ला का नाम इन दिनों सोशल मीडिया और वैकल्पिक मीडिया प्लेटफॉर्मों पर तेजी से चर्चा में है। लखनऊ कमिश्नरेट की रिजर्व पुलिस लाइन में तैनात सुनील शुक्ला ने वीडियो जारी कर पुलिस विभाग के भीतर कथित भ्रष्टाचार, अवैध वसूली और अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगाए हैं। अपने वीडियो संदेश में उन्होंने कहा कि पुलिस विभाग में ‘जमींदारी व्यवस्था’ चल रही है, जहाँ ड्यूटी लगाने के नाम पर सिपाहियों और दीवानों से प्रति माह दो-दो हजार रुपये वसूले जाते हैं। सुनील के अनुसार यह रकम गार्ड कमांडर से होते हुए गणना प्रभारी और फिर उच्च अधिकारियों तक पहुंचती है। उन्होंने दावा किया कि केवल एक गणना इकाई से लगभग आठ लाख रुपये प्रतिमाह की अवैध उगाही होती है और ऐसी कई इकाइयाँ पूरे कमिश्नरेट में कार्यरत हैं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से लगाई न्याय की गुहार
सुनील शुक्ला ने अपने वीडियो में सीधे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को संबोधित करते हुए कहा कि उन्हें विभागीय अधिकारियों से न्याय की उम्मीद नहीं है क्योंकि जिन अधिकारियों पर आरोप लगाए गए हैं, वही जाँच कर रहे हैं। उन्होंने माँग की कि मामले की मजिस्ट्रेटी या न्यायिक जाँच कराई जाए ताकि पुलिसकर्मियों के साथ हो रहे कथित शोषण और भ्रष्टाचार का खुलासा हो सके। वीडियो में श्री शुक्ला ने कहा, “यदि मेरी आवाज बंद करनी है तो या तो सुधार करना पड़ेगा या फिर मेरी हत्या करानी पड़ेगी।”
वायरल वीडियो के बाद बढ़ा विवाद
वीडियो वायरल होने के बाद मामला और गंभीर हो गया। सुनील शुक्ला ने आरोप लगाया कि रात करीब एक बजे पुलिसकर्मी उनके घर पहुंचे, जहां उनकी वृद्ध मां और बहन रहती हैं। उन्होंने इसे “दबाव बनाने की कार्रवाई” बताया। उनका कहना है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने के कारण उन्हें और उनके परिवार को मानसिक प्रताड़ना दी जा रही है। वीडियो में उन्होंने भगत सिंह का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्हें “मानसिक रूप से तोड़ा नहीं जा सकता।”
फेसबुक अकाउंट भारत में प्रतिबंधित
11 मई 2026 तक उपलब्ध जानकारी के अनुसार सुनील शुक्ला का फेसबुक अकाउंट भारत में उपलब्ध नहीं दिखाई दे रहा है। स्क्रीनशॉट में ‘Account not available in India’ संदेश प्रदर्शित हो रहा है, जिसमें लिखा है कि कानूनी अनुरोध के अनुपालन में इस कंटेंट को प्रतिबंधित किया गया है। इस कार्रवाई के बाद सोशल मीडिया पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सरकारी संस्थाओं की जवाबदेही को लेकर बहस तेज हो गई है।
जागो टीवी से बातचीत में क्या बोले सुनील शुक्ला?
जागो टीवी के प्रधान संपादक सुशील कुमार पांडेय से बातचीत में सुनील कुमार शुक्ला ने दावा किया कि उनके फेसबुक अकाउंट को भारत में रोक दिया गया है और लोग उनके वीडियो नहीं देख पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि जनता ने साथ नहीं दिया तो “उत्तर प्रदेश पुलिस उनकी हत्या करवा सकती है।” उन्होंने यह भी कहा कि वे किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि पूरे पुलिस परिवार में सुधार की माँग कर रहे हैं।
बड़ा सवाल: क्या सिस्टम के भीतर से उठी आवाज दबाई जा रही है?
यह मामला कई गंभीर प्रश्न खड़े करता है-
· क्या विभागीय भ्रष्टाचार के आरोपों की निष्पक्ष जाँच होगी?
· क्या सोशल मीडिया पर आवाज उठाने वाले कर्मचारियों को संरक्षण मिलेगा?
· क्या अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता केवल आम नागरिकों तक सीमित है?
· क्या किसी सरकारी कर्मचारी को संस्थागत भ्रष्टाचार के खिलाफ बोलने का अधिकार है?
इन सवालों के बीच सुनील शुक्ला का मामला अब केवल एक सिपाही का व्यक्तिगत संघर्ष नहीं, बल्कि संस्थागत पारदर्शिता और लोकतांत्रिक जवाबदेही की बहस का विषय बन चुका है।
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