बांग्ला पोक्खो के संस्थापक गार्गा चट्टोपाध्याय गिरफ्तार

बांग्ला पोक्खो संस्थापक गार्गा चट्टोपाध्याय को EVM हेराफेरी की भ्रामक अफवाहें फैलाने के आरोप में कोलकाता पुलिस ने गिरफ्तार किया। देशप्रिया पार्क से अरेस्ट, PSO के पास 24 कारतूस बरामद। पूरी खबर पढ़ें।

May 13, 2026 - 07:21
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बांग्ला पोक्खो के संस्थापक गार्गा चट्टोपाध्याय गिरफ्तार
बांग्ला पोक्खो के संस्थापक गार्गा चट्टोपाध्याय गिरफ्तार

EVM टैंपरिंग की भ्रामक अफवाहें फैलाने का आरोप, देशप्रिया पार्क से साइबर सेल ने किया अरेस्ट

कोलकाता, 12 मई 2026 पश्चिम बंगाल की राजनीति और सामाजिक-सांस्कृतिक बहस में सक्रिय रहने वाले बांग्ला पोक्खो संगठन के संस्थापक गार्गा चट्टोपाध्याय को मंगलवार को कोलकाता पुलिस की साइबर क्राइम सेल ने देशप्रिया पार्क (दक्षिण कोलकाता) इलाके से गिरफ्तार कर लिया। यह कार्रवाई चुनाव आयोग की शिकायत और उत्तरी कोलकाता जिला निर्वाचन अधिकारी स्मिता पांडे द्वारा दर्ज FIR के आधार पर की गई। पुलिस आयुक्त अजय नंद ने बताया कि गार्गा चट्टोपाध्याय ने चुनाव प्रचार, मतदान और मतगणना के दौरान सोशल मीडिया (विशेषकर X और फेसबुक) पर EVM मशीनों में हेराफेरी, रात में चेक किए जाने के बावजूद सुबह खराब होने और चुनावी प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं के आरोप लगाते हुए भ्रामक पोस्ट किए। इन पोस्टों से जनता में भ्रम फैला, विभिन्न राजनीतिक दलों में असमंजस की स्थिति बनी और सामाजिक तनाव बढ़ा।

पूछताछ और समन

पुलिस ने उन्हें दो बार समन भेजा था, लेकिन वे पेश नहीं हुए। चुनाव परिणाम घोषणा (जिसमें BJP की भारी जीत हुई) के बाद वे छिपे हुए थे। मंगलवार को उन्हें हिरासत में लिया गया और पूछताछ जारी है।

कारतूस बरामदगी

गिरफ्तारी के दौरान उनके साथ मौजूद व्यक्तिगत सुरक्षा अधिकारी (PSO) के पास से 24 राउंड लाइव कारतूस बरामद किए गए। पुलिस ने स्पष्ट किया कि कारतूस चट्टोपाध्याय के व्यक्तिगत कब्जे से नहीं मिले, बल्कि उनके सुरक्षा कर्मी से प्राप्त हुए हैं। इस पहलू की अलग से जांच चल रही है।

गार्गा चट्टोपाध्याय कौन हैं? 

- पेशे से न्यूरोसाइंटिस्ट और भारतीय सांख्यिकी संस्थान (ISI) कोलकाता से जुड़े प्रोफेसर। 

- 7 जनवरी 2018 को स्थापित बांग्ला पोक्खो संगठन के संस्थापक। यह संगठन बंगाली भाषा, संस्कृति और पहचान की रक्षा के लिए काम करता है। 

- संगठन और चट्टोपाध्याय अकसर हिंदी सांस्कृतिक प्रभाव, गैर-बंगाली (खासकर हिंदीभाषी) समुदाय और बाहरीबनाम स्थानीयकी बहस में आक्रामक अभियान चलाने के लिए विवादों में रहते हैं। 

- सोशल मीडिया पर सक्रिय, जहां वे बंगाली राष्ट्रवाद और भाषाई अधिकारों पर मजबूत रुख रखते हैं।

पृष्ठभूमि और विवाद

बांग्ला पोक्खो लंबे समय से भाषाई विभाजन पैदा करने और क्षेत्रीय भावनाओं को भड़काने के आरोपों का सामना करता रहा है। पूर्ववर्ती TMC सरकार के दौरान संगठन के कुछ नेताओं के सत्ता से करीबी संबंधों की चर्चा भी रही, हालांकि आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई। 2026 विधानसभा चुनाव के दौरान उनके EVM संबंधी पोस्ट ने विशेष ध्यान खींचा।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ   

- BJP समर्थकों का कहना है कि यह फेक न्यूज और भड़काऊ बयानों पर कानून का राज स्थापित करने की दिशा में सही कदम है। 

- कुछ विपक्षी आवाजें (TMC और वामपंथी सहित) इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला और बंगाली पहचान के खिलाफ कार्रवाई बता रही हैं। TMC सांसद महुआ मोइत्रा जैसी नेता इसे डराने की रणनीतिकरार दे रही हैं। 

- राज्य में भाषाई-क्षेत्रीय तनाव की पृष्ठभूमि में यह गिरफ्तारी नई बहस छेड़ सकती है।

कानूनी पहलू

मामले में IT Act, IPC की विभिन्न धाराओं (भड़काऊ बयान, सार्वजनिक शांति भंग आदि) के तहत जांच चल रही है। गार्गा चट्टोपाध्याय को बुधवार को कोर्ट में पेश किया जाएगा, जहां पुलिस उनकी हिरासत की मांग कर सकती है।

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सुशील कुमार पाण्डेय मैं, अपने देश का एक जिम्मेदार नागरिक बनने की यात्रा पर हूँ, यही मेरी पहचान है I