हरिजन सेवक संघ के सेंट्रल बोर्ड एवं राष्ट्रीय परामर्श मंडल की तीन दिवसीय बैठक संपन्न
जलगांव के गांधीतीर्थ जैन हिल्स में 7 से 9 अगस्त तक हरिजन सेवक संघ की 95वीं महासभा हुई। गांधी विचार, सामाजिक समरसता, सेवा और जनकल्याण पर मंथन हुआ।
सामाजिक समरसता और गांधी विचारों पर मंथन
जलगाँव/कोलकाता। महात्मा गांधी द्वारा वर्ष 1932 में स्थापित हरिजन सेवक संघ के सेंट्रल बोर्ड एवं राष्ट्रीय परामर्श मंडल की तीन दिवसीय बैठक का आयोजन महाराष्ट्र के जलगाँव स्थित गांधी तीर्थ, जैन हिल्स में सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। देश के विभिन्न राज्यों से आए गांधीवादी चिंतकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, शिक्षाविदों, आश्रम प्रतिनिधियों तथा सार्वजनिक जीवन से जुड़े अनेक प्रतिष्ठित व्यक्तित्वों ने इसमें भाग लिया। बैठक में गांधीजी के सत्य, अहिंसा, समानता, सेवा और स्वावलंबन के विचारों को समकालीन चुनौतियों, तकनीकी बदलावों और सामाजिक-आर्थिक विकास के प्रश्नों से जोड़ते हुए व्यापक विमर्श हुआ।
बैठक की अध्यक्षता हरिजन सेवक संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रो. डॉ. शंकर कुमार सन्याल ने की। उद्घाटन जैन इरिगेशन के उपाध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक अनिल जैन ने किया। इस अवसर पर संघ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं पूर्व राज्यसभा सांसद नरेश यादव, गुजरात विद्यापीठ के पूर्व कुलपति डॉ. सुदर्शन अयंगर, पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री संजय पासवान, प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में प्रधानमंत्री कार्यालय के पूर्व निदेशक सुधीन्द्र कुलकर्णी, साबरमती आश्रम के अध्यक्ष जयेशभाई पटेल, लोकभारती विश्वविद्यालय के चांसलर राजेंद्र खेमानी, शोभित विश्वविद्यालय के चांसलर कुँवर शेखर विजेंद्र, महाराष्ट्र हरिजन सेवक संघ के अध्यक्ष एवं पूर्व एमएलसी मोहन जोशी, जलगाँव हरिजन सेवक संघ के सचिव शंभू पाटिल तथा अनेक अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
इसके अतिरिक्त बंगाल हरिजन सेवक संघ की सचिव मती शिखा सन्याल, हरिजन सेवक संघ की राष्ट्रीय सचिव प्रो. अनीशा बाला त्यागी, मानद सचिव संजय कुमार राय, पवनार आश्रम की ज्योति दीदी, विनोबा प्रचार प्रवाह की प्राची बहन, लंदन (इंग्लैंड) से विशेष रूप से आईं निवेश बैंकर एवं सलाहकार मती लता गुल्लापल्ली, विनोबा सेवा आश्रम के अध्यक्ष रमेश भैया, तमिलनाडु हरिजन सेवक संघ के पी. मारुति, हरियाणा कैडर के पूर्व आईएएस अधिकारी जयवंती शिवकंद, सेवाधाम आश्रम, उज्जैन के डॉ. सुधीर गोयल, गांधी आश्रम ट्रस्ट की उर्मिला वास्तव तथा उत्तर प्रदेश हरिजन सेवक संघ की अध्यक्ष मती कुसुम जौहरी भी उपस्थित थीं।
बैठक के प्रारंभ में देशभर से आए प्रतिनिधियों का स्वागत किया गया। इसके बाद राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. सन्याल ने अपने अध्यक्षीय मार्गदर्शन में हरिजन सेवक संघ के रचनात्मक कार्यों के विस्तार, सामाजिक समरसता, शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वावलंबन और सामाजिक न्याय के कार्यक्रमों को और व्यापक बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। सेंट्रल बोर्ड एवं राष्ट्रीय परामर्श मंडल के सदस्यों ने संगठन की भावी दिशा और जनसरोकारों से जुड़े विषयों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया।
स्वागत भाषण देते हुए महाराष्ट्र हरिजन सेवक संघ के अध्यक्ष एवं पूर्व एमएलसी मोहन जोशी ने कहा कि महात्मा गांधी के पदचिह्नों से प्रेरित रचनात्मक कार्य ही समाज परिवर्तन का स्थायी माध्यम बन सकते हैं। उन्होंने कहा कि गांधीजी के सत्य, अहिंसा, स्वच्छता, समरसता और सर्वसमावेशी विकास के विचारों को व्यवहार में उतारना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
उद्घाटन भाषण में अनिल जैन ने कहा कि गांधी विचार, आधुनिक तकनीक और उद्यमिता का समन्वय भारत के विकास का नया मार्ग खोल सकता है। उन्होंने “वेस्ट टू वेल्थ” की अवधारणा का उल्लेख करते हुए कहा कि कृषि और उद्योग से निकलने वाले अपशिष्ट को ऊर्जा, रोजगार और संपत्ति में बदला जा सकता है। उनके अनुसार समाज के वंचित वर्गों को उद्यमिता से जोड़कर सम्मानजनक आर्थिक अवसर उपलब्ध कराए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि तेजी से बदलती तकनीकी दुनिया में सत्य, अहिंसा, समानता, स्वावलंबन और मानवता जैसे मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुँचाना पहले से कहीं अधिक आवश्यक हो गया है। उन्होंने बताया कि गांधी तीर्थ की स्थापना स्वर्गीय भवरलाल जैन की गांधीवादी दृष्टि और सामाजिक प्रतिबद्धता का परिणाम है।
गुजरात विद्यापीठ के पूर्व कुलपति डॉ. सुदर्शन अयंगर ने गांधी विचारों के गंभीर अध्ययन के साथ-साथ रचनात्मक कार्य और ग्राम स्वराज को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि तकनीक का विस्तार महत्वपूर्ण है, लेकिन उसके पीछे निहित मानवीय और नैतिक तत्वों को कमजोर नहीं होने देना चाहिए। सेवा कार्य में अहंकार से बचते हुए समाज के साथ सहभागिता का भाव विकसित करना समय की मांग है। उन्होंने गांधीजी के प्रेम और डॉ. भीमराव आंबेडकर के न्याय-आधारित संघर्षशील चिंतन को साथ लेकर आगे बढ़ने की आवश्यकता भी रेखांकित की।
अपने अध्यक्षीय संबोधन में डॉ. शंकर कुमार सन्याल ने कहा कि “सत्य, सेवा और समानता पर आधारित समाज का निर्माण ही गांधी विचार की वास्तविक विरासत है।” उन्होंने कहा कि संघर्ष, हिंसा और अस्थिरता से गुजर रही दुनिया में गांधीजी के विचार पहले से अधिक प्रासंगिक हो गए हैं। शांति, सामाजिक न्याय, पर्यावरण संरक्षण, ग्रामीण विकास और मानव कल्याण के लिए सामूहिक प्रयास समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि हरिजन सेवक संघ शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वावलंबन और सामाजिक समानता के माध्यम से गांधीजी के रचनात्मक कार्यक्रमों को आगे बढ़ा रहा है। डॉ. सन्याल ने युवाओं से गांधी विचारों को आधुनिक ज्ञान, तकनीक और सामाजिक उत्तरदायित्व के साथ जोड़ने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में जलगाँव हरिजन सेवक संघ के सचिव शंभू पाटिल ने प्रस्तावना प्रस्तुत की। तीन दिनों तक चले इस विमर्श में संगठन के रचनात्मक कार्यों के विस्तार, समाज के वंचित वर्गों तक पहुँच बढ़ाने तथा गांधीवादी मूल्यों को नई पीढ़ी तक प्रभावी ढंग से पहुँचाने पर विशेष चर्चा हुई।
बैठक का एक महत्वपूर्ण आयाम उसका सांस्कृतिक और आध्यात्मिक वातावरण भी रहा। गांधी रिसर्च फाउंडेशन के सहयोग से आयोजित गांधीमय गीत-भजन संध्या ने प्रतिभागियों को विशेष रूप से प्रभावित किया। कार्यक्रम की शुरुआत “रघुपति राघव राजा राम” से हुई और “मीरा हो गई मगन” जैसे भजनों तक पहुँची। गुरुदेव रवीन्द्रनाथ ठाकुर की पुण्यतिथि के अवसर पर “एकला चलो रे” का भी भावपूर्ण गायन किया गया। इस सांस्कृतिक संध्या में गांधी चिंतन, संत परंपरा, आध्यात्मिकता, सामाजिक समरसता और समकालीन राष्ट्रीय परिस्थितियों पर गंभीर संवाद का वातावरण बना रहा।
तीन दिनों तक चले इस राष्ट्रीय मंथन का केंद्रीय संदेश स्पष्ट था- गांधी विचार केवल इतिहास की धरोहर नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य की चुनौतियों का भी एक जीवंत मार्गदर्शक है। सामाजिक न्याय, मानवीय गरिमा, पर्यावरणीय संतुलन और आत्मनिर्भर विकास की दिशा में आगे बढ़ते भारत के लिए गांधी का चिंतन आज भी उतना ही प्रासंगिक है जितना स्वतंत्रता आंदोलन के दौर में था।
What's Your Reaction?

