पन्ना में 14वें दिन भी विस्थापितों का सत्याग्रह, ‘सूली’ पर उठाई माँग

पन्ना के अजयगढ़ क्षेत्र में मझगांय और रुंझ मध्यम सिंचाई परियोजनाओं से प्रभावित किसानों और आदिवासी परिवारों का सत्याग्रह 14वें दिन भी जारी रहा। ग्रामीणों ने जल, मिट्टी और चिता सत्याग्रह के बाद ‘सूली सत्याग्रह’ के जरिए मुआवजा और पुनर्वास की माँग उठाई है। प्रशासन ने प्रभावित परिवारों को 10 अक्टूबर तक मुआवजा देने के निर्देश दिए हैं। आंदोलन को केन-बेतवा और अन्य परियोजनाओं से प्रभावित परिवारों का भी समर्थन मिला है।

Sep 28, 2026 - 07:04
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पन्ना में 14वें दिन भी विस्थापितों का सत्याग्रह, ‘सूली’ पर उठाई माँग
पन्ना में 14वें दिन भी विस्थापितों का सत्याग्रह, ‘सूली’ पर उठाई माँग

मझगांय-रुंझ परियोजनाओं से प्रभावित परिवारों का आंदोलन जारी, केन-बेतवा और अन्य परियोजनाओं से प्रभावित लोगों का भी समर्थन; प्रशासन ने 10 अक्तूबर तक मुआवजा वितरण के निर्देश दिए

पन्ना, 26 सितंबर 2026। मध्य प्रदेश के पन्ना जिले के अजयगढ़ क्षेत्र में विभिन्न विकास और सिंचाई परियोजनाओं से प्रभावित किसानों और आदिवासी परिवारों का आंदोलन 14वें दिन भी जारी रहा। मझगांय और रुंझ मध्यम सिंचाई परियोजनाओं से प्रभावित परिवार मुआवजा, पुनर्वास और पात्र परिवारों को उनके अधिकार दिए जाने की माँग को लेकर लगातार सत्याग्रह कर रहे हैं। आंदोलन को केन-बेतवा लिंक परियोजना तथा ललितपुर-सिंगरौली रेल परियोजना से प्रभावित लोगों का भी समर्थन मिलने की रिपोर्टें सामने आई हैं। आंदोलन के दौरान ग्रामीणों ने विरोध के अलग-अलग प्रतीकात्मक तरीके अपनाए हैं। पहले चिता सत्याग्रह, जल सत्याग्रह और मिट्टी सत्याग्रह किया गया। इसके बाद 24 सितंबर के आसपास आंदोलनकारियों ने ‘सूली सत्याग्रह’ शुरू किया। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार ग्रामीण जलभराव वाले क्षेत्र में खड़े होकर और प्रतीकात्मक रूप से सूली के सामने खड़े होकर अपनी मांगें उठा रहे हैं।

पानी में खड़े होकर विरोध

26 सितंबर की स्थानीय रिपोर्टों में दावा किया गया कि कुछ प्रदर्शनकारी लगातार पानी में खड़े होकर सत्याग्रह कर रहे हैं और लंबे समय तक पानी में रहने से उनके पैरों की त्वचा प्रभावित होने तथा घाव होने की शिकायत सामने आई है। ये स्वास्थ्य संबंधी विवरण फिलहाल आंदोलनकारियों और स्थानीय रिपोर्टों पर आधारित हैं; प्रत्येक मामले की स्वतंत्र चिकित्सकीय पुष्टि उपलब्ध नहीं है। आंदोलनकारियों का कहना है कि प्रभावित परिवारों को पर्याप्त मुआवजा और पुनर्वास दिए बिना परियोजनाओं के कारण पैदा हुए जलभराव और विस्थापन की स्थिति का सामना करना पड़ रहा है। कुछ रिपोर्टों में ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि कई परिवारों के घर और जमीन प्रभावित हुए हैं, जबकि मुआवजे तथा पुनर्वास की प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है।

प्रशासन ने 10 अक्तूबर तक मुआवजे के निर्देश दिए

आंदोलन के बीच प्रशासन की ओर से भी कार्रवाई की गई है। 21 सितंबर को सामने आई रिपोर्टों के अनुसार सागर संभाग के आयुक्त दिलीप कुमार ने मझगांय और रुंझ मध्यम सिंचाई परियोजनाओं से प्रभावित परिवारों को 10 अक्तूबर तक मुआवजा राशि वितरित करने के निर्देश दिए थे। इनमें बालूपुर और कुंवरपुर सहित प्रभावित परिवारों का उल्लेख किया गया है। इसके बाद जिला प्रशासन ने मुआवजा वितरण की प्रक्रिया शुरू करने की बात कही।  इससे आंदोलन के एक महत्वपूर्ण पहलू पर प्रशासन और प्रदर्शनकारियों के दावों में अंतर दिखाई देता है। जहां प्रदर्शनकारी मुआवजे और पुनर्वास को लेकर लंबित मामलों की बात कर रहे हैं, वहीं प्रशासन ने भुगतान की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। ऐसे में अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि 10 अक्तूबर तक वास्तव में कितने पात्र परिवारों को कितना मुआवजा मिलता है।

केन-बेतवा परियोजना का भी जुड़ा है संदर्भ

पन्ना में चल रहे इस आंदोलन को केवल केन-बेतवा लिंक परियोजना का आंदोलन बताना पूरी तरह सही नहीं होगा। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार वर्तमान आंदोलन का प्रमुख संदर्भ मझगांय और रुंझ मध्यम सिंचाई परियोजनाओं से प्रभावित परिवार हैं। हालांकि आंदोलन के नेतृत्व से जुड़े लोगों ने बताया है कि केन-बेतवा लिंक परियोजना और ललितपुर-सिंगरौली रेल परियोजना से प्रभावित लोग भी आंदोलन को समर्थन दे रहे हैं।  केन-बेतवा लिंक परियोजना के आधिकारिक पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन आंकड़ों में भी पन्ना जिले के प्रभावित परिवारों और मुआवजा वितरण की स्थिति दर्ज है। इसलिए वर्तमान आंदोलन के संदर्भ में अलग-अलग परियोजनाओं के प्रभावित परिवारों और उनके दावों को अलग-अलग देखना जरूरी है।

रमिया बाई की मौत के बाद भी उठे सवाल

इस आंदोलन के दौरान एक आदिवासी महिला रमिया बाई की मृत्यु की खबर भी सामने आई थी। इस मामले में आंदोलनकारियों ने उनकी परेशानी को आंदोलन और विस्थापन से जोड़ा, जबकि प्रशासन की ओर से कहा गया कि उनके परिवार को मुआवजा मिल चुका था। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार प्रशासन ने मृत्यु के कारण की पुष्टि जाँच के बाद होने की बात कही थी। इसलिए रमिया बाई की मृत्यु को सीधे आंदोलन या विस्थापन के कारण हुई मौत के रूप में स्थापित करना अभी उचित नहीं होगा।

विकास परियोजनाओं के बीच पुनर्वास सबसे बड़ा सवाल

पन्ना में जारी आंदोलन ने विकास परियोजनाओं से होने वाले विस्थापन और पुनर्वास की प्रक्रिया को फिर चर्चा में ला दिया है। सिंचाई और जल परियोजनाओं का उद्देश्य क्षेत्र में जल उपलब्धता और कृषि संबंधी जरूरतों को पूरा करना है, लेकिन परियोजनाओं से प्रभावित परिवारों के लिए जमीन, मकान और आजीविका का नुकसान भी महत्वपूर्ण प्रश्न है। अब प्रशासन के सामने चुनौती केवल मुआवजा वितरण की नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करने की भी है कि पात्र परिवारों की पहचान, परिसंपत्तियों का मूल्यांकन, भुगतान और पुनर्वास की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से पूरी हो।

14वें दिन भी जारी सत्याग्रह के बीच फिलहाल ग्रामीण आंदोलन खत्म करने के बजाय अपनी मांगों पर कायम हैं। दूसरी ओर प्रशासन की ओर से 10 अक्तूबर तक मुआवजा वितरण का निर्देश दिया जा चुका है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह आंदोलन किस दिशा में जाता है और प्रशासन के निर्देशों का जमीन पर कितना पालन होता है, इस पर सभी की नजर रहेगी।

 

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सुशील कुमार पाण्डेय मैं, अपने देश का एक जिम्मेदार नागरिक बनने की यात्रा पर हूँ, यही मेरी पहचान है I