विद्यासागर विश्वविद्यालय में पंडित ईश्वरचंद्र विद्यासागर की 207वीं जयंती, संग्रहालय का उद्घाटन
मिदनापुर स्थित विद्यासागर विश्वविद्यालय में महान शिक्षाविद एवं समाज सुधारक पंडित ईश्वरचंद्र विद्यासागर की 207वीं जयंती गरिमा के साथ मनाई गई। इस अवसर पर विद्यासागर म्यूजियम और डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी रीडर्स पार्क का उद्घाटन हुआ। चार भाषाओं में 'शकुंतला' के अनुवादित संस्करण तथा 'विद्यासागर रचना समग्र' के चौथे खंड का भी विमोचन किया गया।
विद्यासागर विश्वविद्यालय में पंडित ईश्वरचंद्र विद्यासागर की 207वीं जयंती पर भव्य समारोह, संग्रहालय और रीडर्स पार्क का उद्घाटन
मिदनापुर, 25 सितंबर। महान शिक्षाविद, समाज सुधारक और मानवतावादी चिंतक पंडित ईश्वरचंद्र विद्यासागर की 207वीं जयंती विद्यासागर विश्वविद्यालय में गरिमा और सम्मान के साथ मनाई गई। समारोह में विद्यासागर के शिक्षा-सुधार, महिला-शिक्षा, सामाजिक सुधार, मानवीय मूल्यों और तार्किक चिंतन को वर्तमान पीढ़ी तक पहुंचाने पर विशेष जोर दिया गया। समारोह में पश्चिम बंगाल के उच्च शिक्षा मंत्री जगन्नाथ चट्टोपाध्याय मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इंडियन म्यूज़ियम, कोलकाता के निदेशक डॉ. सायन भट्टाचार्य तथा मेदिनीपुर के विधायक डॉ. शंकर कुमार गुच्छैत विशेष अतिथि के रूप में शामिल हुए।
विद्यासागर संग्रहालय और रीडर्स पार्क का उद्घाटन
समारोह का एक प्रमुख आकर्षण विद्यासागर म्यूजियम तथा डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी रीडर्स पार्क का उद्घाटन रहा। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. दीपक कुमार कर ने अपने संबोधन में कहा कि यह दिन विश्वविद्यालय के लिए अविस्मरणीय है, क्योंकि परिसर में विद्यासागर म्यूजियम और डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी रीडर्स पार्क का उद्घाटन किया गया है। उन्होंने ईश्वरचंद्र विद्यासागर के सामाजिक और शैक्षिक योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि उन्होंने महिला-शिक्षा को सामाजिक बदलाव का महत्वपूर्ण माध्यम माना था।
'विद्यासागर पुरस्कार' से दो विद्वान सम्मानित
समारोह के दौरान प्रतिष्ठित 'विद्यासागर पुरस्कार' प्रदान किया गया। इस वर्ष यह सम्मान विनायक बंद्योपाध्याय और प्रो. गोपालचंद्र मिश्र को प्रदान किया गया। इसके साथ ही 'अन्नपूर्णा चट्टोपाध्याय पुरस्कार' से प्रो. चित्त पांडा को सम्मानित किया गया। सम्मान समारोह के माध्यम से विश्वविद्यालय ने विद्यासागर की वैचारिक और सामाजिक विरासत को आगे बढ़ाने में योगदान देने वाले विद्वानों के प्रति सम्मान व्यक्त किया।
चार भाषाओं में 'शकुंतला' का विमोचन
समारोह में विद्यासागर विश्वविद्यालय की ओर से प्रकाशित महत्वपूर्ण साहित्यिक कृतियों का भी विमोचन किया गया। इस अवसर पर 'विद्यासागर रचना समग्र' के चौथे खंड का लोकार्पण हुआ। इसके साथ ही ईश्वरचंद्र विद्यासागर द्वारा रचित 'शकुंतला उपाख्यान' के अनुवादित संस्करणों का भी विमोचन किया गया। 'शकुंतला' को हिंदी, अंग्रेजी, संताली और बांग्ला चार भाषाओं में प्रस्तुत किया गया है। विश्वविद्यालय के अनुसार यह पहल विद्यासागर की साहित्यिक और बौद्धिक विरासत को व्यापक पाठक समुदाय तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
विद्यासागर मेमोरियल व्याख्यान में सामाजिक सुधार पर चर्चा
समारोह में आयोजित 'विद्यासागर मेमोरियल लेक्चर' में नीति आयोग के सदस्य प्रो. गोवर्धन दास ने व्याख्यान दिया। उन्होंने विद्यासागर को सामाजिक सुधार का प्रेरक बताते हुए उच्च शिक्षा में महिलाओं की भागीदारी के संदर्भ में उनके योगदान को रेखांकित किया। प्रो. गोवर्धन दास के अनुसार विद्यासागर का चिंतन सामाजिक परिवर्तन और शिक्षा के विस्तार के लिए आज भी महत्वपूर्ण है।
'म्यूजियम के जरिए भी शिक्षा का विस्तार संभव'
इंडियन म्यूज़ियम, कोलकाता के निदेशक डॉ. सायन भट्टाचार्य ने विशेष व्याख्यान में संग्रहालयों की शैक्षिक भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि संग्रहालय केवल ऐतिहासिक वस्तुओं को संरक्षित करने का माध्यम नहीं हैं, बल्कि इनके जरिए शिक्षा और विचारों का विस्तार भी किया जा सकता है। उनके अनुसार विद्यासागर म्यूजियम की स्थापना का उद्देश्य विद्यासागर के विचारों को आम लोगों तक पहुंचाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाना है। डॉ. भट्टाचार्य ने ईश्वरचंद्र विद्यासागर के हिंदी साहित्य और भारतेंदु हरिश्चंद्र के साथ संबंध का भी उल्लेख किया।
उच्च शिक्षा और महिला-शिक्षा पर जोर
मुख्य अतिथि जगन्नाथ चट्टोपाध्याय ने कहा कि विद्यासागर के नाम पर स्थापित विद्यासागर विश्वविद्यालय शिक्षा और सामाजिक सुधार का महत्वपूर्ण केंद्र है। उन्होंने बंगाल के ऐतिहासिक योगदान को स्मरण करते हुए नई पीढ़ी से शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ने का आह्वान किया। उन्होंने विद्यासागर के विचारों से प्रेरणा लेते हुए आधुनिक शिक्षा और महिला-शिक्षा के क्षेत्र में निरंतर काम करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि विद्यासागर के दिखाए रास्ते पर चलते हुए समाज में शिक्षा, तार्किकता और सामाजिक सुधार की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाना चाहिए।
मिदनापुर को बताया ज्ञान और स्वतंत्रता आंदोलन की भूमि
मेदिनीपुर के विधायक डॉ. शंकर कुमार गुच्छैत ने मिदनापुर के ऐतिहासिक महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने मिदनापुर को ज्ञान और स्वतंत्रता संग्राम की भूमि बताते हुए विद्यासागर विश्वविद्यालय को उच्च शिक्षा, ज्ञान और प्रगति का महत्वपूर्ण केंद्र बताया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय विद्यासागर की विरासत और उनके विचारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
मानवीय और तार्किक समाज निर्माण का संकल्प
समारोह में सम्मानित विद्वानों ने विश्वविद्यालय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वर्तमान समय में विद्यासागर के विचारों, चिंतन और लेखन को नए संदर्भों में समझने की आवश्यकता है।
कार्यक्रम में यह विचार प्रमुखता से सामने आया कि शिक्षा, मानवीय गरिमा, तर्कसंगत सोच, सामाजिक सुधार और न्याय के प्रति विद्यासागर की प्रतिबद्धता आज भी प्रासंगिक है। विद्यासागर विश्वविद्यालय ने उनके आदर्शों से प्रेरणा लेते हुए अधिक मानवीय, तार्किक और प्रगतिशील समाज के निर्माण की दिशा में अपने प्रयास जारी रखने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।
बड़ी संख्या में विद्यार्थी और शोधार्थी हुए शामिल
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के अध्यक्ष, शोधार्थी, विद्यार्थी, प्रशासनिक अधिकारी और शिक्षा कर्मी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन प्रो. जयजीत घोष और सागरिका घोष ने किया। धन्यवाद ज्ञापन विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. जयंत किशोर नंदी ने किया।
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