राजस्थानी भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल करने की माँग, केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल से मिला मारवाड़ी सम्मेलन का प्रतिनिधिमंडल
अखिल भारतवर्षीय मारवाड़ी सम्मेलन के राष्ट्रीय अध्यक्ष पवन कुमार गोयनका के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल को ज्ञापन सौंपकर राजस्थानी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की माँग की। मंत्री ने सहयोग का आश्वासन दिया।
राष्ट्रीय अध्यक्ष पवन कुमार गोयनका के नेतृत्व में सौंपा गया ज्ञापन; राजस्थानी भाषा को संवैधानिक मान्यता दिलाने की मुहिम में केंद्रीय मंत्री ने दिया सहयोग का आश्वासन
नई दिल्ली, 14 अक्तूबर 2026। राजस्थानी भाषा को भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में सम्मिलित कर संवैधानिक मान्यता प्रदान करने की माँग को लेकर अखिल भारतवर्षीय मारवाड़ी सम्मेलन के एक प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री अर्जुन राम मेघवाल से नई दिल्ली स्थित उनके आवास पर शिष्टाचार भेंट की। सम्मेलन के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री पवन कुमार गोयनका के नेतृत्व में पहुँचे प्रतिनिधिमंडल ने इस संबंध में मंत्री को ज्ञापन सौंपकर आवश्यक पहल करने का आग्रह किया।
प्रतिनिधिमंडल ने ज्ञापन के माध्यम से राजस्थानी भाषा की समृद्ध साहित्यिक, सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक विरासत को रेखांकित करते हुए इसे संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की आवश्यकता पर बल दिया। सम्मेलन ने कहा कि राजस्थानी भाषा को संवैधानिक मान्यता मिलने से उसकी भाषायी पहचान को उचित सम्मान मिलेगा तथा उसके साहित्य, संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण एवं संवर्धन को प्रोत्साहन मिलेगा।
भेंट के दौरान अर्जुन राम मेघवाल ने प्रतिनिधिमंडल द्वारा सौंपे गए ज्ञापन को पढ़ा और राजस्थानी भाषा को संवैधानिक मान्यता दिलाने की माँग के प्रति सकारात्मक रुख व्यक्त किया। सम्मेलन से प्राप्त जानकारी के अनुसार, उन्होंने राजस्थानी भाषा को संविधान में स्थान दिए जाने की आवश्यकता का समर्थन करते हुए इस अभियान में पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि वे इस मुहिम में सम्मेलन के साथ हैं।
अखिल भारतवर्षीय मारवाड़ी सम्मेलन लंबे समय से राजस्थानी भाषा को संवैधानिक मान्यता दिलाने की माँग को आगे बढ़ा रहा है। केंद्रीय मंत्री के साथ हुई यह मुलाकात इस दिशा में संवाद और समर्थन जुटाने के प्रयास के रूप में देखी जा रही है। अब इस माँग को संवैधानिक स्वीकृति तक पहुँचाने के लिए संबंधित स्तरों पर आवश्यक पहल और कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।
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