Tag: #हिंदी साहित्य

सभ्यता बनाम सत्ता का अहंकार: जब विश्वविद्यालय की आत्मा ...

बिलासपुर के गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय में एक साहित्यिक कार्यक्रम के दौ...

हिंदी मेला के छठवें दिन ‘बंधुत्व’ बना संवेदनात्मक और वै...

31वें हिंदी मेला के छठवें दिन ‘बंधुत्व’ विषय पर चित्रांकन, कविता पोस्टर, वाद-विव...

जागो फिर एक बार: निराला की अमर पुकार | संपादकीय

भारतीय साहित्य के प्रथम उग्र मानवीय कवि निराला की विद्रोही चेतना और उनकी अमर पंक...

भक्ति: प्रेम और मानवता का संदेश | भारतीय भाषा परिषद, को...

भारतीय भाषा परिषद में ‘भक्ति रस’ पर हुए व्याख्यान और संगीत संध्या में विद्वानों ...

विजयदान देथा: लोककथाओं के बीज से आधुनिक चेतना का वृक्ष

राजस्थानी साहित्य के महान कथाकार विजयदान देथा (बिज्जी) की जन्मशती पर विशेष लेख, ...

व्यंग्य का शतक और हरिशंकर परसाई : समाज का दर्पण, चेतना ...

हरिशंकर परसाई की जन्मशती उनके अद्वितीय साहित्यिक योगदान और जनपक्षधर दृष्टि को या...

राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त जयंती: खड़ी बोली के शिल्पी, ...

राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त (जन्म: 3 अगस्त 1886) हिंदी की खड़ी बोली को साहित्यिक ...