डॉ. सुनील कुमार शर्मा को मिला ‘पाठ साहित्य सम्मान 2026’
बिलासपुर में प्यारेलाल गुप्त की 136वीं जयंती पर आयोजित पाठ सम्मान समारोह में कोलकाता के कवि डॉ. सुनील कुमार शर्मा को ‘पाठ साहित्य सम्मान 2026’ से सम्मानित किया गया। समारोह में लघु पत्रिकाओं की चुनौतियों और साहित्य में उनकी भूमिका पर भी विमर्श हुआ।
बिलासपुर। साहित्यकार एवं इतिहासकार प्यारेलाल गुप्त की 136वीं जयंती के अवसर पर स्थानीय होटल जीत कॉन्टिनेंटल के सभागार में पाठ सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। समारोह में कोलकाता के प्रसिद्ध कवि डॉ. सुनील कुमार शर्मा को प्यारेलाल गुप्त की स्मृति में ‘पाठ साहित्य सम्मान 2026’ प्रदान किया गया। वहीं कवयित्री एवं संस्कृतिकर्मी निशा भोसले की स्मृति में डॉ. सत्यभामा अवस्थी को ‘पाठ संस्कृतिकर्मी सम्मान’ से सम्मानित किया गया।
सम्मान मुख्य अतिथि डॉ. देवधर महंत, कार्यक्रम के अध्यक्ष नंद कश्यप एवं डॉ. उर्मिला शुक्ल के हाथों प्रदान किए गए। डॉ. सुनील कुमार शर्मा के साहित्यिक योगदान पर भोपाल से आई माया मिश्र तथा इंदौर से रश्मि मालवीय ने अपने विचार व्यक्त किए।
लघु पत्रिकाएं समय की जरूरतों से करती हैं संवाद
समारोह में लघु पत्रिकाओं की वर्तमान चुनौतियों पर विशेष विमर्श हुआ। ‘पाठ’ के संपादक देवांशु ने कहा कि वर्तमान समय में लघु पत्रिका का प्रकाशन किसी चुनौतीपूर्ण कार्य से कम नहीं है। उनके अनुसार लघु पत्रिकाएं मनुष्य के संघर्ष और उसकी समस्याओं का लेखा-जोखा प्रस्तुत करती हैं तथा समय की जरूरतों से संवाद स्थापित करती हैं।
उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन के दौर में डॉ. राममनोहर लोहिया, जयप्रकाश नारायण और महात्मा गांधी जैसे नेताओं ने हाथ से लिखे पर्चों के माध्यम से जनसंवाद किया था। आगे चलकर यही वैकल्पिक अभिव्यक्ति लघु पत्रिकाओं के स्वरूप में विकसित हुई।
देवांशु ने बताया कि ‘पाठ’ लघु पत्रिका पिछले 20 वर्षों से बिलासपुर से प्रकाशित हो रही है और देश के अनेक छोटे-बड़े शहरों तथा गांवों तक पहुंच रही है।
लघु पत्रिकाओं की चुनौतियों और उनकी प्रासंगिकता पर डॉ. देवधर महंत एवं डॉ. उर्मिला शुक्ल ने भी अपने विचार रखे। वक्ताओं ने कहा कि सीमित संसाधनों के बावजूद लघु पत्रिकाएं साहित्य, समाज और वैकल्पिक विचारों के बीच महत्वपूर्ण सेतु का काम कर रही हैं।
बांग्ला कविता पाठ ने बांधा समां
कार्यक्रम में रवीन्द्रनाथ टैगोर के शांतिनिकेतन को केंद्र में रखते हुए अरुनाभो चक्रवर्ती एवं अपर्णा चक्रवर्ती ने बांग्ला में स्वरचित कविता का पाठ किया। इस प्रस्तुति ने समारोह में साहित्यिक एवं सांस्कृतिक विविधता का रंग भर दिया।
इस अवसर पर सी.के. खांडे, कर्मचारी नेता एवं वरिष्ठ साहित्यकार तथा उद्घोषक हरीशचन्द्र वाद्यकार को भी सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम का संचालन राजेंद्र मौर्य ने किया। समारोह में विजय कुमार गुप्त, रमेश सोनी, शिवांगी, प्रो. मुरली, कपूर वासनिक, शिप्रा पाल, सुप्रिया भारतीयन, रेबा दास, आभा पाल, मधुकर गोरख, सुनील चिपड़े, अभिषेक पाल सहित शहर के अनेक साहित्यकार, बुद्धिजीवी एवं प्रबुद्धजन उपस्थित रहे।
समारोह ने साहित्यिक सम्मान के साथ-साथ लघु पत्रिकाओं की भूमिका, स्वतंत्र अभिव्यक्ति और साहित्य-संस्कृति के समकालीन सरोकारों पर सार्थक संवाद का अवसर प्रदान किया।
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