सरायइनायत थाने के बाहर जी.टी. रोड पर अधिवक्ताओं का धरना
प्रयागराज के सरायइनायत थाने में अधिवक्ता और हनुमानगंज चौकी प्रभारी के कथित विवाद के बाद जीटी रोड पर धरना हुआ। डीसीपी के जांच और लाइन हाजिर के आश्वासन के बाद प्रदर्शन समाप्त हुआ।
सरायइनायत में अधिवक्ता से विवाद के बाद धरना: चौकी प्रभारी पर पुराने मामलों में भी गंभीर आरोप, स्वतंत्र जाँच की माँग
प्रयागराज। सरायइनायत थाने में शनिवार शाम अधिवक्ता और हनुमानगंज चौकी प्रभारी के बीच हुए कथित विवाद के बाद अधिवक्ताओं तथा स्थानीय लोगों ने थाने के सामने जीटी रोड पर धरना-प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने चौकी प्रभारी के विरुद्ध कार्रवाई, लाइन हाजिर किए जाने और प्राथमिकी दर्ज करने की माँग की।
जिला न्यायालय, प्रयागराज के अधिवक्ता आशीष कुमार त्रिपाठी अपने मुवक्किल के रास्ते से जुड़े विवाद की पैरवी के सिलसिले में सरायइनायत थाने पहुंचे थे। उपलब्ध प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार, बातचीत के दौरान उनकी हनुमानगंज चौकी प्रभारी उपनिरीक्षक दिनेश सिंह से बहस हो गई। अधिवक्ता ने चौकी प्रभारी पर दुर्व्यवहार, ब्राह्मण समाज को लेकर अमर्यादित अथवा जातिसूचक टिप्पणी और विरोध करने पर धमकी देने का आरोप लगाया।
घटना की सूचना मिलने पर अधिवक्ता, ब्राह्मण समाज के लोग और ग्रामीण थाने के बाहर एकत्र हुए। लोगों ने चौकी प्रभारी के विरोध में नारेबाजी की और जीटी रोड पर धरना दिया। प्रदर्शनकारियों ने चौकी प्रभारी को लाइन हाजिर करने तथा आरोपों के संबंध में एफआईआर दर्ज करने की माँग की।
स्थिति को नियंत्रित करने के लिए एसीपी हंडिया शेषधर पांडेय ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत की। बाद में डीसीपी गंगानगर कुलदीप सिंह गुनावत ने प्रकरण की जाँच कराने और चौकी प्रभारी को लाइन हाजिर किए जाने का आश्वासन दिया। इसके बाद रात लगभग नौ बजे धरना समाप्त हुआ।
पुराने मामलों के संबंध में लगाए गए आरोप
धरना-प्रदर्शन से जुड़े कुछ लोगों और शिकायतकर्ता पक्ष का यह भी दावा है कि चौकी प्रभारी दिनेश सिंह के विरुद्ध पूर्व की तैनातियों से संबंधित कई शिकायतें रही हैं। इन दावों में जंघई चौकी में तैनाती के दौरान एक दलित महिला से जुड़े कथित दुष्कर्म प्रकरण में उनकी भूमिका, तथा इमामगंज चौकी प्रभारी रहते हुए शिकायतकर्ता सुशील कुमार पाण्डेय के घर पर कथित जानलेवा हमले की शिकायत दर्ज न किए जाने के आरोप शामिल हैं।
आरोप लगाने वाले पक्ष का कहना है कि सुशील कुमार पाण्डेय के मामले में बाद में उच्च न्यायालय में अवमानना याचिका दायर की गई, जिसके उपरांत लगभग सात महीने बाद परिवार की एफआईआर दर्ज हुई। उनका यह भी आरोप है कि तत्कालीन थाना प्रभारी नितेंद्र कुमार शुक्ला और संबंधित चौकी प्रभारी दिनेश कुमार सिंह ने आरोपियों के साथ मिलीभगत कर कथित रूप से दोबारा हमला कराए जाने की स्थिति पैदा की तथा दूसरी शिकायत दर्ज करने से इनकार किया। आरोप पक्ष के मुताबिक, बाद में अपर पुलिस आयुक्त (मुख्यालय) के आदेश पर पीड़ित की एफआईआर दर्ज की गई।
शिकायतकर्ता पक्ष ने यह भी आरोप लगाया है कि क्राइम संख्या 500/2024 के एक प्रकरण में, जिला न्यायाधीश के समक्ष अपराध को जमानतीय प्रकृति का बताया जाने के बावजूद एक नाबालिग लड़की के विरुद्ध गैर-जमानती वारंट प्राप्त कराया गया। आरोप पक्ष ने इस कार्रवाई की वैधानिकता और प्रक्रिया की जाँच की माँग की है। इस दावे की पुष्टि के लिए एफआईआर, केस डायरी, न्यायालय के आदेश, वारंट संबंधी दस्तावेज और विवेचना अभिलेखों की स्वतंत्र जाँच आवश्यक है।
शिकायतकर्ता सुशील कुमार पाण्डेय से जुड़े सभी प्रकरण की जाँच अपर पुलिस आयुक्त (कानून एवं व्यवस्था) डॉ. अजय पाल कर रहे थे। आरोप है कि जाँच के दौरान 2 फरवरी 2026 को उपनिरीक्षक दिनेश कुमार सिंह ने प्रयागराज पुलिस मुख्यालय में सुशील पाण्डेय से जाँच के दौरान मुलाकात हुई थी और अपने माँ-बाबू जी का कसम खाकर आरोपियों की गिरफ्तारी कर उन्हें जेल भेजने का आश्वासन दिया था। शिकायतकर्ता पक्ष का कहना है कि इस आश्वासन के बावजूद आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं की गई। पीड़ित पक्ष ने मामले की निष्पक्ष जाँच, गिरफ्तारी में हुई देरी के कारणों की समीक्षा और जिम्मेदारी तय करने की माँग की है।
जाँच की जरूरत क्यों
इन आरोपों की गंभीरता को देखते हुए प्रकरण की निष्पक्ष जाँच में निम्न रिकॉर्ड महत्वपूर्ण होंगे:
· अधिवक्ता आशीष कुमार त्रिपाठी की लिखित शिकायत और उसका प्राप्तांक।
· सरायइनायत थाने की जीडी/रोजनामचा प्रविष्टियाँ, सीसीटीवी फुटेज तथा मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों के बयान।
· धरना-प्रदर्शन के दौरान पुलिस अधिकारियों द्वारा की गई कार्रवाई का रिकॉर्ड।
· लाइन हाजिर करने से संबंधित लिखित आदेश, यदि जारी हुआ हो।
· सुशील कुमार पाण्डेय से संबंधित कथित हमले की तहरीरें, एफआईआर नंबर, एफआईआर दर्ज होने की तारीख और अवमानना याचिका की प्रमाणित प्रति।
· क्राइम संख्या 500/2024 में संबंधित न्यायालय का आदेश, नाबालिग के विरुद्ध एनबीडब्ल्यू जारी करने का आवेदन, आदेश-पत्र और केस डायरी।
· जंघई चौकी की पूर्व तैनाती से जुड़े कथित प्रकरण में एफआईआर, विवेचना और विभागीय जाँच का आधिकारिक रिकॉर्ड।
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