मध्य प्रदेश में 5 साल में दुधारू पशु नहीं बढ़े, दूध उत्पादन 33.27 लाख टन बढ़ा

मध्य प्रदेश में पिछले पाँच वर्षों के दौरान दुधारू पशुओं की संख्या लगभग स्थिर रहने के बावजूद दूध उत्पादन में 33.27 लाख टन की वृद्धि दर्ज होने का दावा सामने आया है। भास्कर इन्वेस्टिगेशन की रिपोर्ट के अनुसार, 2020-21 में करीब 179.99 लाख टन दूध उत्पादन के मुकाबले 2024-25 में यह आंकड़ा 213.26 लाख टन पहुंच गया। विभाग ने उत्पादन बढ़ने की वजह पशुओं की नस्ल में सुधार और उत्पादकता बढ़ना बताया है। इसी रिपोर्ट में कई स्थानों पर दूध की टेस्टिंग और मिलावट से जुड़े चौंकाने वाले तथ्य भी सामने रखे गए हैं।

Sep 13, 2026 - 10:29
Sep 13, 2026 - 10:37
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मध्य प्रदेश में 5 साल में दुधारू पशु नहीं बढ़े, दूध उत्पादन 33.27 लाख टन बढ़ा
मध्य प्रदेश में 5 साल में दुधारू पशु नहीं बढ़े, दूध उत्पादन 33.27 लाख टन बढ़ा

भोपाल। मध्य प्रदेश में दूध उत्पादन को लेकर सामने आए आंकड़ों ने पशुपालन क्षेत्र में कई सवाल खड़े कर दिए हैं। भास्कर इन्वेस्टिगेशन की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदेश में पिछले पाँच वर्षों में दुधारू पशुओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि नहीं हुई, लेकिन इसी अवधि में दूध उत्पादन में 33.27 लाख टन की बढ़ोतरी दर्ज की गई। रिपोर्ट में दिए गए आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2020-21 में प्रदेश का दूध उत्पादन 179.99 लाख टन था, जो बढ़कर 2024-25 में 213.26 लाख टन हो गया। इस दौरान दुधारू पशुओं की संख्या करीब 1.24 करोड़ के आसपास बनी रही।

उत्पादन बढ़ा, पशुओं की संख्या लगभग स्थिर

रिपोर्ट में पाँच वर्षों के आंकड़ों की तुलना करते हुए बताया गया है कि दुधारू पशुओं की संख्या में बड़ा बदलाव नहीं आया, जबकि दूध उत्पादन लगातार बढ़ता गया। विभाग का कहना है कि इसका प्रमुख कारण पशुओं की नस्ल में सुधार, बेहतर पशुपालन और प्रति पशु दूध उत्पादन में वृद्धि है। विभाग के मुताबिक बेहतर नस्ल के पशुओं, कृत्रिम गर्भाधान और पशुपालन संबंधी तकनीकों के इस्तेमाल से प्रति पशु उत्पादकता बढ़ी है। इसलिए पशुओं की संख्या में बड़ी वृद्धि के बिना भी कुल दूध उत्पादन बढ़ना संभव है।

दूध की टेस्टिंग को लेकर भी सवाल

रिपोर्ट में दूध की गुणवत्ता और मिलावट की जांच को लेकर भी स्थिति पर सवाल उठाए गए हैं। भास्कर इन्वेस्टिगेशन के अनुसार, कई स्थानों पर दूध की टेस्टिंग कराई गई और कुछ नमूनों में मिलावट संबंधी चिंताएं सामने आईं। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि कुछ मामलों में दूध की मिलावट को लेकर ऐसे तरीके सामने आए, जिनसे सामान्य उपभोक्ता के लिए असली और मिलावटी दूध में अंतर करना मुश्किल हो सकता है। इससे दूध की गुणवत्ता की नियमित जांच और प्रभावी निगरानी की आवश्यकता और बढ़ जाती है।

डेयरी क्षेत्र में उत्पादकता बढ़ाने पर जोर

मध्य प्रदेश में दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए पशुओं की नस्ल सुधार, बेहतर पोषण, पशु स्वास्थ्य सेवाओं और वैज्ञानिक पशुपालन को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, पशुओं की संख्या और दूध उत्पादन के आंकड़ों के बीच बड़ा अंतर यह सवाल भी उठाता है कि उत्पादन वृद्धि का वास्तविक आधार क्या है और इसे जमीनी स्तर पर किस तरह सत्यापित किया जा रहा है।

दूध जैसे रोजमर्रा के खाद्य पदार्थ की गुणवत्ता सीधे लोगों के स्वास्थ्य से जुड़ी है। ऐसे में दूध उत्पादन के आंकड़ों के साथ-साथ दूध की गुणवत्ता, मिलावट की जांच और जांच व्यवस्था की पारदर्शिता पर भी लगातार निगरानी जरूरी है।

पाँच साल के आंकड़ों पर एक नजर

वर्ष

दूध उत्पादन

2020-21

179.99 लाख टन

2021-22

190.24 लाख टन

2022-23

201.22 लाख टन

2023-24

213.26 लाख टन

2024-25

213.26 लाख टन

मुख्य तथ्य: रिपोर्ट के अनुसार 2020-21 से 2024-25 के बीच दूध उत्पादन में 33.27 लाख टन की वृद्धि हुई।

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सुशील कुमार पाण्डेय मैं, अपने देश का एक जिम्मेदार नागरिक बनने की यात्रा पर हूँ, यही मेरी पहचान है I