कविता जीवन, संघर्ष और मनुष्यता का आख्यान है : रामनिवास द्विवेदी

भारतीय भाषा परिषद में ‘साहित्य संवाद’ का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में शैलेष गुप्ता, संजय राय और सुषमा कुमारी ने कविता पाठ किया। साहित्य, समाज, प्रेम, प्रकृति और तकनीक पर कवियों एवं साहित्यप्रेमियों के बीच सार्थक संवाद हुआ।

Sep 12, 2026 - 20:32
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कविता जीवन, संघर्ष और मनुष्यता का आख्यान है : रामनिवास द्विवेदी
भारतीय भाषा परिषद में ‘साहित्य संवाद’ का आयोजन

भारतीय भाषा परिषद में साहित्य संवादका आयोजन, कवियों ने किया रचनाओं का पाठ

कोलकाता, 12 सितंबर। भारतीय भाषा परिषद एवं सांस्कृतिक पुनर्निर्माण मिशन के संयुक्त तत्वावधान में भारतीय भाषा परिषद परिसर में साहित्य संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में कविता, समाज, मनुष्यता, प्रेम, प्रकृति और बदलती तकनीकी दुनिया को लेकर रचनाकारों और साहित्यप्रेमियों के बीच सार्थक संवाद हुआ।

कार्यक्रम के स्वागत वक्तव्य में आशीष झुनझुनवाला ने कहा कि भारतीय प्राचीन परंपरा में संवाद को विशेष महत्व दिया गया है। साहित्य संवाद का यह आयोजन उसी परंपरा को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास है।

अध्यक्षीय वक्तव्य देते हुए रामनिवास द्विवेदी ने कहा कि साहित्य मनुष्य की पीड़ा, संघर्ष और जीवंतता का आख्यान है। उन्होंने कहा कि यह आयोजन इस बात का आश्वासन देता है कि काव्य आज भी सबके हृदय में बसा हुआ है। कार्यक्रम में चर्चित कवि शैलेष गुप्ता ने कुछ भी नहीं रहा निरपेक्ष’, ‘अल्पसंख्यक हूँ मैं भी’, ‘अतिरिक्त अक्षर’, ‘तुम्हारे होने में’, ‘दर्द की शायरी नहीं करता और सब शुरू से शुरू करे फिर से सहित अपनी कविताओं का पाठ किया। संजय राय ने उबलती हुई चुप्पी’, ‘आवाज़ की अर्द्ध छवियाँ’, ‘आत्महत्या’, ‘बारिश की नींद’, ‘अनसोई रातों की बेचैनियाँ’, ‘ऐसी कार में चाँद और उदास लड़का’, ‘छूटी रह गई चीज़ों की तस्वीर’, ‘मॉब लिंचिंग’, ‘लोकतांत्रिक तानाशाह’, ‘पुराने दोस्त’, ‘एक साधारण कथा’, ‘अपने समय की तकनीकी सुविधाओं के बहाने और एक टुकड़ा शहर जैसी कविताएँ प्रस्तुत कीं। युवा कवयित्री सुषमा कुमारी ने रचने आयेंगे’, ‘तुम नहीं जानते’, ‘क्या थे’, ‘घर’, ‘जादू’, ‘तुम्हारा शहर’, ‘चिड़िया’, ‘मेरे गाँव की मोनालिसा और भ्रम शीर्षक कविताओं का पाठ किया। प्रस्तुत कविताओं में प्रेम, प्रकृति, सामाजिक सरोकारों और तकनीक के बदलते प्रभावों के विविध रंग दिखाई दिए।

कवियों से सीधे संवाद ने कार्यक्रम को बनाया विशेष

संवाद सत्र में उमा डगमान, मनीषा गुप्ता, निशार अहमद, सत्यम पांडेय, अनूप प्रसाद और संजना जायसवाल ने कवियों से उनकी रचनाओं, लेखन प्रक्रिया और साहित्यिक सरोकारों को लेकर सवाल किए। इस प्रत्यक्ष संवाद ने कार्यक्रम को केवल काव्य-पाठ तक सीमित न रखकर विचार-विमर्श का मंच बना दिया।

कविताओं की समीक्षा करते हुए मृत्युंजय श्रीवास्तव ने कहा कि आज के समय में सुनना भी सौभाग्य की बात है। कविता केवल कहती नहीं, बल्कि दृश्य भी रचती है। उन्होंने कहा कि कविता में कहानी का तत्व आ जाए तो वह लंबे समय तक पाठक के जेहन में बनी रहती है। संजय राय की कविताओं की विशेषता बताते हुए उन्होंने कहा कि उनकी छोटी कविताएँ आकार में भले छोटी हैं, लेकिन भाव की दृष्टि से पूरी हैं। वहीं सुषमा कुमारी की कविताओं की विशेषता यह है कि जिन भावों और दृश्यों को वह देखती और महसूस करती हैं, उन्हें उसी जीवंतता के साथ शब्द देती हैं।

कार्यक्रम के मॉडरेटर सूर्य देव रॉय ने कहा कि साहित्य संवादअपने आप में अनोखा कार्यक्रम है। कविताएँ पाठकों से संवाद करती हैं, लेकिन इस आयोजन में पाठकों को कवियों से सीधे संवाद करने का अवसर भी मिलता है।

कवि परिचय और काव्य गायन भी आकर्षण का केंद्र

कार्यक्रम में कवि परिचय के क्रम में श्रद्धा कुमारी, अजय पोद्दार, लक्ष्मी यादव और आदित्य तिवारी ने काव्य पाठ किया। वहीं नैना प्रसाद ने काव्य गायन प्रस्तुत किया। इस अवसर पर परिषद के वित्त मंत्री घनश्याम सुगला, शहर के चर्चित कवि नील कमल, डॉ. वंशीधर शर्मा, सुशील कांति, पद्माकर व्यास, राजेश कुमार साव, सुशील पांडेय, संगीता व्यास, आनंद गुप्ता, मंटू दास, राजेश प्रसाद, अनिल शाह, रूपेश यादव, अर्जुन सार्की, सुमैया सरवत, ईशा गुप्ता, इशरत जहाँ और प्रतिभा साव सहित दर्जनों साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे।

धन्यवाद ज्ञापन करते हुए सांस्कृतिक पुनर्निर्माण मिशन के महासचिव संजय जायसवाल ने कहा कि इस आयोजन का उद्देश्य एक रचनात्मक संवाद स्थापित करना है। सृजन के साथ चल रही यह सहयात्रा हमारी प्रतिबद्धता का परिचायक है। उन्होंने साहित्यप्रेमियों से इसी प्रकार साथ और सहयोग बनाए रखने का आग्रह किया।

 

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सुशील कुमार पाण्डेय मैं, अपने देश का एक जिम्मेदार नागरिक बनने की यात्रा पर हूँ, यही मेरी पहचान है I