दिशा सालियान केस में बड़ा मोड़, CBI जाँच के बीच सचिन वाजे पर बड़ा दावा
दिशा सालियान मौत मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट के CBI जाँच के आदेश के बाद नया मोड़ आया है। दिशा के परिवार के वकील नीलेश ओझा ने दावा किया है कि सचिन वाजे की ओर से संपर्क कर मामले और कथित 13 हत्याओं से जुड़े खुलासे करने की पेशकश की गई है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। CBI अब दिशा की मौत की परिस्थितियों, प्रारंभिक जाँच की विसंगतियों और उपलब्ध डिजिटल व फोरेंसिक साक्ष्यों की स्वतंत्र जाँच करेगी।
दिशा सालियान केस में बड़ा मोड़: CBI जाँच के बीच सचिन वाजे के ‘सरकारी गवाह’ बनने के दावे से मचा हड़कंप
मुंबई, 9 सितंबर। अभिनेत्री दिशा सालियान की वर्ष 2020 में हुई मौत का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा मामले की जाँच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंपे जाने के कुछ ही दिनों बाद दिशा सालियान के परिवार के वकील नीलेश ओझा ने दावा किया है कि बर्खास्त पुलिस अधिकारी सचिन वाजे की ओर से उनके संपर्क में आए लोगों ने मामले में महत्वपूर्ण जानकारी देने और कथित तौर पर सरकारी गवाह बनने की इच्छा जताई है। वकील के अनुसार, वाजे से जुड़े लोगों ने मामले से संबंधित 13 कथित हत्याओं के बारे में जानकारी देने का प्रस्ताव रखा है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और इन्हें अभी जाँच का विषय ही माना जाना चाहिए। यह घटनाक्रम इसलिए महत्वपूर्ण हो गया है क्योंकि 2 सितंबर 2026 को बॉम्बे हाईकोर्ट ने दिशा सालियान की मौत की जाँच CBI को सौंपते हुए FIR दर्ज करने का निर्देश दिया था। अदालत ने प्रारंभिक पुलिस जाँच में कई गंभीर विसंगतियाँ पाईं और कहा कि जाँच ने सवालों के जवाब देने के बजाय कई नए सवाल खड़े किए हैं।
क्या है दिशा सालियान मामला?
दिशा सालियान अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व मैनेजर थीं। 8 जून 2020 की रात मुंबई के मलाड स्थित एक ऊंची इमारत से गिरने के बाद उनकी मौत हुई थी। शुरुआती जाँच में इसे दुर्घटना/आत्महत्या के रूप में देखा गया था। इसके कुछ दिनों बाद 14 जून 2020 को सुशांत सिंह राजपूत अपने बांद्रा स्थित आवास पर मृत पाए गए थे।
दोनों घटनाओं के समय में बेहद कम अंतर होने के कारण दिशा सालियान की मौत बाद में सुशांत सिंह राजपूत मामले से भी जोड़ी जाने लगी। हालांकि, दोनों मामलों के बीच किसी आपराधिक संबंध को अदालत ने अब तक अंतिम रूप से स्थापित नहीं किया है।
बॉम्बे हाईकोर्ट ने क्यों CBI जाँच का आदेश दिया?
दिशा के पिता सतीश सालियान ने बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर पुलिस जाँच पर गंभीर सवाल उठाए और मामले की स्वतंत्र जाँच की माँग की थी। 2 सितंबर को न्यायमूर्ति सारंग वी. कोतवाल और न्यायमूर्ति रंजितसिंह भोंसले की पीठ ने CBI को मामले में FIR दर्ज कर जाँच शुरू करने का निर्देश दिया। अदालत ने CBI के संयुक्त निदेशक, मुंबई क्षेत्र को एक वरिष्ठ एवं अनुभवी अधिकारी नियुक्त करने को कहा। साथ ही दिशा के पिता का बयान दर्ज करने का भी निर्देश दिया गया। अदालत ने हालांकि एक महत्वपूर्ण सावधानी भी बरती। उसने स्पष्ट किया कि FIR दर्ज करने और CBI जाँच का आदेश देने का अर्थ यह नहीं है कि किसी व्यक्ति को स्वतः आरोपी मान लिया गया है। पर्याप्त सामग्री के आधार पर ही किसी व्यक्ति को आरोपी बनाया जा सकता है।
जाँच में सामने आईं कई विसंगतियाँ
हाईकोर्ट ने प्रारंभिक जाँच में कई ऐसे पहलुओं को रेखांकित किया जिन्हें वह आगे की स्वतंत्र जाँच के योग्य मानता है। इनमें घटना के कई घंटे बाद किया गया स्पॉट पंचनामा, दिशा की मौत से पहले घटनास्थल के आसपास पुलिसकर्मियों की मौजूदगी, दुर्घटना संबंधी रिपोर्ट में कथित विसंगतियाँ, फोरेंसिक नमूनों से जुड़े सवाल तथा मोबाइल फोन और लैपटॉप को जब्त करने में हुई देरी शामिल हैं। इंडियन एक्सप्रेस की न्यायिक रिपोर्टिंग के अनुसार, अदालत ने इन परिस्थितियों को ऐसी बातों के रूप में देखा जिनसे प्रथमदृष्टया ‘reasonable suspicions’ पैदा होते हैं और जिनकी स्वतंत्र जाँच आवश्यक है।
मोबाइल फोन को लेकर भी उठे सवाल
दिशा सालियान के मोबाइल फोन को लेकर भी अब नए दावे सामने आए हैं। दिशा के परिवार के वकील नीलेश ओझा ने मीडिया से बातचीत में दावा किया कि रिकॉर्ड के अनुसार दिशा का मोबाइल फोन जब्त दिखाया गया था, लेकिन बाद में उसके सक्रिय रहने और डेटा इस्तेमाल होने के संकेत मिले। उन्होंने इस संबंध में जाँच एजेंसियों के रिकॉर्ड का हवाला देते हुए CBI को संबंधित सामग्री सौंपने की बात कही है। हालांकि, मोबाइल फोन का वास्तव में किसने इस्तेमाल किया, किस उद्देश्य से किया और उस दौरान उसमें क्या गतिविधियाँ हुईं— इन सवालों का अंतिम उत्तर CBI की जाँच के बाद ही सामने आ सकेगा। इसलिए इन दावों को फिलहाल आरोप या जाँच योग्य तथ्य के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
सचिन वाजे के बारे में क्या दावा किया गया है?
संलग्न सामग्री में दिशा के परिवार के वकील नीलेश ओझा के हवाले से कहा गया है कि कुछ लोग सचिन वाजे की ओर से उनके संपर्क में आए और उन्होंने वाजे द्वारा मामले से जुड़े महत्वपूर्ण खुलासे करने की इच्छा जताई। दावा है कि वह कथित रूप से 13 हत्याओं से जुड़े विवरण और उनमें शामिल लोगों के बारे में जानकारी देने को तैयार हैं। बाद की रिपोर्टों में भी ओझा के इसी दावे को उद्धृत किया गया है कि कुछ लोगों ने परिवार से संपर्क कर सरकारी गवाह बनने और मामले से जुड़ी जानकारी देने का प्रस्ताव रखा।
लेकिन यहाँ एक महत्वपूर्ण कानूनी पहलू है— ‘13 हत्याएँ’ अभी किसी न्यायिक निष्कर्ष का हिस्सा नहीं हैं। न ही यह स्थापित तथ्य है कि सचिन वाजे ने वास्तव में ऐसी हत्याओं में भूमिका स्वीकार की है। यह दावा वकील की ओर से सामने आया है, जिसकी सत्यता और प्रमाणिकता अब CBI जाँच के दायरे में आ सकती है।
क्या सचिन वाजे सरकारी गवाह बनेंगे?
फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह कहना जल्दबाजी होगी कि सचिन वाजे औपचारिक रूप से सरकारी गवाह बन चुके हैं। दिशा के परिवार के वकील ने कहा है कि संपर्क करने वाले लोगों ने कुछ शर्तों के साथ महत्वपूर्ण जानकारी देने की पेशकश की है और संबंधित विवरण CBI को उपलब्ध कराया जा रहा है। कानूनी रूप से सरकारी गवाह/अप्रूवर बनने की प्रक्रिया सक्षम न्यायिक प्राधिकरण और जाँच की प्रक्रिया से जुड़ी होती है। इसलिए फिलहाल इसे सरकारी गवाह बनने की कथित पेशकश कहना अधिक तथ्यपरक होगा।
CBI के सामने अब क्या-क्या सवाल होंगे?
हाईकोर्ट के आदेश के बाद CBI को दिशा सालियान की मौत से जुड़े सभी पहलुओं की स्वतंत्र जाँच करनी है। जाँच में प्रमुख रूप से ये प्रश्न महत्वपूर्ण हो सकते हैं—
- दिशा सालियान की मौत की वास्तविक परिस्थितियाँ क्या थीं?
- घटनास्थल पर पुलिस की मौजूदगी और उसकी टाइमलाइन क्या थी?
- स्पॉट पंचनामा में देरी क्यों हुई?
- मोबाइल फोन और लैपटॉप कब और किस प्रक्रिया के तहत जब्त किए गए?
- मोबाइल फोन के कथित बाद के इस्तेमाल की वास्तविकता क्या है?
- उपलब्ध CDR और डिजिटल साक्ष्य क्या बताते हैं?
- पोस्टमॉर्टम और फोरेंसिक रिकॉर्ड में कोई विसंगति है या नहीं?
- प्रारंभिक पुलिस जाँच में किन पहलुओं की अनदेखी हुई?
- दिशा और सुशांत सिंह राजपूत के बीच किसी आपराधिक षड्यंत्र का कोई प्रमाण है या नहीं?
- परिवार के वकील द्वारा लगाए गए नए आरोपों और कथित गवाहों के दावों की प्रमाणिकता क्या है?
अदालत ने किसी व्यक्ति को दोषी नहीं माना
इस पूरे मामले में यह अंतर बनाए रखना बेहद जरूरी है कि CBI जाँच का आदेश किसी व्यक्ति की दोषसिद्धि नहीं है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि जाँच के दौरान पर्याप्त सामग्री मिलने पर ही किसी व्यक्ति को आरोपी के रूप में देखा जाना चाहिए। अदालत ने किसी विशेष व्यक्ति के खिलाफ अपराध सिद्ध होने की घोषणा नहीं की है।
इसलिए दिशा सालियान की मौत को लेकर सामने आ रहे विभिन्न आरोपों चाहे वे हत्या, षड्यंत्र, मोबाइल फोन के इस्तेमाल या कथित 13 हत्याओं से संबंधित हों की अंतिम सत्यता CBI की जाँच और उपलब्ध साक्ष्यों से ही तय होगी।
छह साल बाद फिर खुला मामला
दिशा सालियान की मौत के छह साल बाद मामले का दोबारा केंद्रीय जाँच एजेंसी के पास जाना इस प्रकरण का सबसे बड़ा कानूनी मोड़ है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने जिस तरह प्रारंभिक जाँच में मौजूद विसंगतियों को रेखांकित किया है, उससे अब CBI के सामने केवल पुरानी जाँच की समीक्षा करने की चुनौती नहीं होगी, बल्कि उसे घटनाक्रम, डिजिटल साक्ष्य, फोरेंसिक सामग्री, गवाहों और दस्तावेजों को स्वतंत्र रूप से परखना होगा। अब असली सवाल यही है कि CBI की जाँच इन नए दावों को किस हद तक प्रमाणित करती है और छह साल से चले आ रहे सवालों का कोई ठोस जवाब सामने आता है या नहीं।
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