भारतीय भाषा परिषद में शिक्षा सम्मान समारोह, 20 शिक्षक सम्मानित
भारतीय भाषा परिषद, कोलकाता में शिक्षक दिवस के अवसर पर शिक्षा सम्मान समारोह–2026 आयोजित किया गया, जिसमें स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालयों के 20 शिक्षकों को सम्मानित किया गया। वक्ताओं ने एआई के बदलते दौर में शिक्षा को नवाचारपूर्ण, रोजगारपरक और मानवीय बनाने पर जोर दिया। डॉ. शंभुनाथ ने शिक्षक को विद्यार्थियों के राष्ट्रीय एवं मानवीय मानस का निर्माता बताया, जबकि प्रो. प्रेमशंकर त्रिपाठी ने कहा कि शिक्षक की वास्तविक विजय उसके शिष्यों की सफलता में है।
शिक्षक विद्यार्थियों के राष्ट्रीय और मानवीय मानस का निर्माता है: डॉ. शंभुनाथ
कोलकाता, 6 सितंबर। भारतीय भाषा परिषद की ओर से पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्मदिवस एवं शिक्षक दिवस के अवसर पर शिक्षा सम्मान समारोह–2026 का आयोजन किया गया। समारोह में स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालयों से जुड़े 20 शिक्षकों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में शिक्षा, शिक्षण के बदलते स्वरूप, तकनीक और शिक्षक की सामाजिक भूमिका पर सार्थक विमर्श हुआ।
प्रो. संजय जायसवाल ने शिक्षा सम्मान समारोह की पृष्ठभूमि पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह आयोजन शिक्षक की शैक्षणिक, सामाजिक और सांस्कृतिक स्वीकार्यता का पर्व है। उन्होंने कहा कि शिक्षक को पारंपरिक शिक्षण पद्धतियों के साथ नवीनतम ज्ञान एवं माध्यमों का उपयोग करते हुए शिक्षण को अधिक रोचक और अर्थपूर्ण बनाना चाहिए।
एआई के दौर में शिक्षा को रोजगारपरक बनाने की जरूरत
शिक्षा के नवाचार और प्रभावी शिक्षण पर प्रधान वक्तव्य देते हुए भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी के रैक्टर प्रो. दिलीप शाह ने कहा कि आज विद्यार्थी एआई के माध्यम से ऐसी अनेक जानकारियां शिक्षक के बताने से पहले ही प्राप्त कर लेते हैं। इससे शिक्षा का परिदृश्य तेजी से बदल रहा है। उन्होंने कहा कि वर्तमान शिक्षा ऐसी होनी चाहिए, जो युवाओं को रोजगार प्राप्त करने में भी सहायक बने। उन्होंने शिक्षा की सामाजिक विषमता पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि जो शिक्षण संस्थान शिक्षा के क्षेत्र में आगे हैं, उन्हें समय-समय पर साधारण वर्ग के विद्यार्थियों के बीच जाकर शिक्षा की विषमता कम करने का प्रयास करना चाहिए। अन्यथा बढ़ती विषमता समाज में असंतोष को जन्म दे सकती है।
‘शिक्षक ज्ञान की रक्षा करने वाला है’
शिक्षा सम्मान प्रदान करने के बाद अध्यक्षीय वक्तव्य में शिक्षाविद एवं वरिष्ठ लेखक डॉ. शंभुनाथ ने कहा, “शिक्षक विद्यार्थियों के राष्ट्रीय और मानवीय मानस का निर्माता है।” उन्होंने शिक्षक की भूमिका को ज्ञान और मानवीय मूल्यों की रक्षा से जोड़ते हुए कहा कि मोबाइल के माध्यम से जब बड़े पैमाने पर अज्ञान फैलाया जा रहा है, तब शिक्षक की जिम्मेदारी ज्ञान की रक्षा करना और विद्यार्थियों में विवेक विकसित करना है।
समारोह में उपस्थित सबसे वरिष्ठ सेवानिवृत्त शिक्षक प्रो. प्रेमशंकर त्रिपाठी ने आभार व्यक्त करते हुए कहा, “एक शिक्षक की विजय इसमें है कि उसके शिष्य उससे आगे निकल जाएं।” उन्होंने शिक्षक दिवस पर हिंदी शिक्षकों के सम्मान को समाज की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।
प्रो. मुक्तेश्वरनाथ तिवारी ने कहा कि शिक्षा सम्मान हमें नैतिक जिम्मेदारी से जोड़ता है, जबकि डॉ. दारोगा सिंह ने शिक्षक को समाज की आंख बताते हुए कहा कि वह विद्यार्थियों को दुनिया को देखने और समझने की दृष्टि प्रदान करता है।
शिक्षकों ने परिषद के प्रति जताया आभार
समारोह में डॉ. प्रमोद कुमार प्रसाद, डॉ. शशि कुमार शर्मा, डॉ. रंजना शर्मा, डॉ. सुमिता चट्टोराज, डॉ. जोतिमय बाग,मती कम्मू खटिक, डॉ. सुनीता मंडल, डॉ. मनोज मिश्र,मती सिम्मी तलवार, संजय यादव, डॉ. सुमन शर्मा, मनोज यादव,मती मनीषा गुप्ता, डॉ. राहुल शर्मा एवं डॉ. अश्विनी कुमार सहित सम्मानित शिक्षकों ने अपने वक्तव्य में भारतीय भाषा परिषद के प्रति आभार व्यक्त किया। यशवंत सिंह और डॉ. अजय साव ने संदेश के माध्यम से कृतज्ञता प्रकट की।
भारतीय भाषा परिषद की ओर से धन्यवाद ज्ञापित करते हुए विमला पोद्दार ने शिक्षकों और उपस्थित लोगों से साहित्यिक मासिक पत्रिका ‘वागर्थ’ पढ़ने तथा परिषद के पुस्तकालय की सदस्यता लेने की अपील की।
समारोह में उत्साहपूर्ण वातावरण रहा। इस अवसर पर रामनिवास द्विवेदी, डॉ. शिवनाथ पांडेय, दिनेश साव, मृत्युंजयवास्तव, डॉ. इतु सिंह, डॉ. रेशमी पांडेय मुखर्जी, डॉ. रामप्रवेश रजक, डॉ. वंशीधर शर्मा, संजय दास, विनोद यादव, डॉ. संजय राय, मंटू दास, प्रदीप धानुक, विकास जायसवाल, मुकेश पंडित, कुसुम भगत सहित बड़ी संख्या में साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन ज्योति चौरसिया, सोमैया सरबत, कंचन भगत एवं मौसमी ने किया।
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