हण्डिया तहसील दिवस: 51 मामलों की जाँच, 26 में शिकायतकर्ता असंतुष्ट

प्रयागराज के हण्डिया तहसील में विगत तहसील दिवस के 51 निस्तारित प्रकरणों का 17 जिला स्तरीय अधिकारियों से रैण्डम परीक्षण कराया गया। जाँच में 26 मामलों में शिकायतकर्ताओं से असंतोषजनक फीडबैक मिला। इसके बाद सतही आख्या देने वाले कार्मिकों के विरुद्ध प्रतिकूल प्रविष्टि तथा अन्य मामलों में कारण बताओ नोटिस और चेतावनी जारी करने के निर्देश दिए गए।

Sep 6, 2026 - 12:11
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हण्डिया तहसील दिवस: 51 मामलों की जाँच, 26 में शिकायतकर्ता असंतुष्ट
हण्डिया तहसील दिवस: 51 मामलों की जाँच, 26 में शिकायतकर्ता असंतुष्ट

तहसील दिवस के निस्तारित प्रकरणों की दोबारा जाँच में 26 मामलों में शिकायतकर्ता असंतुष्ट, अधिकारियों-कर्मचारियों पर कार्रवाई

प्रयागराज। जनशिकायतों के निस्तारण की गुणवत्ता और अधिकारियों की जवाबदेही को परखने के लिए जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा ने तहसील हण्डिया में आयोजित सम्पूर्ण समाधान दिवस के दौरान एक महत्वपूर्ण पहल की। विगत तहसील दिवस में निस्तारित किए गए प्रकरणों में से रैण्डम आधार पर 51 मामलों का चयन कर उनका परीक्षण 17 जिला स्तरीय अधिकारियों से कराया गया। परीक्षण के दौरान 26 प्रकरण ऐसे पाए गए, जिनमें संबंधित शिकायतकर्ताओं से प्राप्त फीडबैक संतोषजनक नहीं था। प्रशासन की इस कार्रवाई से स्पष्ट है कि केवल शिकायत का कागजी निस्तारण पर्याप्त नहीं माना जाएगा, बल्कि यह भी देखा जाएगा कि संबंधित शिकायतकर्ता वास्तव में निस्तारण से संतुष्ट है या नहीं।

51 मामलों की दोबारा हुई जाँच

बीते शनिवार तहसील हण्डिया में आयोजित सम्पूर्ण समाधान दिवस के दौरान जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा ने विगत तहसील दिवस के निस्तारित मामलों की वास्तविक स्थिति की समीक्षा कराई। इसके लिए 51 निस्तारित प्रकरणों का रैण्डम आधार पर चयन किया गया और इन मामलों का परीक्षण 17 जिला स्तरीय अधिकारियों को सौंपा गया। परीक्षण का उद्देश्य यह जानना था कि पूर्व में जिन शिकायतों को निस्तारित दर्शाया गया है, उनमें वास्तव में शिकायतकर्ता की समस्या का समाधान हुआ या नहीं और संबंधित अधिकारियों द्वारा प्रस्तुत की गई निस्तारण आख्या जमीनी स्थिति से मेल खाती है या नहीं। जाँच के दौरान 26 मामलों में शिकायतकर्ताओं से असंतोषजनक फीडबैक प्राप्त हुआ। इससे निस्तारण प्रक्रिया की गुणवत्ता और संबंधित कार्मिकों द्वारा प्रस्तुत की गई आख्या पर सवाल खड़े हुए।

सतही आख्या देने वालों पर प्रतिकूल प्रविष्टि

जिलाधिकारी के निर्देश के क्रम में ऐसे कार्मिकों के विरुद्ध कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं, जिनके द्वारा मामलों के संबंध में सतही आख्या प्रस्तुत की गई थी। ऐसे मामलों में संबंधित कार्मिकों की सेवा पुस्तिका में प्रतिकूल प्रविष्टि किए जाने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं, जिन कार्मिकों द्वारा संतोषजनक आख्या प्रस्तुत नहीं की गई, उन्हें कारण बताओ नोटिस और चेतावनी जारी किए जाने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन की कार्रवाई का महत्वपूर्ण पहलू यह है कि शिकायत निस्तारण को केवल कागजी प्रक्रिया के बजाय शिकायतकर्ता के फीडबैक से जोड़कर देखा गया है।

लेखपालों से लेकर पुलिस और विकास विभाग के कार्मिक कार्रवाई की जद में

जारी विवरण के अनुसार कार्रवाई की जद में राजस्व, पुलिस, ग्राम्य विकास और आपूर्ति विभाग से जुड़े कार्मिक शामिल हैं। चेतावनी पाने वालों में रविन्द्र कुमार लेखपाल हण्डिया, दीपिका राय लेखपाल हण्डिया, आलोक मौर्या लेखपाल तहसील हण्डिया और ममता लेखपाल तहसील हण्डिया शामिल हैं। इसी प्रकार राघवेन्द्र कुमार पटेल लेखपाल, विनोद कुमार लेखपाल तहसील हण्डिया, दिलीप कुमार लेखपाल तहसील हण्डिया, राम बाबू सरोज लेखपाल तहसील हण्डिया, हरिश्चन्द्र ग्राम पंचायत अधिकारी विकासखंड सैदाबाद, जितेन्द्र कुमार लेखपाल तहसील हण्डिया, शैलेश कुमार यादव लेखपाल, रमाकान्त तिवारी उपनिरीक्षक थाना सराय ममरेज और रविकान्त ग्राम विकास अधिकारी विकासखंड हण्डिया के विरुद्ध प्रतिकूल प्रविष्टि की कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। वहीं शालिनी गौतम उपनिरीक्षक थाना उतरांव, मो. इमरान उपनिरीक्षक थाना उतरांव, गुलाब चन्द्र लेखपाल हण्डिया, रमेश पाल ग्राम विकास अधिकारी विकासखंड हण्डिया, दिलीप कुमार ग्राम विकास अधिकारी विकासखंड हण्डिया, अंजू जायसवाल ग्राम विकास अधिकारी (स०क०), रविन्द्र कुमार यादव उपनिरीक्षक थाना उतरांव, अमित सिंह पूर्ति निरीक्षक हण्डिया तथा नीलम कुमारी ग्राम विकास अधिकारी विकासखंड धनूपुर को कारण बताओ नोटिस जारी किए जाने के निर्देश दिए गए हैं।

शिकायतकर्ता की संतुष्टि बनी निस्तारण की कसौटी

प्रशासनिक व्यवस्था में अक्सर शिकायतों के निस्तारण का आकलन संबंधित विभाग द्वारा तैयार की गई आख्या के आधार पर किया जाता है। लेकिन इस कार्रवाई में शिकायतकर्ता से सीधे प्राप्त फीडबैक को भी महत्वपूर्ण आधार बनाया गया है। यही इस पूरी प्रक्रिया का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष है। यदि किसी शिकायत को रिकॉर्ड में निस्तारित दिखा दिया गया हो, लेकिन शिकायतकर्ता की समस्या वास्तव में दूर न हुई हो, तो ऐसे निस्तारण को प्रभावी समाधान नहीं माना जा सकता। 51 मामलों में से 26 में असंतोषजनक फीडबैक मिलना इस बात की ओर संकेत करता है कि शिकायत निस्तारण की प्रक्रिया में केवल रिपोर्ट तैयार करने के बजाय उसकी वास्तविक प्रभावशीलता की निगरानी भी आवश्यक है।

कागजी निस्तारण पर प्रशासन का सख्त संदेश

जिलाधिकारी के निर्देशों से संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए यह संदेश भी गया है कि जनशिकायतों के निस्तारण में औपचारिकता या सतही रिपोर्ट को स्वीकार नहीं किया जाएगा।

किसी शिकायत का निस्तारण तभी प्रभावी माना जा सकता है, जब संबंधित समस्या का वास्तविक समाधान हो और शिकायतकर्ता को उससे संतुष्टि हो। इसी उद्देश्य से निस्तारित मामलों की रैण्डम जाँच की व्यवस्था जवाबदेही तय करने का प्रभावी माध्यम बन सकती है। हालांकि, 51 मामलों के इस परीक्षण में 26 प्रकरणों में असंतोषजनक फीडबैक मिलना प्रशासन के लिए भी आत्ममंथन का विषय है। यह आंकड़ा बताता है कि शिकायत निस्तारण की मौजूदा प्रक्रिया की निगरानी को और मजबूत करने की आवश्यकता है।

कार्रवाई के साथ आगे की निगरानी भी जरूरी

कार्रवाई के बाद सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह होगा कि संबंधित शिकायतों का वास्तविक समाधान किस स्तर तक हुआ और भविष्य में ऐसी शिकायतों के निस्तारण की गुणवत्ता कैसे सुनिश्चित की जाएगी। यदि रैण्डम जाँच की यह प्रक्रिया नियमित रूप से जारी रहती है और शिकायतकर्ता से सीधे फीडबैक लेकर निस्तारण की गुणवत्ता परखी जाती है, तो इससे अधिकारियों और कर्मचारियों में जवाबदेही की भावना मजबूत हो सकती है। जनता की शिकायत का समाधान केवल सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज एक टिप्पणी नहीं होना चाहिए। उसका उद्देश्य नागरिक की वास्तविक समस्या को दूर करना है। इसलिए ‘निस्तारित’ और ‘समाधान’ के बीच के अंतर को समाप्त करना किसी भी प्रभावी जनशिकायत प्रणाली की पहली शर्त होनी चाहिए। हण्डिया तहसील में 51 निस्तारित प्रकरणों के परीक्षण और उनमें 26 मामलों में असंतोषजनक फीडबैक मिलने के बाद की गई कार्रवाई इसी दिशा में प्रशासन की एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आई है। अब इसकी वास्तविक सफलता इस बात से तय होगी कि कार्रवाई के बाद शिकायतों का जमीनी समाधान कितना प्रभावी होता है और क्या भविष्य में निस्तारण की गुणवत्ता में ठोस सुधार दिखाई देता है।



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सुशील कुमार पाण्डेय मैं, अपने देश का एक जिम्मेदार नागरिक बनने की यात्रा पर हूँ, यही मेरी पहचान है I