मुक्तांचल के 51वें धर्मवीर भारती जन्मशती विशेषांक का लोकार्पण, साहित्यिक पुनर्पाठ पर जोर

हावड़ा में ‘मुक्तांचल’ के 51वें धर्मवीर भारती जन्मशती विशेषांक का लोकार्पण हुआ। विद्यार्थी मंच और ‘मुक्तांचल’ के संयुक्त आयोजन में साहित्यकारों, शिक्षाविदों और रंगकर्मियों ने भारती के साहित्य, ‘धर्मयुग’ के संपादन तथा उनकी रचनाओं की समकालीन प्रासंगिकता पर चर्चा की। कार्यक्रम में ‘ठंडा लोहा’ और ‘मुनादी’ का पाठ तथा ‘अंधा युग’ के ‘कौरव नगरी’ अंश की रंगमंचीय प्रस्तुति हुई। विद्यार्थी मंच ने 25 दिसंबर को साहित्यिक प्रतियोगिता आयोजित करने की घोषणा भी की।

Sep 22, 2026 - 14:04
Sep 22, 2026 - 23:08
 0
मुक्तांचल के 51वें धर्मवीर भारती जन्मशती विशेषांक का लोकार्पण, साहित्यिक पुनर्पाठ पर जोर
धर्मवीर भारती जन्मशती विशेषांक के लोकार्पण पर उपस्थित विद्वतजनों द्वारा व्याख्यान

हावड़ा, 20 सितंबर 2026 विद्यार्थी मंच एवं हिंदी साहित्यिक पत्रिका मुक्तांचल’ के संयुक्त तत्वावधान में ‘मुक्तांचल’ के 51वें अंक धर्मवीर भारती जन्मशती विशेषांक का लोकार्पण समारोह एवं ‘साहित्यिक अड्डा’ हावड़ा में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में साहित्यकारों, शिक्षाविदों, शोधार्थियों, रंगकर्मियों और साहित्यप्रेमियों ने धर्मवीर भारती के साहित्य, व्यक्तित्व, संपादकीय अवदान तथा उनकी रचनाओं की समकालीन प्रासंगिकता पर विस्तार से चर्चा की।

कार्यक्रम की शुरुआत ‘मुक्तांचल’ की संपादक डॉ. मीरा सिन्हा के स्वागत वक्तव्य से हुई। उन्होंने धर्मवीर भारती की साहित्यिक उपस्थिति और उनकी रचनाओं की निरंतर प्रासंगिकता को रेखांकित करते हुए कहा कि जन्मशती केवल किसी रचनाकार को स्मरण करने का अवसर नहीं है, बल्कि उसके साहित्य को नए संदर्भों में पुनः पढ़ने और समझने का अवसर भी है। डॉ. सिन्हा ने धर्मवीर भारती के बहुआयामी व्यक्तित्व का उल्लेख करते हुए कहा कि वे अच्छे विद्यार्थी, शोधार्थी, प्राध्यापक, लेखक और महान संपादक थे। उनके संपादन में धर्मयुग’ ने हिंदी पत्रकारिता और साहित्यिक संस्कृति में महत्वपूर्ण इतिहास रचा, जो आज भी अध्ययन और मूल्यांकन का विषय है। उन्होंने भारती के विपुल साहित्य के गंभीर अध्ययन की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने बताया कि विशेषांक के अतिथि संपादक डॉ. धूपनाथ प्रसाद (डी. एन. प्रसाद) ने धर्मवीर भारती पर विशेषांक प्रकाशित करने का प्रस्ताव रखा था, जिसे स्वीकार करते हुए जुलाई-सितंबर अंक को धर्मवीर भारती जन्मशती विशेषांक के रूप में निर्धारित किया गया। डॉ. सिन्हा ने डॉ. प्रसाद को धर्मवीर भारती साहित्य का विशेष अध्येता बताते हुए कहा कि उन्होंने बड़े मनोयोग से विशेषांक का संपादन और संयोजन किया है। उन्होंने यह भी घोषणा की कि विद्यार्थी मंच आगामी 25 दिसंबर को धर्मवीर भारती की जन्मशती के अवसर पर साहित्यिक प्रतियोगिता का आयोजन करेगा, जिसमें सफल विद्यार्थियों और शोधार्थियों को पुरस्कृत किया जाएगा।

साहित्य और पत्रकारिता के बीच सेतु थे धर्मवीर भारती : मृत्युंजय श्रीवास्तव

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे आलोचक एवं विचारक मृत्युंजय श्रीवास्तव ने धर्मवीर भारती के संपादकीय योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि उन्होंने ‘धर्मयुग’ के संपादक के रूप में साहित्य और पत्रकारिता के बीच एक महत्वपूर्ण सेतु तैयार किया। उन्होंने हिंदी की लघु पत्रिका परंपरा और साहित्यिक पत्रकारिता के इतिहास पर चर्चा करते हुए कहा कि एक दौर में लघु पत्रिकाएँ सामाजिक और राजनीतिक प्रश्नों पर गंभीर बहस का महत्वपूर्ण मंच हुआ करती थीं। उनके अनुसार आज के समय में उस परंपरा को नए रूप में आगे बढ़ाने की आवश्यकता है।

भारती का साहित्य अपने समय से संवाद करता है

विशेष अतिथि बतरस के संयोजक डॉ. कृष्ण कुमार श्रीवास्तव ने ‘मुक्तांचल’ के लगातार प्रकाशन के प्रयास की सराहना की। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में भी डॉ. मीरा सिन्हा जिस निरंतरता के साथ पत्रिकाओं का प्रकाशन कर रही हैं, वह प्रशंसनीय है। उन्होंने विद्यार्थी मंच के आगामी कार्यक्रमों में अपनी सहभागिता सुनिश्चित करने की बात कही।

आस्था संस्था, आसनसोल के अशोक आशीष ने कहा कि धर्मवीर भारती की रचनाओं से गुजरते हुए यह अनुभव होता है कि वे अपने समय के साथ लगातार संवाद कर रहे थे और अपने समय से आगे जाकर भविष्य की स्थितियों को भी देखने का प्रयास कर रहे थे। डॉ. प्रीति सिंह ने धर्मवीर भारती की चर्चित कविता ठंडा लोहा’ का पाठ किया।

गुनाहों का देवता’, ‘अंधा युग’ और ‘सूरज का सातवाँ घोड़ा’ पर चर्चा

कार्यक्रम में डॉ. पंकज साहा, महेश जायसवाल, आशुतोष सिंह, सेराज खान बातिश, डॉ. विनय मिश्र, डॉ. विजया सिंह, डॉ. कल्पना दीक्षित, डॉ. प्रकाश अग्रवाल तथा मिनाक्षी सांगनेरिया, सह-संपादक ‘सदीनामा’, सहित अन्य वक्ताओं ने धर्मवीर भारती की प्रमुख रचनाओं और उनके साहित्यिक अवदान पर विचार व्यक्त किए। वक्ताओं ने गुनाहों का देवता’, ‘अंधा युग’ और ‘सूरज का सातवाँ घोड़ा’ जैसी रचनाओं को हिंदी साहित्य की महत्वपूर्ण कृतियों के रूप में रेखांकित किया। ‘गुनाहों का देवता’ के संदर्भ में प्रेम और मानवीय संबंधों की जटिलताओं तथा ‘अंधा युग’ के माध्यम से इतिहास, युद्ध, नैतिक संकट और मनुष्य की जिम्मेदारी जैसे प्रश्नों पर चर्चा हुई। वक्ताओं ने भारती की संपादकीय भूमिका को भी विशेष रूप से याद किया। कहा गया कि जिस दौर में हिंदी की साहित्यिक पत्रकारिता व्यापक पाठकीय प्रभाव और वैचारिक हस्तक्षेप का महत्वपूर्ण माध्यम थी, उस दौर में धर्मवीर भारती का संपादकीय व्यक्तित्व विशेष प्रभाव रखता था।

मुनादी’ और ‘अंधा युग’ की रंगमंचीय प्रस्तुति

कार्यक्रम में विद्यार्थी मंच के सचिव एवं शिक्षाविद विवेक लाल ने धर्मवीर भारती की कविता मुनादी’ का अभिनयात्मक पाठ किया। इसके बाद लोकरंगी संस्था के नाट्य कलाकारों ने ऋतेश पांडेय के निर्देशन में धर्मवीर भारती के प्रसिद्ध नाटक अंधा युग’ के कौरव नगरी’ अंश की संवादात्मक प्रस्तुति दी। प्रस्तुति को उपस्थित दर्शकों ने सराहा। विद्यार्थी मंच की रागिनी पांडेय, वान्या लाल और स्वराज पांडेय ने भी धर्मवीर भारती की कविताओं का पाठ किया।

शोध, समीक्षा और संस्मरणों से समृद्ध है विशेषांक

मुक्तांचल’ के 51वें विशेषांक में धर्मवीर भारती के साहित्य और व्यक्तित्व से संबंधित शोध, समीक्षा, संस्मरण और वैचारिक सामग्री को स्थान दिया गया है। विशेषांक का उद्देश्य धर्मवीर भारती के साहित्य को जन्मशती के संदर्भ में नए सिरे से देखने तथा उनके रचनात्मक और संपादकीय अवदान पर संवाद को व्यापक बनाना है।

कार्यक्रम में पद्माकर व्यास, त्रिनेत्रकांत त्रिपाठी, विनीता सिंह, केशव कुमार झा, रुद्रकांत झा, अमन कुमार गुप्ता, अपराजिता विनय, अमित मिश्रा, अमित चौधरी, निखिल विनय और तनिष्का सेनगुप्ता सहित अनेक साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का सफल संचालन सहायक प्राध्यापक परमजीत पंडित ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन सुशील कुमार पांडेय ने किया।

कार्यक्रम का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि धर्मवीर भारती की जन्मशती को केवल औपचारिक स्मरण तक सीमित न रखते हुए उनकी रचनाओं के पुनर्पाठ, आलोचनात्मक अध्ययन और साहित्यिक संवाद की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा।

 

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow

सुशील कुमार पाण्डेय मैं, अपने देश का एक जिम्मेदार नागरिक बनने की यात्रा पर हूँ, यही मेरी पहचान है I