गौहर जान की स्मृति में कोलकाता में 1 अक्तूबर को ‘तवायफ़नामा’ डांस ड्रामा

भारत में ग्रामोफोन रिकॉर्डिंग के 125वें वर्ष में प्रवेश के अवसर पर कोलकाता में गौहर जान और भूली-बिसरी महिला गायिकाओं को समर्पित ‘तवायफ़नामा’ डांस ड्रामा 1 अक्तूबर को ICCR के सत्यजित सभागार में प्रस्तुत किया जाएगा।

Sep 24, 2026 - 11:24
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गौहर जान की स्मृति में कोलकाता में 1 अक्तूबर को ‘तवायफ़नामा’ डांस ड्रामा
गौहर जान की स्मृति में कोलकाता में 1 अक्तूबर को ‘तवायफ़नामा’ डांस ड्रामा

भारत में ग्रामोफोन रिकॉर्डिंग के 125वें वर्ष में गौहर जान को नमन, कोलकाता में 1 अक्तूबर को होगा ‘तवायफ़नामा’ डांस ड्रामा

कोलकाता, 23 सितंबर। भारत में ग्रामोफोन रिकॉर्डिंग के इतिहास के 125वें वर्ष में प्रवेश के अवसर पर कोलकाता में देश की पहली ग्रामोफोन रिकॉर्डिंग की मशहूर आवाज गौहर जान और संगीत-संस्कृति के इतिहास में महत्वपूर्ण योगदान देने वाली भूली-बिसरी महिला कलाकारों को याद किया जाएगा।

कोलकाता की संस्था ‘सांस्कृतिक पुनर्निर्माण मिशन’ और गुरुग्राम की ‘द परफॉर्मिंग आर्ट ट्राइब’ के संयुक्त आयोजन में आगामी 1 अक्तूबर को भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (ICCR) के सत्यजित सभागार में ‘तवायफ़नामा’ नामक डांस ड्रामा प्रस्तुत किया जाएगा। आयोजन का उद्देश्य तवायफ़ परंपरा से जुड़ी गायिकाओं के कला-संगीत के साथ-साथ स्त्री सशक्तिकरण और राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान को सामने लाना है।

गौहर जान की आवाज से शुरू हुआ भारतीय ग्रामोफोन रिकॉर्डिंग का अध्याय

भारत में ग्रामोफोन रिकॉर्डिंग के इतिहास में 11 नवंबर 1902 का दिन विशेष महत्व रखता है। इसी दौर में कलकत्ता में गौहर जान की आवाज को रिकॉर्ड किया गया था। इस ऐतिहासिक घटना ने भारतीय संगीत को रिकॉर्डिंग माध्यम के एक नए युग से जोड़ा। वर्ष 2026 में इस ऐतिहासिक संगीत यात्रा के 124 वर्ष पूरे हो रहे हैं और 125वें वर्ष की शुरुआत हो रही है। आयोजकों के अनुसार, इसी ऐतिहासिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुँचाने के उद्देश्य से ‘तवायफ़नामा’ का मंचन किया जा रहा है। कार्यक्रम में दिल्ली की रज़ा फाउंडेशन, भारतीय विद्या भवन, कोलकाता तथा स्त्री दर्पण का सहयोग भी है।

विमल कुमार की पुस्तक ‘तवायफ़नामा’ पर आधारित है प्रस्तुति

यह डांस ड्रामा वरिष्ठ कवि एवं पत्रकार विमल कुमार की पुस्तक ‘तवायफ़नामा’ पर आधारित है। पुस्तक में कोठों और संगीत की दुनिया से जुड़ी 33 भूली-बिसरी गायिकाओं के जीवन-संघर्ष, कला और संगीत में उनके योगदान को कविताओं के माध्यम से दर्ज किया गया है। रंगकर्मी सोमा बनर्जी के निर्देशन में तैयार इस लगभग एक घंटे की नृत्य-नाटिका में 12 महिला कलाकार हिस्सा लेंगी। प्रस्तुति में गौहर जान, जद्दन बाई, बेगम अख्तर, रसूलन बाई, विद्याधरी, असगरी बाई सहित अनेक कलाकारों के जीवन और योगदान को नृत्य एवं रंगमंच के माध्यम से प्रस्तुत किया जाएगा।

स्त्री सशक्तिकरण और राष्ट्र निर्माण के पहलू पर जोर

आयोजकों का कहना है कि इन महिला कलाकारों का योगदान केवल संगीत और मनोरंजन तक सीमित नहीं था। ‘तवायफ़नामा’ के माध्यम से उनके सामाजिक, सांस्कृतिक और राष्ट्रवादी योगदान के विभिन्न पहलुओं को सामने लाने का प्रयास किया गया है। विमल कुमार के अनुसार, इतिहास में इन गायिकाओं को अपेक्षित स्थान नहीं मिला, जबकि उन्होंने हिंदुस्तानी संगीत की परंपरा को समृद्ध किया और उसकी विरासत को आगे बढ़ाया। पुस्तक में उनके जीवन-संघर्ष और संगीत-साधना को कविताओं के माध्यम से अभिव्यक्ति दी गई है।

‘गौहर जान स्त्री स्वतंत्रता और सांस्कृतिक संपन्नता का प्रतीक’

भारतीय विद्या भवन, कोलकाता के निदेशक मृत्युंजय कुमार सिंह ने अपने शुभकामना संदेश में कहा कि गौहर जान, जद्दन बाई और अख्तरी बाई जैसी महान गायिकाओं को याद करना सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। उनके अनुसार, इन कलाकारों ने संगीत के इतिहास में अपनी पहचान बनाने के साथ स्त्री सशक्तिकरण की भी मिसाल कायम की। उन्होंने कहा कि कोलकाता, बनारस और लखनऊ की तरह देश का महत्वपूर्ण सांस्कृतिक और साहित्यिक केंद्र रहा है तथा ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को इस समृद्ध विरासत से परिचित कराने में मदद करेंगे। सांस्कृतिक पुनर्निर्माण मिशन के संयुक्त महासचिव एवं संयोजक डॉ. संजय जायसवाल ने कहा कि इस अवसर पर ‘स्त्री लेखा’ पत्रिका के नए अंक का विमोचन भी किया जाएगा। उनके अनुसार, गौहर जान स्त्री स्वतंत्रता, बौद्धिक दक्षता, सांस्कृतिक संपन्नता और स्त्री स्वीकार्यता के कई आयामों को एक साथ सामने लाती हैं।

परिचर्चा में साहित्य और संस्कृति के प्रमुख नाम होंगे शामिल

कार्यक्रम के दौरान आयोजित परिचर्चा में भारतीय भाषा परिषद के निदेशक एवं वरिष्ठ आलोचक शंभुनाथ, भारतीय विद्या भवन के निदेशक एवं कवि मृत्युंजय सिंह, भारतीय रेलवे के महाप्रबंधक एवं लेखक यतीश कुमार, आलोचक गीता दूबे और अल्पना नायक सहित अन्य वक्ता हिस्सा लेंगे।

नृत्य के माध्यम से लिखी जा रही है भूली-बिसरी गायिकाओं की कहानी

डांस ड्रामा की निदेशक सोमा मुखर्जी ने कहा कि इतिहास में भुला दी गई इन महिला कलाकारों के राष्ट्र निर्माण और भारतीय संस्कृति के निर्माण में योगदान से दर्शकों को परिचित कराना इस प्रस्तुति का प्रमुख उद्देश्य है। उन्होंने बताया कि इस डांस ड्रामा के दिल्ली में दो और गुरुग्राम में एक शो पहले ही आयोजित किए जा चुके हैं, जिन्हें दर्शकों की अच्छी प्रतिक्रिया मिली। उनके अनुसार, नृत्य के माध्यम से इन गायिकाओं के इतिहास को पुनः सामने लाने का प्रयास किया जा रहा है।

गौहर जान की भूमिका निभाएंगी गुंजन अजहर

‘तवायफ़नामा’ में गौहर जान की मुख्य भूमिका गुंजन अजहर निभाएंगी। वह ‘द लिटिल थेस्पियन’ से जुड़ी रंगकर्मी उमा झुंझुनवाला की पुत्री हैं। वहीं, कोलकाता की सुप्रसिद्ध कथक नृत्यांगना पारमिता मैत्रा की पुत्री और बिरजू महाराज की शिष्या निलोपा मोइत्रा अपने नृत्य के माध्यम से नृत्य-नाटिका का उद्बोधन करेंगी। अन्य कलाकार बेगम अख्तर, रसूलन बाई, जद्दन बाई, विद्याधरी और असगरी बाई जैसी कलाकारों की भूमिकाओं को मंच पर जीवंत करेंगी।

गौहर जान से जुड़ा कोलकाता का सांगीतिक इतिहास

गौहर जान का जन्म आजमगढ़ में हुआ था और बनारस के बाद उन्होंने कोलकाता को अपना प्रमुख कार्यक्षेत्र बनाया। उस दौर में कोलकाता हिंदुस्तानी संगीत और सांस्कृतिक गतिविधियों का एक महत्वपूर्ण केंद्र था। आयोजकों के अनुसार, अभिनेत्री नर्गिस की मां और प्रसिद्ध गायिका जद्दन बाई भी गौहर जान की संगति के लिए बनारस से कोलकाता आई थीं। इसी तरह बेगम अख्तर की मां मशरुती बाई भी अपनी बेटी को संगीत की शिक्षा दिलाने के लिए गौहर जान से संपर्क के उद्देश्य से कोलकाता आई थीं।

इस प्रकार ‘तवायफ़नामा’ केवल एक नृत्य-नाटिका नहीं, बल्कि भारतीय संगीत, स्त्री अस्मिता और सांस्कृतिक इतिहास के उन अध्यायों को पुनः स्मरण करने का प्रयास है, जिन्हें मुख्यधारा के इतिहास में अपेक्षाकृत कम स्थान मिला।



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सुशील कुमार पाण्डेय मैं, अपने देश का एक जिम्मेदार नागरिक बनने की यात्रा पर हूँ, यही मेरी पहचान है I