विद्यासागर विश्वविद्यालय में जनजातीय पोषण और बंगाल में हिंदी पर व्याख्यान
विद्यासागर विश्वविद्यालय में आयोजित शिक्षक व्याख्यान में प्रो. कौशिक बोस ने जनजातीय पोषण की स्थिति और डॉ. संजय जायसवाल ने हिंदी के विकास में बंगाल के ऐतिहासिक योगदान पर विचार रखे।
मिदनापुर, 4 नवंबर। विद्यासागर विश्वविद्यालय शिक्षक समिति की ओर से विश्वविद्यालय के बीएन शासमल सभागार में आयोजित शिक्षक व्याख्यान कार्यक्रम में जनजातीय आबादी की पोषण संबंधी स्थिति और हिंदी भाषा एवं साहित्य के विकास में बंगाल की भूमिका जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विद्वानों ने अपने विचार रखे। इस अवसर पर एंथ्रोपोलॉजी विभाग के प्रोफेसर कौशिक बोस ने 'भारत की जनजातीय आबादी का पोषण' तथा हिंदी विभाग के डॉ. संजय जायसवाल ने 'हिंदी के विकास में बंगाल की भूमिका' विषय पर व्याख्यान दिया।
कार्यक्रम का उद्घाटन शिक्षक समिति के अध्यक्ष प्रो. केशव चंद्र मंडल ने किया। इस अवसर पर आईक्यूएसी के निदेशक प्रो. मधु मंगल पाल, आरडी के निदेशक प्रो. अजय मिश्र तथा व्याख्यान के संयोजक प्रो. ब्रज गोपाल पाल उपस्थित रहे।
उन्होंने उच्च शिक्षा संस्थानों में हिंदी और बांग्ला भाषा एवं साहित्य के तुलनात्मक अध्ययन के लिए केंद्र स्थापित करने की आवश्यकता जताई। उन्होंने कहा कि विद्यासागर और भारतेन्दु की तरह हमें भी दोनों भाषाओं और संस्कृतियों के बीच सेतु बनने की जरूरत है। इस संदर्भ में उन्होंने राजा राममोहन राय, केशव चंद्र सेन, भूदेव मुखर्जी, रवींद्रनाथ टैगोर, राजनारायण बसु और शारदाचरण मित्र जैसे बांग्लाभाषी विद्वानों के योगदान का स्मरण करते हुए उनकी समन्वयकारी दृष्टि से प्रेरणा लेने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में प्रो. अमल मंडल, डॉ. तप्ति साहा, प्रो. प्रमोद कुमार प्रसाद, डॉ. श्रीकांत द्विवेदी, प्रो. अमित किस्कू, डॉ. अमृता गुप्ता, मंटू दास, सुषमा कुमारी सहित विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष, शिक्षक, शोधार्थी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का सफल संचालन प्रो. निवेदिता साहू ने किया।
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