IPS आशुतोष मिश्रा की माँ की मौत पर उलझी कहानी, जेवर बरामदगी पर पुलिस का खंडन
अंबेडकरनगर में IPS आशुतोष मिश्रा की माँ की संदिग्ध मौत के मामले में नया मोड़। SP प्राची सिंह ने कहा— FIR में दर्ज अधिकांश जेवर अभी बरामद नहीं, मौत का कारण भी स्पष्ट नहीं।
अंबेडकरनगर SP प्राची सिंह बोलीं- FIR में दर्ज अधिकांश जेवर अभी बरामद नहीं; पोस्टमार्टम में मौत का कारण स्पष्ट नहीं, बिसरा जाँच के लिए भेजा गया
अंबेडकरनगर। IPS अधिकारी आशुतोष मिश्रा की माँ इंद्रा देवी मिश्रा की मौत का मामला अब सिर्फ एक संदिग्ध मौत की जाँच तक सीमित नहीं रह गया है। मामला पुलिस के दावों, मीडिया रिपोर्टिंग और जाँच की निष्पक्षता को लेकर उठ रहे गंभीर सवालों के कारण भी चर्चा में है। 16 अगस्त को मालीपुर थाना क्षेत्र के रूढ़ा धमरुआ गांव स्थित घर में इंद्रा देवी मिश्रा का शव मिला था। परिजनों की ओर से हत्या और लूट की आशंका जताए जाने के बाद पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जाँच शुरू की। घटना के बाद पुलिस की कई टीमें जाँच में लगाई गईं और फोरेंसिक साक्ष्यों सहित विभिन्न पहलुओं की पड़ताल शुरू हुई।
जेवर बरामद होने की खबर पर पुलिस का स्पष्टीकरण
मामले में सबसे बड़ा विवाद जेवरात की बरामदगी को लेकर सामने आया। कुछ मीडिया और सोशल मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया कि मृतका के गायब बताए गए जेवर बरामद कर लिए गए हैं। लेकिन 19 अगस्त को अंबेडकरनगर की SP प्राची सिंह ने इस दावे का स्पष्ट खंडन किया। उनके अनुसार FIR में जिन जेवरात और सामान का उल्लेख किया गया है, उनमें से अधिकांश की बरामदगी अभी नहीं हुई है। पुलिस के मुताबिक घटनास्थल से तुलसी की माला और पीली धातु की कीलनुमा कुछ वस्तुएं मिली थीं, जिन्हें परिवार को सौंप दिया गया। यानी पुलिस के ताजा आधिकारिक स्पष्टीकरण और पहले प्रसारित हुई कुछ खबरों के बीच स्पष्ट अंतर दिखाई देता है। यही अंतर अब इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवालों में से एक बन गया है।
मौत का कारण भी अभी स्पष्ट नहीं
SP प्राची सिंह के अनुसार पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का स्पष्ट कारण सामने नहीं आया है। आगे की वैज्ञानिक जाँच के लिए बिसरा सुरक्षित रखकर प्रयोगशाला भेजा गया है। इसका अर्थ है कि फिलहाल उपलब्ध पोस्टमार्टम निष्कर्ष के आधार पर मौत को अंतिम रूप से हत्या अथवा प्राकृतिक मृत्यु घोषित करना जल्दबाजी होगी। यह बिंदु इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इस मामले में पहले अलग-अलग रिपोर्टों में मौत को हार्ट अटैक अथवा स्वाभाविक मृत्यु से जोड़कर भी प्रस्तुत किया गया था। दूसरी ओर, आशुतोष मिश्रा लगातार अपनी माँ की मौत को संदिग्ध बताते हुए निष्पक्ष जाँच की माँग कर रहे हैं।
IPS आशुतोष मिश्रा के मीडिया से सवाल
मीडिया रिपोर्टिंग को लेकर आशुतोष मिश्रा का आक्रोश भी सामने आया है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि किसी खबर में हत्या और लूट की आशंका को गलत बताया जा रहा है तथा जेवरात बरामद होने का दावा किया जा रहा है, तो उसके पीछे ठोस आधार और प्रमाण क्या थे? उनका कहना है कि परिवार पहले ही अपनी माँ को खोने के दुख में था और ऐसे समय में बिना पर्याप्त प्रमाण के चलने वाली खबरों ने परिवार की पीड़ा और बढ़ाई। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि यदि एक IPS अधिकारी के परिवार के मामले में बिना पर्याप्त प्रमाण के ऐसी खबर सामने आ सकती है, तो आम नागरिक के मामलों में क्या स्थिति होगी।
SP प्राची सिंह के बयान से भी उठे सवाल
SP प्राची सिंह ने कहा है कि पुलिस किसी निर्दोष व्यक्ति को क्यों फंसाएगी और जाँच निष्पक्ष, पारदर्शी तथा वैज्ञानिक तरीके से की जा रही है। पुलिस के अनुसार कई टीमें पूछताछ और साक्ष्य जुटाने में लगी हैं तथा जरूरत के अनुसार जाँच आगे बढ़ाई जा रही है।
लेकिन अब एक स्वाभाविक पत्रकारिता संबंधी सवाल यह भी है कि जिन मीडिया रिपोर्टों में जेवरात की बरामदगी या मौत के कारण को लेकर अलग दावे किए गए, उनके स्रोत क्या थे? क्या संबंधित रिपोर्ट प्रकाशित करने से पहले पुलिस अधिकारी से आधिकारिक पुष्टि की गई थी? यदि पुष्टि की गई थी तो उस समय क्या जानकारी दी गई थी? और यदि पुष्टि नहीं की गई थी तो इतनी गंभीर सूचना का आधार क्या था? इन सवालों का जवाब मिलना इसलिए जरूरी है क्योंकि किसी व्यक्ति की मृत्यु, हत्या की आशंका और संपत्ति की कथित लूट जैसे मामलों में गलत अथवा अपुष्ट सूचना न केवल जाँच की दिशा को प्रभावित कर सकती है, बल्कि मृतक के परिवार की प्रतिष्ठा और मानसिक स्थिति पर भी गंभीर असर डाल सकती है।
राजनीति से ज्यादा जरूरी है जाँच का सच
इस मामले पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं और प्रदेश की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाए गए हैं। लेकिन इस पूरे विवाद में सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप नहीं, बल्कि सत्य और निष्पक्ष जाँच है। यदि हत्या हुई है तो दोषियों की पहचान और गिरफ्तारी होनी चाहिए। यदि हत्या नहीं हुई है तो वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर यह तथ्य सामने आना चाहिए। यदि जेवर लूटे गए हैं तो उनकी बरामदगी होनी चाहिए और यदि वे बरामद नहीं हुए हैं तो बरामदगी का दावा करने वाली खबरों का स्रोत भी स्पष्ट होना चाहिए।
आखिर सवालों के जवाब कौन देगा?
इस समय इस मामले में कुछ सवाल अनुत्तरित हैं-
1. FIR में दर्ज अधिकांश जेवरात अभी तक कहां हैं?
2. जेवरात बरामद होने का दावा करने वाली खबर का आधार क्या था?
3. क्या संबंधित मीडिया संस्थान ने खबर प्रकाशित करने से पहले SP या जाँच अधिकारियों से आधिकारिक पुष्टि की थी?
4. पोस्टमार्टम में मौत का कारण स्पष्ट नहीं होने के बावजूद मौत को प्राकृतिक या हार्ट अटैक से जोड़कर खबरें कैसे चलीं?
5. बिसरा और फोरेंसिक जाँच की अंतिम रिपोर्ट क्या सामने लाती है?
6. क्या पुलिस हत्या और लूट की आशंका सहित सभी संभावित पहलुओं की समान गंभीरता से जाँच कर रही है?
फिलहाल पुलिस का आधिकारिक रुख साफ है- FIR में दर्ज अधिकांश जेवरात बरामद नहीं हुए हैं और मौत का कारण भी अभी स्पष्ट नहीं है। ऐसे में इस मामले में किसी निष्कर्ष पर पहुँचने के बजाय जाँच के अंतिम वैज्ञानिक परिणाम का इंतजार करना ही उचित होगा। लेकिन साथ ही, जिस आधार पर परस्पर विरोधी दावे सार्वजनिक हुए, उसका स्पष्टीकरण भी जरूरी है। क्योंकि न्याय केवल दोषी को सजा दिलाने का नाम नहीं है; न्याय का पहला कदम सत्य तक निष्पक्ष तरीके से पहुँचना है।
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