गांधी जयंती पर नैहाटी में गूँजी हिंदी, उर्दू और बांग्ला की कविताएँ
नैहाटी में गांधी जयंती के अवसर पर सांस्कृतिक पुनर्निर्माण मिशन द्वारा आयोजित बहुभाषी काव्य पाठ में हिंदी, उर्दू और बांग्ला के कवियों ने रचनाओं की प्रस्तुति दी। कार्यक्रम में महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। वक्ताओं ने गांधी के समावेशी, आत्मनिर्भर, मानवीय और लोकतांत्रिक समाज के विचारों को वर्तमान समय में प्रासंगिक बताया।
नैहाटी, 02 अक्तूबर 2026। गांधी जयंती के अवसर पर सांस्कृतिक पुनर्निर्माण मिशन की ओर से नैहाटी स्थित समरेश बसु सभागार में बहुभाषी काव्य पाठ का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। हिंदी, उर्दू और बांग्ला के कवियों ने अपनी रचनाओं का पाठ कर भाषाई विविधता और सांस्कृतिक संवाद का संदेश दिया।
मिशन के संरक्षक श्री रामनिवास द्विवेदी ने अपने संदेश में गांधी और लाल बहादुर शास्त्री को नमन करते हुए कहा कि गांधी की पहचान वैश्विक है और उनके जैसा मनुष्य होना दुर्लभ है। उन्होंने सांस्कृतिक पुनर्निर्माण मिशन द्वारा आयोजित भाषाई प्रेम और संवाद के इस काव्य उत्सव को अपना आशीर्वाद देते हुए समाज निर्माण, राष्ट्र प्रेम और सांस्कृतिक पुनर्निर्माण के प्रयासों को निरंतर आगे बढ़ाने की कामना की। उन्होंने बहुभाषी काव्य पाठ में शामिल हिंदी, उर्दू और बांग्ला के सभी कवियों को धन्यवाद दिया और बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय की धरती को नमन किया। उनके संदेश का पाठ प्रो. मंटू दास ने किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विद्यासागर विश्वविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. संजय जायसवाल ने कहा कि यह समय हाथ थामकर आगे बढ़ने का है। उन्होंने बहुभाषी काव्य पाठ को गांधी के सपनों के भारत की दिशा में एक छोटा-सा प्रयास बताया। उनके अनुसार गांधी ने एक समावेशी, आत्मनिर्भर, मानवीय और लोकतांत्रिक समाज का सपना देखा था और उस सपने को बचाना ही हमारा लक्ष्य होना चाहिए।
मिशन के उपाध्यक्ष मृत्युंजय श्रीवास्तव ने कविता की संरचना पर विचार व्यक्त करते हुए कहा कि कविता पंचतत्व से बनती है। ये पंचतत्व शब्द, बिंब, प्रतीक, विचार और दर्शन हैं। वहीं राजेंद्र गुप्ता ने कहा कि यह आयोजन गांधी जी और शास्त्री जी के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है।
इस अवसर पर तमाल साहा, पार्थ सारथी सरकार, सुरेश शॉ, अली शाहिद दिलकश, अमरजीत पंडित, सुशील कांति, शकील अख्तर, डॉ. कलावती कुमारी, राजेश साव, नागेंद्र पंडित, विकास कुमार, डॉ. इबरार ख़ान, सिपाली गुप्ता, शाहनवाज़ आदिल, सुषमा कुमारी, सत्यम तिवारी, कुसुम भगत और सत्यम पांडेय ने अपनी कविताओं का पाठ किया।
कार्यक्रम में गंगा प्रसाद, उदयराज सिंह, राजेश पांडेय, सुशील पांडेय, अवध पांडेय, रवि भगत, दिलीप कुमार, डॉ. नवनीता दास, डॉ. संजय राय, रूपेश कुमार यादव, उत्तम कुमार, कन्हैया भगत, मनीषा गुप्ता, संजीत चौधरी, विकास जायसवाल, अजय पोद्दार, प्रभाकर साव, शबाना खातून, अनूप प्रसाद, फरहान अज़ीज़, सुमित ठाकुर, उषा कुमारी दूबे, प्रींशु ठाकुर, सलोनी शर्मा और अनुपमा वर्मा सहित बड़ी संख्या में साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे।
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