‘स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए योग’ विषय पर शब्दभूमि प्रकाशन की राष्ट्रीय संगोष्ठी संपन्न

विश्व योग दिवस 2026 पर शब्दभूमि प्रकाशन द्वारा 'स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए योग' विषय पर राष्ट्रीय ऑनलाइन संगोष्ठी आयोजित की गई, जिसमें देशभर के विद्वानों एवं शोधार्थियों ने योग के महत्व पर विचार व्यक्त किए।

Jun 22, 2026 - 21:45
Jun 22, 2026 - 21:50
 0
‘स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए योग’ विषय पर शब्दभूमि प्रकाशन की राष्ट्रीय संगोष्ठी संपन्न
राष्ट्रीय संगोष्ठी के प्रतिभागी

देश के विभिन्न राज्यों से जुड़े शिक्षकों, शोधार्थियों एवं विद्वानों ने योग को स्वस्थ, सक्रिय और आत्मनिर्भर वृद्धावस्था का आधार बताया

विश्व योग दिवस 2026 के अवसर पर शब्दभूमि प्रकाशन द्वारा 'स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए योग' विषय पर राष्ट्रीय ऑनलाइन संगोष्ठी का आयोजन किया गया। ज़ूम माध्यम से आयोजित इस कार्यक्रम में देश के विभिन्न राज्यों के शिक्षकों, शोधार्थियों, विद्वानों एवं प्रतिभागियों ने सहभागिता की। संगोष्ठी में योग को केवल शारीरिक व्यायाम न मानकर स्वस्थ, सक्रिय एवं संतुलित जीवन शैली के रूप में अपनाने पर बल दिया गया। विशेष रूप से वृद्धावस्था में योग की भूमिका, मानसिक स्वास्थ्य, सामाजिक समरसता, भारतीय ज्ञान परंपरा तथा नीति निर्माण में योग के महत्व पर विचार व्यक्त किए गए।

स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए योग पर राष्ट्रीय विमर्श

विश्व योग दिवस 2026 के उपलक्ष्य में शब्दभूमि प्रकाशन द्वारा ‘स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए योग’ विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन ऑनलाइन माध्यम ज़ूम पर किया गया। कार्यक्रम का संचालन शोधार्थी गायत्री उपाध्याय ने किया। उन्होंने कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए सभी प्रतिभागियों का स्वागत किया तथा शब्दभूमि प्रकाशन का परिचय देते हुए कहा कि यह संस्था साहित्य, विचार और सामाजिक चेतना के संवर्धन के लिए निरंतर कार्य कर रही है।

संचालिका ने कहा कि वर्तमान समय में योग केवल एक दिवस तक सीमित रहने वाला उत्सव नहीं है, बल्कि यह वर्षभर अपनाई जाने वाली जीवनशैली बन चुका है। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 की आधिकारिक थीम ‘स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए योग’ को केंद्र में रखते हुए संगोष्ठी का आयोजन किया गया।

योग की वैश्विक यात्रा पर चर्चा

कार्यक्रम में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर भी प्रकाश डाला गया। बताया गया कि संयुक्त राष्ट्र महासभा ने वर्ष 2014 में 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस घोषित किया तथा 2015 में इसका पहला आयोजन हुआ। योग को भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा की अमूल्य देन बताते हुए इसे विश्व स्वास्थ्य और मानवीय कल्याण का प्रभावी माध्यम कहा गया।

परिवार, समाज और नीति निर्माण में योग की भूमिका

संस्कृति विश्वविद्यालय, मथुरा की शोधार्थी संगीता सिंह ने परिवार, समाज और नीति निर्माण में योग की भूमिकाविषय पर अपना वक्तव्य प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि योग व्यक्ति के शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक विकास का समग्र माध्यम है। योग पारिवारिक संबंधों को सुदृढ़ करता है, सामाजिक समरसता को बढ़ाता है तथा स्वास्थ्य और शिक्षा संबंधी नीतियों में सकारात्मक योगदान देता है।

उन्होंने कहा कि आधुनिक जीवन की व्यस्तता और तनाव के बीच योग व्यक्ति, परिवार और समाज में संतुलन स्थापित करने का प्रभावी साधन बनकर उभरा है।

भारतीय ज्ञान परंपरा और स्वस्थ आयु

डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय, लखनऊ की सहायक आचार्य डॉ. सुधा मौर्य ने ‘स्वस्थ आयु के लिए योग : भारतीय ज्ञान परंपरा के आलोक में’ विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा में योग केवल व्यायाम नहीं, बल्कि जीवन को संतुलित, स्वस्थ और दीर्घायु बनाने वाली समग्र जीवन पद्धति है। उन्होंने बताया कि नियमित योगाभ्यास से वृद्ध व्यक्तियों की शारीरिक क्षमता, मानसिक स्वास्थ्य, संज्ञानात्मक क्षमता तथा जीवन संतुष्टि में वृद्धि होती है। ताड़ासन, वज्रासन, त्रिकोणासन, भुजंगासन, पवनमुक्तासन, अनुलोम-विलोम, भ्रामरी तथा ध्यान जैसे अभ्यास वृद्धजनों के लिए विशेष रूप से उपयोगी हैं।

प्रतिभागियों ने साझा किए अनुभव

कार्यक्रम के दौरान विभिन्न राज्यों से जुड़े प्रतिभागियों ने भी अपने विचार रखे। बिहार से आशीष कुमार ने योग पर अपनी काव्यात्मक प्रस्तुति दी और कहा कि योग को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाना समय की आवश्यकता है। पतंजलि विश्वविद्यालय, हरिद्वार से जुड़े मंगल पांडे ने महर्षि पतंजलि के अष्टांग योग का संक्षिप्त परिचय प्रस्तुत किया और योग के आठ अंगों की व्याख्या की।

मध्यप्रदेश के शिक्षक नंद किशोर गौतम ने कहा कि स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क का निवास होता है तथा योग समाज और राष्ट्र निर्माण का महत्वपूर्ण आधार बन सकता है।

उत्तर प्रदेश से जुड़ी छात्रा रागिनी पांडेय ने ‘योग और प्रतिरक्षा तंत्र: उम्र के साथ संतुलन’ विषय पर बोलते हुए कहा, “नियमित योग से ढलती उम्र के असर को धीमे किया जा सकता है, यह कोरा गल्प नहीं बल्कि वैज्ञानिक तथ्य है।“  

खुला मंच बना आकर्षण

संगोष्ठी का एक विशेष आकर्षण खुला मंच रहा, जिसमें प्रतिभागियों ने अपने अनुभव, विचार और रचनाएँ प्रस्तुत कीं। बेंगलुरु की प्रतिभागी अनीता मोदी ने योग पर अपनी स्वरचित कविता प्रस्तुत करते हुए कहा कि समयाभाव का बहाना छोड़कर योग को जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए।

धन्यवाद ज्ञापन

अंत में पतंजलि विश्वविद्यालय की छात्रा जान्हवी पांडेय ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। उन्होंने सभी वक्ताओं, प्रतिभागियों और शब्दभूमि प्रकाशन का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार की संगोष्ठियाँ समाज में स्वास्थ्य एवं जागरूकता का वातावरण तैयार करती हैं।

प्रमुख बिंदु

  • विश्व योग दिवस 2026 पर राष्ट्रीय ऑनलाइन संगोष्ठी।
  • विषय : ‘स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए योग’।
  • देशभर के विद्वानों, शिक्षकों एवं शोधार्थियों की सहभागिता।
  • वृद्धावस्था में योग की उपयोगिता पर विशेष चर्चा।
  • भारतीय ज्ञान परंपरा एवं योग के वैज्ञानिक पक्ष पर विमर्श।
  • प्रतिभागियों की काव्य एवं अनुभवात्मक प्रस्तुतियाँ।

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow

सुशील कुमार पाण्डेय मैं, अपने देश का एक जिम्मेदार नागरिक बनने की यात्रा पर हूँ, यही मेरी पहचान है I