अयोध्या जेल में बंदियों की उच्च शिक्षा पर मानवाधिकार आयोग सख्त, 20 अगस्त को अधिकारी तलब

अयोध्या जिला कारागार में बंदियों के लिए उच्च शिक्षा की व्यवस्था नहीं होने के मामले में उत्तर प्रदेश राज्य मानवाधिकार आयोग ने सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने 20 अगस्त 2026 को जिम्मेदार अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से तलब किया है।

Jul 10, 2026 - 09:47
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अयोध्या जेल में बंदियों की उच्च शिक्षा पर मानवाधिकार आयोग सख्त, 20 अगस्त को अधिकारी तलब

अयोध्या जिला कारागार में बंदियों को उच्च शिक्षा से वंचित रखने पर राज्य मानवाधिकार आयोग सख्त, 20 अगस्त को जिम्मेदार अधिकारी तलब

उत्तर प्रदेश राज्य मानवाधिकार आयोग ने अयोध्या जिला कारागार में बंदियों के लिए उच्च शिक्षा की व्यवस्था नहीं होने के मामले को गंभीरता से लेते हुए कारागार प्रशासन से जवाब-तलब किया है। आयोग ने उप महानिरीक्षक, कारागार प्रशासन एवं सुधार सेवाएं, लखनऊ को निर्देश दिया है कि 20 अगस्त 2026 को आयोग के समक्ष किसी जिम्मेदार अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित कर प्रकरण की स्थिति स्पष्ट करें। यह कार्रवाई आजाद अधिकार सेना के क्षेत्रीय प्रभारी संजय कुमार वर्मा द्वारा की गई शिकायत पर हुई है।

अयोध्या जिला कारागार में उच्च शिक्षा की सुविधा पर उठे गंभीर सवाल

अयोध्या जिला कारागार में निरुद्ध बंदियों के लिए उच्च शिक्षा की कोई समुचित व्यवस्था उपलब्ध न होने का मामला अब उत्तर प्रदेश राज्य मानवाधिकार आयोग तक पहुंच गया है। आयोग ने इस विषय को केवल प्रशासनिक कमी न मानते हुए इसे बंदियों के अधिकारों से जुड़ा महत्वपूर्ण प्रश्न माना है। यह मामला उस समय प्रकाश में आया जब आजाद अधिकार सेना के मध्य क्षेत्र, उत्तर प्रदेश के क्षेत्रीय प्रभारी संजय कुमार वर्मा ने आयोग के समक्ष शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में कहा गया कि अयोध्या जिला कारागार में निरुद्ध बंदियों को उच्च शिक्षा प्राप्त करने का कोई प्रभावी अवसर उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है, जिससे उनका शैक्षणिक एवं सामाजिक पुनर्वास प्रभावित हो रहा है।

डायरी एवं वाद संख्या

इस शिकायत को आयोग ने डायरी संख्या 5027/CR/2026 तथा केस संख्या 5938/24/24/2026 के रूप में पंजीकृत किया।

आयोग की कार्रवाई का पूरा घटनाक्रम

मामले को गंभीरता से लेते हुए उत्तर प्रदेश राज्य मानवाधिकार आयोग ने क्रमबद्ध कार्रवाई की। सबसे पहले 06 अप्रैल 2026 को आयोग ने महानिदेशक, कारागार प्रशासन एवं सुधार सेवाएं, लखनऊ को नोटिस जारी कर पूरे मामले पर विस्तृत रिपोर्ट माँगी। आयोग के निर्देशों के अनुपालन में 22 मई 2026 को उप महानिरीक्षक, कारागार प्रशासन द्वारा मामले की जाँच कराई गई। जाँच रिपोर्ट उप महानिरीक्षक कारागार, अयोध्या परिक्षेत्र द्वारा आयोग के समक्ष प्रस्तुत की गई। जाँच रिपोर्ट का अवलोकन करने के बाद आयोग पूरी तरह संतुष्ट नहीं हुआ। इसके पश्चात 03 जुलाई 2026 को आयोग ने पुनः नोटिस जारी करते हुए उप महानिरीक्षक, कारागार प्रशासन एवं सुधार सेवाएं, लखनऊ को निर्देश दिया कि प्रकरण से संबंधित किसी जिम्मेदार अधिकारी को 20 अगस्त 2026 को दोपहर 12:30 बजे आयोग के समक्ष व्यक्तिगत रूप से उपस्थित कराया जाए, ताकि मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जा सके।

बंदियों की शिक्षा को मानवाधिकार का विषय मान रहा आयोग

राज्य मानवाधिकार आयोग का यह रुख इस दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है कि भारतीय न्याय व्यवस्था में कारागार केवल दंड देने का स्थान नहीं, बल्कि सुधार और पुनर्वास का केंद्र भी माना जाता है। उच्च शिक्षा की उपलब्धता बंदियों के व्यक्तित्व विकास, पुनर्वास, सामाजिक पुनर्स्थापन तथा अपराध की पुनरावृत्ति रोकने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। आयोग ने संकेत दिया है कि शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधा उपलब्ध कराना राज्य की जिम्मेदारी है और इसमें किसी प्रकार की लापरवाही स्वीकार्य नहीं हो सकती।

20 अगस्त को होगी अगली सुनवाई

आयोग ने मामले की अगली सुनवाई 20 अगस्त 2026 निर्धारित की है। इस दिन संबंधित अधिकारी की व्यक्तिगत उपस्थिति के बाद यह स्पष्ट हो सकेगा कि अयोध्या जिला कारागार में उच्च शिक्षा की व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं तथा भविष्य की कार्ययोजना क्या होगी।

शिकायतकर्ता की प्रतिक्रिया

शिकायतकर्ता एवं आजाद अधिकार सेना के क्षेत्रीय प्रभारी संजय कुमार वर्मा ने आयोग की कार्रवाई का स्वागत करते हुए कहा कि यह आदेश केवल अयोध्या जिला कारागार तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे प्रदेश के कारागारों में शिक्षा व्यवस्था को लेकर सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हो सकता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि आयोग के हस्तक्षेप के बाद बंदियों को उच्च शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराने के लिए कारागार प्रशासन प्रभावी कदम उठाएगा और सुधारात्मक व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा।

कारागार सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण मामला

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बंदियों को उच्च शिक्षा, कौशल विकास तथा दूरस्थ शिक्षा जैसी सुविधाएं व्यवस्थित रूप से उपलब्ध कराई जाएं, तो उनके पुनर्वास की संभावनाएं बढ़ती हैं और समाज में सम्मानजनक पुनर्स्थापन संभव हो पाता है। ऐसे में राज्य मानवाधिकार आयोग की यह कार्रवाई भविष्य में उत्तर प्रदेश की कारागार व्यवस्था में व्यापक सुधार का आधार बन सकती है।

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सुशील कुमार पाण्डेय मैं, अपने देश का एक जिम्मेदार नागरिक बनने की यात्रा पर हूँ, यही मेरी पहचान है I