विद्यासागर विश्वविद्यालय में पूर्व छात्र एवं मंत्री राजेश महतो का अभिनंदन, बोले- "मेरे शिक्षकों ने मुझे गढ़ा"
विद्यासागर विश्वविद्यालय में पूर्व छात्र एवं पश्चिम बंगाल सरकार के मंत्री राजेश महतो का भव्य सम्मान हुआ। 28 वर्ष बाद मातृ संस्थान लौटे मंत्री ने कहा, "विद्यासागर विश्वविद्यालय और मेरे शिक्षकों ने मुझे गढ़ा है।"
मिदनापुर, 9 जुलाई 2026। विद्यासागर विश्वविद्यालय का परिसर बुधवार को उस समय गौरव, आत्मीयता और भावनाओं से भर उठा, जब विश्वविद्यालय के अंग्रेज़ी विभाग के पूर्व छात्र एवं पश्चिम बंगाल सरकार के पशु संसाधन विकास एवं मत्स्य पालन विभाग के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री राजेश महतो लगभग 28 वर्षों बाद अपने मातृ संस्थान लौटे। वर्ष 1998 में अंग्रेज़ी विभाग से स्नातक करने वाले राजेश महतो का यह दौरा केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि विद्यार्थी से जनप्रतिनिधि और मंत्री बनने तक की उनकी प्रेरणादायक यात्रा का उत्सव बन गया। उनके साथ उनकी धर्मपत्नी, पुत्र तथा अंग्रेज़ी विभाग के अनेक सहपाठी भी विश्वविद्यालय पहुँचे। विश्वविद्यालय परिसर में प्रवेश करते ही संकाय सदस्यों, शोधार्थियों, विद्यार्थियों और पूर्व छात्रों ने उनका आत्मीय स्वागत किया। इसके पश्चात माननीय कुलपति प्रो. दीपक कुमार कर ने अपने कार्यालय में मंत्री महोदय एवं उनके परिवार का स्नेहपूर्ण स्वागत किया।
खचाखच भरे सभागार में हुआ भव्य सम्मान समारोह
दोपहर ठीक 12 बजे नवनिर्मित बीरेन्द्रनाथ शासमल सभागार में आयोजित सम्मान समारोह में विश्वविद्यालय परिवार की अभूतपूर्व उपस्थिति देखने को मिली। सभागार पूरी तरह भरा हुआ था और वातावरण उत्साह एवं गर्व से परिपूर्ण था। मंच पर कुलपति प्रो. दीपक कुमार कर के साथ कला एवं वाणिज्य संकाय के अधिष्ठाता प्रो. अरिंदम गुप्ता, विज्ञान संकाय के अधिष्ठाता प्रो. परेश चन्द्र जाना, कुलसचिव डॉ. जयंत किशोर नंदी तथा अंग्रेज़ी विभागाध्यक्ष डॉ. देबदास राय उपस्थित रहे। कार्यक्रम में प्राणीशास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ. सागर आचार्य, मत्स्य विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. मनोज कुमार पाती, माइक्रोबायोलॉजी विभाग के प्रो. केशव मंडल सहित विभिन्न विभागों के शिक्षक, कर्मचारी, शोधार्थी एवं विद्यार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
"विद्यासागर विश्वविद्यालय और मेरे शिक्षकों ने मुझे गढ़ा है"
अपने अत्यंत भावुक और प्रेरणादायक संबोधन में मंत्री राजेश महतो ने छात्र जीवन की अनेक स्मृतियों को साझा किया। उन्होंने कहा कि उनके व्यक्तित्व, सोच और सार्वजनिक जीवन की नींव इसी विश्वविद्यालय में पड़ी। उन्होंने कहा- "विद्यासागर विश्वविद्यालय और मेरे शिक्षकों ने मुझे गढ़ा है। आज मैं जो कुछ भी हूँ, उसमें इस विश्वविद्यालय और मेरे गुरुओं का सबसे बड़ा योगदान है।" उन्होंने अपने सभी शिक्षकों, विशेष रूप से दिवंगत शिक्षकों स्वर्गीय प्रो. तपन ज्योति बनर्जी, प्रो. अकरम हुसैन मोल्ला, प्रो. शंकर प्रसाद सिंह तथा प्रो. तीर्थंकर दास पुरकायस्थ सहित उन सभी शिक्षकों को श्रद्धापूर्वक स्मरण किया जिन्होंने उनके व्यक्तित्व के निर्माण में योगदान दिया। उन्होंने अपने बचपन और विद्यालयी जीवन में झेली गई कठिनाइयों का उल्लेख करते हुए कहा कि संघर्ष ही उनकी सबसे बड़ी पूँजी रहा है।
"अंग्रेज़ी साहित्य ने जीवन पढ़ना सिखाया"
मंत्री महोदय ने अंग्रेज़ी विभाग के प्रति विशेष आभार व्यक्त करते हुए कहा कि अंग्रेज़ी साहित्य ने उन्हें केवल पुस्तकों के शब्द नहीं, बल्कि जीवन के उन अर्थों को भी समझना सिखाया जो लिखे नहीं जाते। उन्होंने कहा- "अंग्रेज़ी साहित्य ने मुझे केवल वह नहीं सिखाया जो पुस्तकों में लिखा है, बल्कि वह भी समझाया जो कहीं लिखा नहीं जाता। यही शिक्षा मेरे सार्वजनिक जीवन का आधार बनी।" उनका यह वक्तव्य उपस्थित विद्यार्थियों और शिक्षकों के बीच विशेष चर्चा का विषय बना।
झूमर लोकगीत ने बाँधा समाँ
कार्यक्रम के दौरान मंत्री राजेश महतो ने सभी को आश्चर्यचकित करते हुए स्वयं एक पारंपरिक झूमर लोकगीत प्रस्तुत किया। उनके इस सहज एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतीकरण ने पूरे सभागार को उत्साह और तालियों से गुंजायमान कर दिया तथा उपस्थित जनसमूह ने इसका भरपूर आनंद लिया।
कुलपति ने बताया "मिट्टी का सपूत"
अपने स्वागत भाषण में कुलपति प्रो. दीपक कुमार कर ने राजेश महतो को "मिट्टी का सपूत" और विश्वविद्यालय का गौरवशाली पूर्व छात्र बताया। उन्होंने कहा कि किसी भी शिक्षक के लिए उसके विद्यार्थी की सफलता से बड़ा कोई पुरस्कार नहीं होता। उन्होंने मंत्री महोदय द्वारा जनसेवा, विशेषकर समाज के वंचित वर्गों तथा कुड़माली समुदाय के उत्थान हेतु किए जा रहे कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि उनकी उपलब्धियाँ विश्वविद्यालय के प्रत्येक विद्यार्थी के लिए प्रेरणा हैं। उन्होंने कहा कि यह सम्मान समारोह केवल एक व्यक्ति का सम्मान नहीं, बल्कि विश्वविद्यालय और उसके पूर्व छात्रों के बीच अटूट संबंधों का उत्सव है।
अंग्रेज़ी विभाग के लिए ऐतिहासिक क्षण
अंग्रेज़ी विभागाध्यक्ष डॉ. देबदास राय ने अपने स्वागत भाषण में कहा कि विभाग के इतिहास में पहली बार उसका कोई पूर्व छात्र पश्चिम बंगाल सरकार में मंत्री बना है। उन्होंने इसे विभाग के लिए ऐतिहासिक और गौरवपूर्ण अवसर बताया। उन्होंने कहा कि यह सम्मान किसी औपचारिकता या लाभ के लिए नहीं, बल्कि अपने पूर्व छात्र के प्रति विभाग के आत्मीय स्नेह, सम्मान और गर्व की अभिव्यक्ति है। उन्होंने विशेष रूप से गोपीबल्लभपुर विधानसभा क्षेत्र के वंचित लोगों के विकास तथा कुड़माली भाषा एवं संस्कृति के संरक्षण के लिए मंत्री महोदय के प्रयासों की सराहना की।
विभागों का किया भ्रमण
सम्मान समारोह के उपरांत मंत्री राजेश महतो ने अपने पुराने अंग्रेज़ी विभाग का भ्रमण किया। इसके अतिरिक्त उन्होंने प्राणीशास्त्र विभाग तथा मत्स्य विज्ञान विभाग का भी दौरा किया और शिक्षकों एवं विद्यार्थियों से संवाद किया।
धन्यवाद ज्ञापन एवं संचालन
कार्यक्रम का धन्यवाद ज्ञापन प्रो. इंद्रनील आचार्य ने प्रस्तुत किया, जबकि संपूर्ण कार्यक्रम का प्रभावी संचालन एवं समन्वयन प्रो. जयजीत घोष ने किया।
पूर्व छात्रों और विश्वविद्यालय के रिश्ते का प्रेरक उदाहरण
समारोह ने यह सिद्ध किया कि विश्वविद्यालय केवल डिग्री प्रदान करने वाली संस्था नहीं, बल्कि जीवन निर्माण का केंद्र होता है। वर्षों बाद अपने संस्थान लौटे एक पूर्व छात्र का यह सम्मान नई पीढ़ी के विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना। राजेश महतो की यह वापसी इस बात का सशक्त संदेश देती है कि शिक्षा, संघर्ष, संस्कार और अपने गुरुओं के प्रति सम्मान ही किसी व्यक्ति को समाज और राष्ट्र के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने योग्य बनाते हैं।
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