‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति और अनुवाद की भारतीय परंपरा’ पर राष्ट्रीय संगोष्ठी संपन्न
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के छह वर्ष पूर्ण होने पर महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, कोलकाता केंद्र में 'राष्ट्रीय शिक्षा नीति और अनुवाद की भारतीय परंपरा' विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित हुई। कार्यक्रम में भारतीय भाषाओं, अनुवाद परंपरा और निबंध प्रतियोगिता के विजेताओं को सम्मानित किया गया।
कोलकाता, 5 अगस्त 2026। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के सफलतापूर्वक छह वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित अखिल भारतीय शिक्षा समागम (ए.बी.एस.एस.) 2026 के अंतर्गत महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के क्षेत्रीय केंद्र, साल्ट लेक, कोलकाता में ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति और अनुवाद की भारतीय परंपरा’ विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ विश्वविद्यालय के कुलगीत के साथ हुआ।
स्वागत वक्तव्य देते हुए क्षेत्रीय केंद्र, कोलकाता के अकादमिक निदेशक प्रो. अमित राय ने कहा कि एक भाषा से दूसरी भाषा में किया गया अनुवाद केवल शब्दों का रूपांतरण नहीं, बल्कि एक नई कृति का सृजन होता है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 ने मातृभाषाओं के प्रति सम्मान और बहुभाषिक शिक्षा के प्रति विश्वास को नई दिशा प्रदान की है। ऐसे आयोजनों से हिंदीतर क्षेत्रों के विद्यार्थी, शोधार्थी तथा अनुवाद के क्षेत्र में कार्यरत विद्वानों में भारतीय भाषाओं के मध्य संवाद और अनुवाद की नई संभावनाएँ विकसित होंगी।
मुख्य वक्ता प्रो. ऋषिकेश राय ने भारतीय अनुवाद परंपरा पर विस्तृत विचार व्यक्त करते हुए कहा कि औपनिवेशिक और साम्राज्यवादी दृष्टिकोण के कारण पश्चिमी विद्वानों ने भारतीय ज्ञान परंपरा के केवल चुनिंदा ग्रंथों के अनुवाद को महत्त्व दिया। उन्होंने आवश्यकता व्यक्त की कि भारतीय दर्शन, विज्ञान, साहित्य और ज्ञान-विज्ञान से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण ग्रंथों का विभिन्न भारतीय एवं विश्व भाषाओं में अनुवाद किया जाए, जिससे भारत की समृद्ध बौद्धिक विरासत वैश्विक स्तर पर अधिक व्यापक रूप से पहुँचे।
संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए प्रो. प्रेमशंकर त्रिपाठी ने कहा कि अनुवाद आज वैश्विक ज्ञान-विनिमय का सबसे प्रभावी माध्यम बन चुका है। उन्होंने कहा कि भारत का ज्ञान भारतीय भाषाओं के माध्यम से समाज तक पहुँचना चाहिए और यही राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का मूल उद्देश्य भी है।
इस अवसर पर क्षेत्रीय केंद्र, कोलकाता द्वारा आयोजित ‘प्रेमचंद का साहित्यिक अवदान’ विषयक राष्ट्रीय निबंध लेखन प्रतियोगिता के विजेताओं की घोषणा भी की गई। प्रतियोगिता में देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. चित्रा माली ने परिणाम घोषित करते हुए बताया कि सुमित्रा चौहान को प्रथम, विद्या कुमारी साव को द्वितीय, आशा शर्मा को तृतीय तथा नंदिनी सिंह को सांत्वना पुरस्कार प्रदान किया गया। सभी प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र भी वितरित किए गए।
कार्यक्रम का सफल संचालन सहायक प्रोफेसर अभिलाष कुमार गोंड ने किया, जबकि अंत में ज्योतिष पायेंग ने उपस्थित सभी अतिथियों, वक्ताओं एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
यह संगोष्ठी राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के उद्देश्यों के अनुरूप भारतीय भाषाओं, अनुवाद परंपरा तथा भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण और प्रसार की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सिद्ध हुई।
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