विद्यासागर विश्वविद्यालय का 23वाँ दीक्षांत समारोह संपन्न

विद्यासागर विश्वविद्यालय के 23वें दीक्षांत समारोह में 89,158 विद्यार्थियों को उपाधियाँ प्रदान की गईं। राज्यपाल आर.एन. रवि ने शिक्षा, नवाचार, शोध और राष्ट्र निर्माण में विश्वविद्यालयों की भूमिका पर जोर दिया।

Jun 4, 2026 - 21:55
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विद्यासागर विश्वविद्यालय का 23वाँ दीक्षांत समारोह संपन्न
राज्यपाल आर.एन. रवि ने विद्यार्थियों को उपाधियाँ प्रदान कीं

89,158 विद्यार्थियों को उपाधियाँ, राज्यपाल आर.एन. रवि ने कहा- विश्वविद्यालय उच्च शिक्षा, नवाचार, शोध और नागरिक निर्माण के केंद्र हैं

मिदनापुर, 3 जून। ज्ञान, शोध, नवाचार और सामाजिक परिवर्तन के मूल्यों को समर्पित पश्चिम बंगाल के प्रतिष्ठित विद्यासागर विश्वविद्यालय ने बुधवार को अपना ऐतिहासिक 23वाँ दीक्षांत समारोह अत्यंत गरिमामय वातावरण में संपन्न किया। विश्वविद्यालय परिसर स्थित विवेकानंद सभागार में आयोजित यह समारोह केवल उपाधि वितरण का आयोजन नहीं था, बल्कि शिक्षा, सामाजिक समावेशन, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और राष्ट्र निर्माण के प्रति विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता का जीवंत उत्सव भी था। इस वर्ष का दीक्षांत समारोह कई मायनों में ऐतिहासिक रहा। विश्वविद्यालय ने शैक्षणिक सत्र 2023, 2024 और 2025 के कुल 89,158 विद्यार्थियों को विभिन्न डिग्रियाँ एवं उपाधियाँ प्रदान कर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया। इनमें बड़ी संख्या ऐसे विद्यार्थियों की थी जो जंगलमहल, पश्चिम मेदिनीपुर, झाड़ग्राम, पुरुलिया, बांकुड़ा तथा राज्य के अन्य ग्रामीण, आदिवासी और आर्थिक रूप से वंचित क्षेत्रों से आते हैं। यह उपलब्धि इस तथ्य को रेखांकित करती है कि विद्यासागर विश्वविद्यालय केवल एक शैक्षणिक संस्थान नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन और अवसरों की समानता का सशक्त माध्यम बन चुका है।

शिक्षा के लोकतंत्रीकरण का सशक्त उदाहरण

भारत में उच्च शिक्षा की पहुँच को लेकर लंबे समय से चिंताएँ व्यक्त की जाती रही हैं। ऐसे समय में 89 हजार से अधिक विद्यार्थियों को उपाधियाँ प्रदान करने वाला यह समारोह इस बात का प्रमाण है कि उच्च शिक्षा अब केवल महानगरों या संपन्न वर्गों तक सीमित नहीं रह गई है। विश्वविद्यालय ने दूरस्थ और हाशिए पर रहने वाले समुदायों तक शिक्षा पहुँचाकर सामाजिक न्याय के उस स्वप्न को साकार करने का प्रयास किया है, जिसकी कल्पना स्वयं पंडित ईश्वरचंद्र विद्यासागर ने की थी। दीक्षांत समारोह में कुल 193 स्नातक स्वर्ण पदक विजेता, 181 स्नातकोत्तर पदक विजेता, 41 अनुदान पदक प्राप्तकर्ता, 41 छात्रवृत्ति एवं पुरस्कार प्राप्तकर्ता तथा एक राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) पुरस्कार विजेता को सम्मानित किया गया। इसके अतिरिक्त विश्वविद्यालय के दो प्रतिष्ठित शिक्षकों को शोध उत्कृष्टता पुरस्कार प्रदान किए गए।

शैक्षणिक गरिमा के साथ हुआ समारोह का शुभारंभ

कार्यक्रम का प्रारंभ विश्वविद्यालय ध्वजारोहण से हुआ। इसके बाद पश्चिम बंगाल के राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय के कुलाधिपति आर.एन. रवि, कुलपति प्रो. दीपक कुमार कर तथा विश्वविद्यालय के वरिष्ठ शिक्षाविदों ने शैक्षणिक जुलूस के साथ सभागार में प्रवेश किया। रवीन्द्रनाथ ठाकुर के प्रसिद्ध गीत "विश्वविद्या तीर्थप्रांगन कोरो महाज्ज्वल" की स्वर लहरियों के बीच जब कुलाधिपति सभागार में पहुँचे तो उपस्थित विद्यार्थियों, अभिभावकों और शिक्षकों ने खड़े होकर उनका स्वागत किया। दीक्षांत परिधान में सुसज्जित शिक्षकों और शोधार्थियों की उपस्थिति ने समारोह को पारंपरिक विश्वविद्यालयीय गरिमा प्रदान की। राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ और राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के सामूहिक गायन के साथ समारोह का औपचारिक शुभारंभ हुआ।

कुलपति ने रखी विश्वविद्यालय की उपलब्धियों की रूपरेखा

अपने स्वागत भाषण में कुलपति प्रो. दीपक कुमार कर ने विश्वविद्यालय की उपलब्धियों, सामाजिक दायित्वों और भावी योजनाओं का विस्तार से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि विद्यासागर विश्वविद्यालय का लक्ष्य केवल डिग्री प्रदान करना नहीं है, बल्कि ऐसे नागरिक तैयार करना है जो समाज, राष्ट्र और मानवता के प्रति उत्तरदायी हों। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय ने अनुसंधान, नवाचार, सामुदायिक विस्तार कार्यक्रमों, महिला शिक्षा, आदिवासी अध्ययन, पर्यावरण संरक्षण तथा कौशल विकास के क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य किया है। विश्वविद्यालय आज स्थानीय आवश्यकताओं और वैश्विक चुनौतियों के बीच एक सेतु की भूमिका निभा रहा है। कुलपति ने विशेष रूप से इस बात पर बल दिया कि विश्वविद्यालय सामाजिक रूप से पिछड़े और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।

प्रो. अनुपम बसु का प्रेरक दीक्षांत भाषण

समारोह के मुख्य वक्ता, शिक्षाविद और वैज्ञानिक प्रो. अनुपम बसु ने अपने संबोधन में विद्यार्थियों को जीवन के व्यापक उद्देश्यों के प्रति सजग रहने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि विद्यासागर विश्वविद्यालय का नाम ऐसे महापुरुष के नाम पर रखा गया है जिन्होंने भारतीय समाज में शिक्षा, सामाजिक न्याय और महिला अधिकारों के लिए आजीवन संघर्ष किया। उन्होंने कहा कि आज के विद्यार्थियों के पास आधुनिक तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और वैश्विक अवसर उपलब्ध हैं, लेकिन उन्हें ईश्वरचंद्र विद्यासागर, रवीन्द्रनाथ ठाकुर और स्वामी विवेकानंद जैसे महापुरुषों की मानवीय संवेदनाओं को भी अपने जीवन में आत्मसात करना होगा। उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे केवल सफल पेशेवर ही नहीं, बल्कि संवेदनशील और नैतिक नागरिक भी बनें।

मानद उपाधियों से सम्मानित हुईं विशिष्ट विभूतियाँ

दीक्षांत समारोह का सबसे गौरवपूर्ण क्षण वह था जब देश और विश्व की प्रतिष्ठित हस्तियों को मानद उपाधियों से सम्मानित किया गया। पूर्व इसरो अध्यक्ष डॉ. एस. सोमनाथ को उनके वैज्ञानिक नेतृत्व, अंतरिक्ष अनुसंधान में योगदान और भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाने के लिए मानद डी.एससी. प्रदान की गई। प्रख्यात खगोल वैज्ञानिक एवं विज्ञान संचारक डॉ. देबीप्रसाद दुआरी को भी विज्ञान लोकप्रियकरण और शोध में योगदान के लिए मानद डी.एससी. की उपाधि दी गई। वहीं अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त साहित्यकार, कवयित्री और शिक्षाविद डॉ. बशाबी फ्रेजर को साहित्य एवं रचनात्मक लेखन के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए मानद डी.लिट. से सम्मानित किया गया। इन घोषणाओं के साथ पूरा सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।

राज्यपाल का प्रेरक संबोधन : "बड़े सपने देखिए, भारत को विकसित राष्ट्र बनाइए"

समारोह के अध्यक्ष एवं विश्वविद्यालय के कुलाधिपति राज्यपाल आर.एन. रवि का संबोधन पूरे कार्यक्रम का केंद्रबिंदु रहा। उन्होंने कहा कि बंगाल भारत के पुनर्जागरण की जन्मस्थली रहा है और पंडित ईश्वरचंद्र विद्यासागर इस पुनर्जागरण के सबसे उज्ज्वल नायकों में से एक थे। उन्होंने शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन का सबसे प्रभावी माध्यम बनाया और महिलाओं के अधिकारों के लिए अभूतपूर्व संघर्ष किया।

राज्यपाल ने कहा कि आज के विद्यार्थियों के लिए यह आवश्यक है कि वे विद्यासागर के जीवन और विचारों का गंभीर अध्ययन करें। उन्होंने कहा-"जीवन में कुछ बड़ा करने के लिए केवल योग्यता पर्याप्त नहीं होती, बल्कि बड़े सपने देखने का साहस भी होना चाहिए।" उन्होंने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि वे केवल विश्वविद्यालय परिवार का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि भारत के जिम्मेदार नागरिक भी हैं। राष्ट्र की उन्नति तभी संभव है जब नागरिक अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से निर्वहन करें। उन्होंने भारत के वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य का उल्लेख करते हुए कहा कि इस लक्ष्य को प्राप्त करने में विश्वविद्यालयों और युवाओं की निर्णायक भूमिका होगी।

शोध उत्कृष्टता का सम्मान

समारोह के दौरान शोध एवं नवाचार के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले दो वरिष्ठ शिक्षकों को विशेष सम्मान प्रदान किया गया। अर्थशास्त्र विभाग के प्रोफेसर रमेश चंद्र दास को प्रतिष्ठित विवेकानंद मेमोरियल रिसर्च अवार्ड तथा सूक्ष्म जीव विज्ञान विभाग के प्रोफेसर केशव चंद्र मंडल को विद्यासागर मेमोरियल रिसर्च अवार्ड प्रदान किया गया। इन दोनों विद्वानों के सम्मान ने विश्वविद्यालय की उस शोध परंपरा को रेखांकित किया जिसके आधार पर वह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान मजबूत कर रहा है।

अनेक कुलपति, शिक्षाविद और प्रशासनिक अधिकारी रहे उपस्थित

दीक्षांत समारोह में पश्चिम बंगाल और देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपति, शिक्षाविद, प्रशासनिक अधिकारी तथा जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। उपस्थित प्रमुख गणमान्य व्यक्तियों में विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. मनोरंजन माइती और प्रो. सुशांत कुमार चक्रवर्ती, रानी रासमणि ग्रीन यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. अमिय कुमार पांडा, साधु रामचंद मुर्मू विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. चंद्रदीपा घोष, कलकत्ता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आशुतोष घोष, पश्चिम बंगाल राज्य विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अयान भट्टाचार्य, डायमंड हार्बर महिला विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. मीता बनर्जी, बाबा साहेब अम्बेडकर शिक्षा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अरुणाशीष गोस्वामी, महात्मा गांधी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सौरांग्शु मुखर्जी तथा अलीया विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रफीकुल इस्लाम प्रमुख थे। मिदनापुर के विधायक डॉ. शंकर कुमार गुछैत, जिला पुलिस अधीक्षक पापिया सुल्ताना, पश्चिम बंगाल उच्च माध्यमिक शिक्षा परिषद के अध्यक्ष डॉ. पार्थ कर्मकार तथा उच्च शिक्षा विभाग की वरिष्ठ विशेष सचिव चांदनी टुडू की उपस्थिति ने समारोह की गरिमा को और बढ़ाया।

शिक्षा, शोध और सामाजिक प्रतिबद्धता का उत्सव

कार्यक्रम के अंत में कुलपति प्रो. दीपक कुमार कर ने सभी अतिथियों, शिक्षकों, विद्यार्थियों, अभिभावकों, कर्मचारियों, मीडिया प्रतिनिधियों और सहयोगी संस्थाओं के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि 23वाँ दीक्षांत समारोह केवल डिग्रियों का वितरण नहीं, बल्कि ज्ञान, शोध, सामाजिक न्याय, समावेशी विकास और राष्ट्र निर्माण के प्रति विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता का सार्वजनिक उत्सव है। राष्ट्रीय गीत और राष्ट्रगान के सामूहिक गायन के साथ समारोह का समापन हुआ। जब हजारों विद्यार्थियों के चेहरों पर भविष्य के सपनों की चमक दिखाई दे रही थी, तब यह स्पष्ट था कि विद्यासागर विश्वविद्यालय केवल उपाधियाँ नहीं बाँट रहा, बल्कि एक ऐसे भारत के निर्माण में योगदान दे रहा है जो ज्ञान, समानता और मानवीय मूल्यों पर आधारित होगा। यह 23वाँ दीक्षांत समारोह शिक्षा की शक्ति, सामाजिक समावेशन की आवश्यकता और युवा ऊर्जा की संभावनाओं का ऐसा प्रेरक दस्तावेज बन गया, जिसे विश्वविद्यालय के इतिहास में लंबे समय तक याद रखा जाएगा।

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सुशील कुमार पाण्डेय मैं, अपने देश का एक जिम्मेदार नागरिक बनने की यात्रा पर हूँ, यही मेरी पहचान है I