विद्यासागर विश्वविद्यालय में ‘पराश’ और CDRS यूनिट का उद्घाटन
विद्यासागर विश्वविद्यालय ने समावेशी एवं डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देते हुए ‘पराश’ और CDRS यूनिट का उद्घाटन किया। दृष्टिबाधित छात्रों और शोधार्थियों को आधुनिक डिजिटल सुविधाएँ मिलेंगी।
दृष्टिबाधित छात्रों के लिए आधुनिक सहायक तकनीक और शोधार्थियों हेतु वैश्विक डिजिटल संसाधनों की सुविधा उपलब्ध
मिदनापुर, 17 जुलाई। उच्च शिक्षा को आधुनिक तकनीक और समावेशी शिक्षा से जोड़ने की दिशा में विद्यासागर विश्वविद्यालय ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। विश्वविद्यालय की सेंट्रल लाइब्रेरी में शुक्रवार को दो नई अत्याधुनिक इकाइयों ‘पराश’ (PARASH) तथा ‘सेंटर फॉर डिजिटल रिसोर्सेज एंड सर्विसेज़ (सीडीआरएस)’ का विधिवत उद्घाटन कुलपति प्रो. दीपक कुमार कर ने किया।
विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, ‘पराश’ यूनिट विशेष रूप से दृष्टिबाधित एवं कम दृष्टि वाले विद्यार्थियों की शैक्षणिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर विकसित की गई है। इस इकाई में रिफ्रेशेबल ब्रेल डिस्प्ले, पर्ल स्कैनर-रीडर, स्क्रीन रीडर तथा स्क्रीन मैग्निफायर जैसी अत्याधुनिक सहायक तकनीकों की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। इन उपकरणों की सहायता से छात्र किसी भी मुद्रित पुस्तक या दस्तावेज़ को तुरंत डिजिटल स्वरूप में परिवर्तित कर उसे सुन सकते हैं। साथ ही ऑनलाइन सामग्री को स्वतः पढ़ने और स्क्रीन पर बड़े अक्षरों में देखने की सुविधा भी प्राप्त होगी।
विश्वविद्यालय का मानना है कि इस पहल से विशेष आवश्यकता वाले विद्यार्थी अधिक आत्मनिर्भर होकर अध्ययन, शोध एवं अकादमिक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी कर सकेंगे।
सीडीआरएस के माध्यम से शोधगंगा, ओएनओएस (One Nation One Subscription), डेलनेट (DELNET), एनडीएलआई (National Digital Library of India), ई-पीजी पाठशाला सहित अनेक प्रतिष्ठित डिजिटल शैक्षणिक प्लेटफॉर्म तक सहज पहुँच उपलब्ध होगी। इसके अतिरिक्त विश्वविद्यालय की इंस्टीट्यूशनल रिपॉजिटरी तथा किंडल अनलिमिटेड जैसी डिजिटल सेवाओं का भी लाभ विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं को मिलेगा।
उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए कुलपति प्रो. दीपक कुमार कर ने कहा कि "विद्यासागर विश्वविद्यालय सदैव समावेशी एवं डिजिटल शिक्षा को प्रोत्साहित करने के लिए प्रतिबद्ध रहा है। 'पराश' और 'सीडीआरएस' इस दिशा में हमारी महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ हैं। मुझे विश्वास है कि ये दोनों इकाइयाँ विद्यार्थियों, शोधार्थियों और शिक्षकों के लिए अध्ययन, शोध तथा ज्ञान संसाधनों तक पहुँच को अधिक सरल, प्रभावी और सुलभ बनाएँगी।"
कार्यक्रम में विज्ञान संकाय के डीन, कुलसचिव, आईक्यूएसी के निदेशक, वित्त अधिकारी, विभिन्न विभागों के प्राध्यापक, केंद्रीय पुस्तकालय के कर्मचारी तथा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे। विश्वविद्यालय की यह पहल डिजिटल शिक्षा, समावेशी अधिगम और शोध संस्कृति को नई गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।
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