पश्चिम बंगाल मंत्रिमंडल में बड़ा फेरबदल: 10 जून 2026 की अधिसूचना से विभागों का पुनर्वितरण
पश्चिम बंगाल सरकार ने 10 जून 2026 को मंत्रिपरिषद में बड़ा फेरबदल किया। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी को गृह, भूमि सुधार, ऊर्जा और कार्मिक विभाग सहित कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ सौंपी गईं।
पश्चिम बंगाल सरकार के गृह एवं पर्वतीय मामलों के विभाग द्वारा 10 जून 2026 को जारी अधिसूचना के अनुसार राज्य मंत्रिपरिषद में व्यापक विभागीय पुनर्गठन किया गया है। नई व्यवस्था में मुख्यमंत्री एवं मंत्री-प्रभारी के रूप में शुभेंदु अधिकारी को गृह एवं पर्वतीय मामले, भूमि एवं भूमि सुधार, ऊर्जा, कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार, सांस्कृतिक मामले तथा अन्य महत्वपूर्ण विभाग सौंपे गए हैं। इसके अतिरिक्त कैबिनेट मंत्रियों, स्वतंत्र प्रभार वाले राज्य मंत्रियों तथा राज्य मंत्रियों के बीच विभिन्न विभागों का पुनर्वितरण किया गया है। यह पुनर्गठन प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने और शासन व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से किया गया बताया जा रहा है।
पश्चिम बंगाल सरकार ने किया मंत्रिपरिषद का पुनर्गठन
पश्चिम बंगाल सरकार ने 10 जून 2026 को एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक अधिसूचना जारी करते हुए राज्य मंत्रिपरिषद में विभागों का व्यापक पुनः आवंटन किया है। गृह एवं पर्वतीय मामले विभाग की ओर से जारी इस अधिसूचना के माध्यम से पूर्व की अधिसूचना को निरस्त करते हुए मंत्रियों के बीच विभागों का नया बंटवारा किया गया है। राज्यपाल की स्वीकृति से जारी इस आदेश में मुख्यमंत्री सहित कैबिनेट मंत्रियों, स्वतंत्र प्रभार वाले राज्य मंत्रियों और राज्य मंत्रियों को नई जिम्मेदारियाँ सौंपी गई हैं। यह कदम प्रशासनिक कार्यों के बेहतर समन्वय तथा नीति क्रियान्वयन को गति देने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के पास सबसे महत्वपूर्ण विभाग
नई अधिसूचना के अनुसार मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी को राज्य के कई प्रमुख विभागों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इनमें गृह एवं पर्वतीय मामले विभाग, भूमि एवं भूमि सुधार विभाग, शरणार्थी राहत एवं पुनर्वास विभाग, ऊर्जा विभाग, कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग तथा सांस्कृतिक मामले विभाग शामिल हैं। इसके अतिरिक्त अन्य ऐसे विभाग जो किसी मंत्री को आवंटित नहीं किए गए हैं, वे भी मुख्यमंत्री के अधीन रहेंगे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि गृह, भूमि और ऊर्जा जैसे विभागों का मुख्यमंत्री के पास रहना सरकार की प्राथमिकताओं और प्रशासनिक नियंत्रण की दिशा को दर्शाता है।
प्रमुख कैबिनेट मंत्रियों को मिली नई जिम्मेदारियाँ
नवीन विभागीय आवंटन के अनुसार:
- निशीथ प्रामाणिक को उत्तर बंगाल विकास एवं जल संसाधन जांच एवं विकास विभाग।
- अशोक किर्तानिया को खाद्य एवं आपूर्ति तथा सहकारिता विभाग।
- दिलीप घोष को पंचायत एवं ग्रामीण विकास तथा कृषि विपणन विभाग।
- क्षुदिराम टुडू को जनजातीय विकास, अल्पसंख्यक मामले एवं मदरसा शिक्षा विभाग।
- अग्निमित्रा पॉल को शहरी विकास एवं नगर प्रशासन विभाग।
- दीपक बर्मन को विद्यालय शिक्षा, आवास तथा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम एवं वस्त्र विभाग।
- तपस राय को उद्योग, वाणिज्य एवं उद्यम, सार्वजनिक उपक्रम तथा गैर-पारंपरिक एवं नवीकरणीय ऊर्जा विभाग की जिम्मेदारी दी गई है।
स्वास्थ्य, वित्त और तकनीकी शिक्षा विभागों में भी बदलाव
अधिसूचना के अनुसार, स्वपन दासगुप्ता को वित्त विभाग। जगन्नाथ चट्टोपाध्याय को उच्च शिक्षा एवं तकनीकी शिक्षा, प्रशिक्षण एवं कौशल विकास विभाग। डॉ. कल्याण चक्रवर्ती को सूचना प्रौद्योगिकी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, जैव प्रौद्योगिकी तथा खाद्य प्रसंस्करण एवं बागवानी विभाग। डॉ. शरदावत मुखर्जी को स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग। डॉ. अजय कुमार पोद्दार को लोक स्वास्थ्य अभियांत्रिकी एवं लोक निर्माण विभाग सौंपा गया है।
स्वतंत्र प्रभार वाले राज्य मंत्रियों को भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ
सरकार ने तीन मंत्रियों को स्वतंत्र प्रभार प्रदान किया है- मालती रावा राय को महिला एवं बाल विकास एवं समाज कल्याण, स्वयं सहायता समूह एवं स्वरोजगार तथा कार्यक्रम निगरानी विभाग। राजेश महाता को पशु संसाधन विकास एवं मत्स्य विभाग। डॉ. इंद्रनील खान को युवा कल्याण एवं खेल तथा उपभोक्ता मामले विभाग।
राज्य मंत्रियों को विभागीय सहयोग की भूमिका
राज्य मंत्रियों को विभिन्न विभागों में सहयोगात्मक जिम्मेदारियाँ दी गई हैं। इनमें शिक्षा, कृषि, उद्योग, परिवहन, पर्यटन, न्याय, स्वास्थ्य, आवास, ऊर्जा, वन, पर्यावरण और सुंदरबन मामलों जैसे विभाग शामिल हैं। इससे विभागीय कार्यों के विकेंद्रीकरण और प्रशासनिक दक्षता बढ़ने की उम्मीद व्यक्त की जा रही है।
प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण कदम
विशेषज्ञों का मानना है कि विभागों का यह पुनर्गठन राज्य सरकार की नई प्रशासनिक रणनीति का संकेत है। मुख्यमंत्री के पास प्रमुख नियंत्रणकारी विभागों का रहना, जबकि अन्य मंत्रियों को विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और उद्योग जैसे क्षेत्रों की जिम्मेदारी देना शासन में स्पष्ट जवाबदेही स्थापित करने का प्रयास माना जा रहा है।
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