मुक्तांचल का 49वां अंक लोकार्पित, स्वर्णिम 50वें अंक पर हुआ गंभीर विमर्श
हावड़ा में मुक्तांचल पत्रिका के 49वें अंक का लोकार्पण और स्वर्णिम 50वें अंक ‘कलकत्ता से कोलकाता’ पर गंभीर साहित्यिक संगोष्ठी आयोजित हुई, जिसमें प्रमुख साहित्यकारों ने भाग लिया।
मुक्तांचल का 49वां अंक लोकार्पित, स्वर्णिम 50वें अंक पर हुआ गंभीर विमर्श
हावड़ा, 26 मार्च 2026। प्रतिष्ठित साहित्यिक पत्रिका ‘मुक्तांचल’ के जनवरी-मार्च 2026 (अंक 49) का लोकार्पण एवं विमोचन हावड़ा में विद्यार्थी मंच के तत्वावधान में संपन्न हुआ। इस अवसर पर प्रस्तावित स्वर्णिम 50वें अंक ‘कलकत्ता से कोलकाता’ विषय पर एक गंभीर साहित्यिक विचार-विमर्श हुआ। कार्यक्रम केवल औपचारिक लोकार्पण तक सीमित न रहकर समकालीन साहित्य, समाज और संस्कृति पर गहन वैचारिक विमर्श का मंच बन गया।
पत्रिका की सामग्री पर गहन समीक्षा
कार्यक्रम में डॉ. शुभ्रा उपाध्याय और डॉ. गीता दूबे ने पत्रिका के नवीन अंक की विस्तृत समीक्षा प्रस्तुत की। डॉ. शुभ्रा उपाध्याय ने पत्रिका के कवर पृष्ठ को वैश्विक तनाव और शांति की आकांक्षा के बीच संतुलन का प्रतीक बताया। उन्होंने संपादकीय को विचार-गंभीरता का उत्कृष्ट उदाहरण कहा तथा कहानी ‘पीटीएम’ और समकालीन कविताओं की संवेदनशील अभिव्यक्ति की सराहना की।
डॉ. गीता दूबे ने पत्रिका के विविध आलेखों को बहुआयामी और समृद्ध बताते हुए ‘हिंदी लेखन की दार्शनिकता: अपोह और पंचकोष मॉडल आधारित परा-चिंतन’ लेख को विशेष रूप से उल्लेखनीय बताया। उन्होंने कहा कि यह लेख हिंदी लेखन को भारतीय दार्शनिक परंपरा में स्थापित करता है। साथ ही, वैश्विक साहित्य के अंतर्गत अगाथा क्रिस्टी पर प्रकाशित आलेख को दृष्टि-विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास बताया।
‘कलकत्ता से कोलकाता’ पर विचार-विमर्श
स्वर्णिम 50वें अंक के विषय ‘कलकत्ता से कोलकाता’ पर डॉ. पंकज साहा, महेश जायसवाल, डॉ. अमित राय, डॉ. चित्रा माली और डॉ. प्रकाश कुमार अग्रवाल सहित वक्ताओं ने अपने विचार रखे। वक्ताओं ने कहा कि यह परिवर्तन केवल नाम का नहीं, बल्कि शहर की स्मृति, संस्कृति और पहचान से जुड़ा गहरा विमर्श है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि साहित्य किसी भी शहर की बहुआयामी छवि प्रस्तुत करता है, जिसमें उसके उजले और धूसर दोनों पक्षों का संतुलित चित्रण आवश्यक है।
साहित्य बना संवाद का मंच
वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि मुक्तांचल केवल पत्रिका नहीं, बल्कि संवाद का सार्वजनिक मंच है, जो समाज को वैचारिक दिशा देता है। इसकी निरंतरता, निष्पक्षता और गुणवत्ता इसे विशिष्ट बनाती है।
संपादकीय दृष्टि और अध्यक्षीय उद्बोधन
पत्रिका की संपादक डॉ. मीरा सिन्हा ने स्वर्णिम 50वें अंक को ऐतिहासिक और वैचारिक दस्तावेज बनाने की प्रतिबद्धता व्यक्त की तथा सभी रचनाकारों से लेखकीय सहयोग की अपील की। कार्यक्रम की अध्यक्ष डॉ. मंजु रानी सिंह ने पत्रिका के लेखों को महत्वपूर्ण बताते हुए नरेश सक्सेना की कविताओं का सस्वर पाठ किया और सभी वक्ताओं के विचारों का समालोचनात्मक सार प्रस्तुत किया।
काव्य पाठ और सहभागिता
प्रसिद्ध संगीतज्ञ डॉ. अजय राय ने एक साहित्यिक गीत प्रस्तुत कर कार्यक्रम में एक विशेष भावात्मक आयाम जोड़ा। साथ ही कवि शैलेन्द्र शांत, आशुतोष सिंह, सरिता खोवाला और सुशील कुमार पांडेय ने काव्य पाठ कर श्रोताओं को आनंदित किया। संचालन परमजीत कुमार पंडित ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन विनोद यादव ने प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम में परिधि गुप्ता, मीनाक्षी सांगानेरिया, दिव्या प्रसाद, नगिना लाल दास सहित अनेक अध्यापक, प्राध्यापक एवं शोधार्थियों की सक्रिय उपस्थिति रही।
समापन में वक्ताओं ने कहा कि मुक्तांचल समकालीन साहित्यिक चेतना का सशक्त मंच बनकर उभरा और स्वर्णिम 50वें अंक ‘कलकत्ता से कोलकाता’ को एक महत्वपूर्ण साहित्यिक दस्तावेज के रूप में स्थापित करने की दिशा में सार्थक पहल होगा।
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