पश्चिम बंगाल सरकार ने गठित की राज्य स्तरीय सिलेबस एवं पाठ्यक्रम समीक्षा समिति, एनईपी-2020 के अनुरूप होगा व्यापक बदलाव
पश्चिम बंगाल सरकार ने एनईपी-2020 के अनुरूप स्कूली शिक्षा में सुधार के लिए राज्य स्तरीय सिलेबस एवं करिकुलम समिति का गठन किया। समिति पाठ्यक्रम, मूल्यांकन और शिक्षण प्रणाली की व्यापक समीक्षा करेगी।
कोलकाता, 24 जुलाई। पश्चिम बंगाल सरकार के स्कूल शिक्षा विभाग ने राज्य के प्राथमिक, माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक स्तर के पाठ्यक्रम, सिलेबस और पाठ्यपुस्तकों की व्यापक समीक्षा के लिए राज्य स्तरीय ‘सिलेबस-कम-करिकुलम कमेटी’ के गठन की अधिसूचना जारी की है। यह समिति राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020), राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (NCF-FS 2022 एवं NCF-SE 2023) तथा आधुनिक शिक्षण पद्धतियों के अनुरूप शिक्षा व्यवस्था में आवश्यक सुधारों के सुझाव देगी।
स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा 24 जुलाई 2026 को जारी अधिसूचना के अनुसार समिति राज्य के प्राथमिक, माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्तर के संपूर्ण पाठ्यक्रम, सिलेबस एवं पाठ्यपुस्तकों का परीक्षण करेगी तथा उन्हें समकालीन शैक्षणिक आवश्यकताओं के अनुरूप बनाने की दिशा में अपनी अनुशंसाएँ प्रस्तुत करेगी।
समिति की अध्यक्षता प्रो. डॉ. देबाशीष चटर्जी, प्रोफेसर (रसायन विज्ञान), कल्याणी विश्वविद्यालय करेंगे। प्रशासनिक अधिकारी एवं संयुक्त निदेशक (स्कूल शिक्षा) अरिंदम बनर्जी को सदस्य सचिव तथा अनिंद्य कुमार चट्टोपाध्याय को सहायक सदस्य सचिव बनाया गया है। समिति में विश्वविद्यालयों के शिक्षाविदों, महाविद्यालयों के प्राचार्यों, विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों एवं विषय विशेषज्ञ शिक्षकों को शामिल किया गया है। इसमें गणित, भौतिकी, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान, बंगाली, अंग्रेजी, इतिहास, भूगोल, कार्य शिक्षा तथा शारीरिक शिक्षा सहित विभिन्न विषयों के विशेषज्ञों को स्थान दिया गया है।
अधिसूचना के अनुसार समिति केवल पाठ्यक्रम की समीक्षा तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि परीक्षा प्रणाली, मूल्यांकन प्रक्रिया, रटंत शिक्षा की प्रवृत्ति, निजी ट्यूशन पर निर्भरता, कक्षा-कक्ष में शिक्षण पद्धति, शिक्षकों के प्रशिक्षण तथा वैज्ञानिक एवं अनुसंधान आधारित शिक्षण को बढ़ावा देने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी सुझाव देगी। समिति का उद्देश्य विद्यार्थियों में जिज्ञासा, वैज्ञानिक दृष्टिकोण, आलोचनात्मक चिंतन तथा समग्र व्यक्तित्व विकास को प्रोत्साहित करना है।
सरकार ने समिति को निर्देश दिया है कि वह अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट दो माह के भीतर तथा अंतिम रिपोर्ट तीन माह के भीतर प्रस्तुत करे। रिपोर्ट तैयार करते समय विभिन्न हितधारकों से प्राप्त सुझावों एवं प्रतिक्रियाओं को भी शामिल किया जाएगा। समिति का सचिवालय पश्चिम बंगाल माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के कार्यालय में कार्य करेगा।
शिक्षा जगत के जानकारों का मानना है कि यह पहल राज्य की स्कूली शिक्षा को राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप अधिक आधुनिक, छात्र-केंद्रित और कौशल आधारित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।
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