तारा देवी हरखचंद कांकरिया जैन कॉलेज में ‘21वीं शताब्दी का सिनेमा’ पर संगोष्ठी

कोलकाता के तारा देवी हरखचंद कांकरिया जैन कॉलेज में हिंदी विभाग द्वारा ‘21वीं शताब्दी का सिनेमा’ विषय पर संगोष्ठी आयोजित। डॉ. मधु सिंह ने आधुनिक सिनेमा, ओटीटी और सामाजिक प्रभावों पर व्याख्यान दिया।

Apr 25, 2026 - 21:01
Apr 25, 2026 - 22:33
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तारा देवी हरखचंद कांकरिया जैन कॉलेज में ‘21वीं शताब्दी का सिनेमा’ पर संगोष्ठी
विशिष्ट वक्तागण

तारा देवी हरखचंद कांकरिया जैन कॉलेज (कोलकाता) में ‘21वीं शताब्दी का सिनेमाविषय पर संगोष्ठी आयोजित, विद्यार्थियों ने समझे आधुनिक सिनेमा के नए आयाम

कोलकाता, 25 अप्रैल 2026 तारा देवी हरखचंद कांकरिया जैन कॉलेज (कोलकाता) के हिंदी विभाग द्वारा ‘21वीं शताब्दी का सिनेमा’ विषय पर एक प्रभावशाली एवं ज्ञानवर्धक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम विद्यार्थियों को समकालीन सिनेमा की प्रवृत्तियों, सामाजिक प्रभावों तथा बदलते सांस्कृतिक परिदृश्य से परिचित कराने के उद्देश्य से आयोजित किया गया था। कार्यक्रम का शुभारंभ औपचारिक स्वागत के साथ हुआ, जिसमें उपस्थित अतिथियों, प्राध्यापकों और छात्र-छात्राओं का अभिनंदन किया गया।

संगोष्ठी की मुख्य वक्ता डॉ. मधु सिंह ने अपने व्याख्यान में 21वीं शताब्दी के सिनेमा के विविध आयामों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आज का सिनेमा केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं है, बल्कि वह सामाजिक चेतना, सांस्कृतिक संवाद और वैचारिक अभिव्यक्ति का एक प्रभावशाली माध्यम बन चुका है। उन्होंने बताया कि आधुनिक फिल्मों में तकनीकी नवाचार, बेहतर दृश्य प्रस्तुति, वैश्विक विषय-वस्तु और नई कथाशैली ने दर्शकों के अनुभव को पूरी तरह बदल दिया है।

उन्होंने उदाहरणों सहित स्पष्ट किया कि किस प्रकार सिनेमा समाज की वास्तविकताओं, संघर्षों, लैंगिक प्रश्नों, वर्गीय असमानताओं और सांस्कृतिक विविधताओं को सामने लाता है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि नई पीढ़ी के फिल्मकार प्रयोगधर्मी विषयों पर काम कर रहे हैं, जिससे भारतीय सिनेमा का दायरा लगातार विस्तृत हो रहा है।

डॉ. मधु सिंह ने ओटीटी प्लेटफॉर्म्स के बढ़ते प्रभाव पर भी विशेष चर्चा की। उन्होंने कहा कि डिजिटल माध्यमों ने दर्शकों को वैकल्पिक और विविधतापूर्ण सामग्री उपलब्ध कराई है, जिससे क्षेत्रीय भाषाओं, स्वतंत्र सिनेमा और नए रचनाकारों को भी मंच मिला है। उन्होंने विद्यार्थियों को सिनेमा को केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि समाज को समझने के माध्यम के रूप में देखने की प्रेरणा दी।

कार्यक्रम का सबसे रोचक चरण प्रश्नोत्तर सत्र रहा, जिसमें छात्र-छात्राओं ने समकालीन फिल्मों, सेंसरशिप, वेब सीरीज़, फिल्म निर्माण और सामाजिक प्रभावों से जुड़े अनेक प्रश्न पूछे। मुख्य वक्ता ने सरल, तार्किक और संतुलित उत्तर देकर विद्यार्थियों की जिज्ञासाओं का समाधान किया। इस संवादात्मक सत्र ने कार्यक्रम को और अधिक जीवंत तथा प्रभावी बना दिया।

इस अवसर पर विभाग की शिक्षिकाएँ डॉ. नेहा चतुर्वेदी, प्रो. दिव्या प्रसाद तथा प्रो. स्वाति शर्मा की गरिमामयी उपस्थिति रही। छात्र-छात्राओं में अलीशा, अनिस्का, अंजलि, अंशु, अरित्रो, गौरव यादव, कुसुम, नीरज, रचना, सहाना, सादिया, साक्षी, सरिका एवं शाइस्ता सहित अनेक विद्यार्थियों ने सक्रिय सहभागिता निभाई।

कार्यक्रम के अंत में विभागाध्यक्ष डॉ. ब्रिजेश सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। उन्होंने मुख्य वक्ता, सभी शिक्षकगण एवं विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया। साथ ही कॉलेज की प्रधानाचार्या डॉ. मौसमी सिंह सेनगुप्ता  के मार्गदर्शन और सहयोग के लिए विशेष धन्यवाद ज्ञापित किया।

यह संगोष्ठी विद्यार्थियों के लिए ज्ञानवर्धन, समकालीन समझ और सृजनात्मक प्रेरणा का सफल मंच सिद्ध हुई।

 

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