बतरस के पहले दिन ‘साक्षी हैं शब्द’ और सांस्कृतिक संध्या का आयोजन
रायबरेली में बतरस के पहले दिन ‘साक्षी हैं शब्द’ के तहत वरिष्ठ कवियों का रचना-पाठ, कविता-समीक्षा, सांस्कृतिक संध्या और अनौपचारिक बतकही आयोजित हुई। हंसराज संपादित बतरस पत्रिका का लोकार्पण भी हुआ।
मनुष्यता और प्रतिरोध का आख्यान रचती हैं कविताएँ; वरिष्ठ कवियों ने किया रचना-पाठ, समीक्षकों ने प्रस्तुत किया काव्य-विश्लेषण
रायबरेली, 23 अक्तूबर। प्रतिष्ठित साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था ‘बतरस’ की ओर से प्रज्ञा भवन, रायबरेली में आयोजित कार्यक्रम के पहले दिन ‘साक्षी हैं शब्द’ के अंतर्गत रचना-पाठ, समीक्षा और परिचर्चा के साथ सांस्कृतिक संध्या एवं ‘अनौपचारिक बतरस’ का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में साहित्यकारों, कवियों, समीक्षकों और संस्कृतिकर्मियों ने कविता, विचार और संवाद के माध्यम से समकालीन समाज, मनुष्यता तथा प्रतिरोध के सवालों पर अपनी बात रखी।
कार्यक्रम में बैसवाड़े के वरिष्ठ कवि राम करन सिंह, अंजनी कुमार सिंह, उमेश पंकज और कवि-पत्रकार कौशल किशोर ने अपनी कविताओं का पाठ किया। इन कवियों की रचनाओं में प्रेम, प्रकृति, सामाजिक यथार्थ और प्रतिरोध के विविध स्वर सामने आए। कविताओं ने अपने समय के सच को केंद्र में रखते हुए जीवन से जुड़े अनेक सवालों को अभिव्यक्ति दी। रचना-पाठ के बाद समीक्षक ब्रजेश सिंह, आशीष मिश्रा, अजीत प्रियदर्शी और आशीष सिंह ने कविताओं का अर्थपूर्ण विश्लेषण प्रस्तुत किया।
स्वागत भाषण में डॉ. शालिनी शाहू ने देश के विभिन्न हिस्सों से आए रचनाकारों और प्रतिभागियों का स्वागत किया। संस्था का परिचय देते हुए राज कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि सात वर्ष पहले दस लोगों के विचार से बतरस की शुरुआत की योजना बनी थी। तब से संस्था की प्रतिष्ठा और स्वीकार्यता में निरंतर वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि बतरस मतभेद का स्वागत करती है, मनभेद का नहीं। यह विचार संस्था की संवादधर्मी और लोकतांत्रिक सांस्कृतिक दृष्टि को रेखांकित करता है।
कार्यक्रम के संयोजक शैलेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि शब्द भाव और विचार का वाहक है। उन्होंने कविता को शोषकों के विरूद्ध प्रतिरोध का माध्यम बताते हुए कहा कि कविता में तर्कशीलता और मनुष्यता का भाव होना चाहिए। कार्यक्रम में प्रस्तुत कविताओं और उन पर हुई चर्चा ने साहित्य की सामाजिक भूमिका तथा मानवीय संवेदनाओं के महत्व को रेखांकित किया।
‘अनौपचारिक बतरस’ के तहत आयोजित बतकही में संजय जायसवाल, असित कुमार पांडेय, अंकुश कुमार, कृति बरनवाल, मंटू दास, मधु प्रिया, पूजा गुप्ता और राज कुमार श्रीवास्तव ने हिस्सा लिया। विशिष्ट वक्ता के रूप में मृत्युंजय श्रीवास्तव ने कहा कि बतरस का मंच आपसी संवाद के साथ-साथ युवाओं और शिशुओं के लिए भी एक महत्वपूर्ण अवसर है। इस अवसर पर हंसराज के संपादन में प्रकाशित ‘बतरस’ पत्रिका का लोकार्पण किया गया।
कार्यक्रम को सफल बनाने में डॉ. कृष्ण कुमार श्रीवास्तव, शिवा शंकर श्रीवास्तव सहित संस्था के अनेक सदस्यों का विशेष सहयोग रहा। कार्यक्रम का संचालन दीप अमन ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन अभिषेक सिंह अंकुर ने प्रस्तुत किया। आयोजन में बड़ी संख्या में साहित्य और संस्कृति प्रेमी उपस्थित रहे।
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