गाजीपुर में 10वीं की छात्रा का सिपाही पर यौन शोषण और ब्लैकमेलिंग का आरोप, एसपी से लगाई न्याय की गुहार

गाजीपुर में कक्षा 10 की छात्रा ने गहमर थाने के सिपाही मोहित यादव पर यौन शोषण, निजी तस्वीरों से ब्लैकमेलिंग और धमकी देने के आरोप लगाए। एसपी ग्रामीण ने जाँच की पुष्टि की है। आरोपी ने आरोपों को निराधार बताया।

Oct 23, 2026 - 20:40
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गाजीपुर में 10वीं की छात्रा का सिपाही पर यौन शोषण और ब्लैकमेलिंग का आरोप, एसपी से लगाई न्याय की गुहार

शादी का झाँसा देने, निजी तस्वीरों से ब्लैकमेल करने और दूसरे लोगों के पास भेजने का दावा; शिकायत वापस लेने के लिए दबाव बनाने का भी आरोप, सिपाही ने कहा— फँसाने की कोशिश हो रही

गाजीपुर, 23 अक्तूबर 2026। उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले में कक्षा 10 की एक नाबालिग छात्रा ने गहमर थाने में तैनात एक सिपाही पर यौन शोषण, निजी तस्वीरों और वीडियो के जरिए ब्लैकमेल करने तथा दूसरे लोगों के साथ यौन संबंध बनाने के लिए दबाव डालने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। छात्रा ने वीडियो के माध्यम से पुलिस अधीक्षक से न्याय की गुहार लगाई है। उसने अपनी शिकायत में यह भी आरोप लगाया कि मामले का विरोध करने पर उसे धमकाया गया और शिकायत वापस लेने के लिए दबाव बनाया गया। दूसरी ओर, आरोपी सिपाही ने सभी आरोपों को गलत बताते हुए खुद को फँसाने की कोशिश किए जाने का दावा किया है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, मामले की जाँच की जा रही है।

ट्रेन में हुई मुलाकात से शुरू हुई बातचीत

मीडिया में प्रकाशित खबरों के अनुसार, छात्रा का कहना है कि करीब छह महीने पहले वह अपनी बुआ के साथ यात्रा कर रही थी। इसी दौरान लखनऊ से लौटते समय हावड़ा-अमृतसर एक्सप्रेस में उसकी मुलाकात एक युवक से हुई, जिसने खुद को गाजीपुर के गहमर थाने में तैनात पुलिसकर्मी बताया। छात्रा के मुताबिक, इस मुलाकात के बाद दोनों के बीच बातचीत शुरू हुई और धीरे-धीरे संपर्क बढ़ता गया। छात्रा ने आरोप लगाया कि सिपाही ने उससे शादी करने का भरोसा दिलाया और इसी विश्वास का फायदा उठाकर उसे होटल ले गया। वहां उसकी निजी तस्वीरें और वीडियो बनाए गए। छात्रा का दावा है कि बाद में इन्हीं तस्वीरों और वीडियो को सार्वजनिक करने की धमकी देकर उसे ब्लैकमेल किया जाने लगा। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी उपलब्ध नहीं है।

निजी तस्वीरों से ब्लैकमेल करने का आरोप

छात्रा के अनुसार, आरोपी ने कथित तौर पर निजी तस्वीरों और वीडियो को सोशल मीडिया पर प्रसारित करने की धमकी दी। उसका आरोप है कि इस सामग्री का इस्तेमाल उसे डराने और अपनी बात मनवाने के लिए किया गया। छात्रा ने यह भी दावा किया कि आरोपी ने उसे दूसरे लोगों के पास जाने और उनके साथ यौन संबंध बनाने के लिए दबाव डाला। यदि जाँच में ये आरोप प्रमाणित होते हैं, तो मामला केवल व्यक्तिगत संबंधों के विवाद तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि नाबालिग के कथित यौन शोषण, धमकी और डिजिटल सामग्री के दुरुपयोग से जुड़े गंभीर आपराधिक पहलुओं की जाँच भी आवश्यक होगी। इस मामले में कथित व्हाट्सऐप बातचीत और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की प्रामाणिकता, उनका पूरा संदर्भ तथा घटनाक्रम में अन्य लोगों की संभावित भूमिका जाँच के महत्वपूर्ण बिंदु हो सकते हैं।

शिकायत के बाद धमकी और दबाव का भी दावा

मीडिया रिपोर्टों में छात्रा के हवाले से बताया गया है कि उसने 5 अक्तूबर को पुलिस अधीक्षक कार्यालय में शिकायत दी थी। इसके बाद जमानिया के क्षेत्राधिकारी कार्यालय में उसका बयान दर्ज किए जाने की बात सामने आई है। छात्रा ने आरोप लगाया कि बयान दर्ज कराने के बाद लौटते समय आरोपी सिपाही और एक अन्य पुलिसकर्मी ने उसे, उसके पिता तथा बुआ को धमकाया। उसने यह भी दावा किया कि उस पर बयान बदलने का दबाव बनाया गया और एक कागज पर हस्ताक्षर कराए गए। कुछ प्रकाशित रिपोर्टों में परिवार के साथ समझौते का दबाव बनाने के आरोपों का भी उल्लेख है। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए यह स्पष्ट होना जरूरी है कि शिकायत मिलने के बाद किन अधिकारियों ने क्या कार्रवाई की, छात्रा के बयान किस परिस्थिति में दर्ज किए गए और क्या किसी स्तर पर शिकायत वापस लेने का दबाव डाला गया।

आरोपी सिपाही ने आरोपों को बताया निराधार

आरोपी सिपाही मोहित यादव ने अपने ऊपर लगे आरोपों से इनकार किया है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, उसका कहना है कि ट्रेन में मुलाकात के दौरान एक अन्य युवक छात्रा का वीडियो बना रहा था और उसने उसे हटवाने में मदद की थी। उसके मुताबिक, इसके बाद छात्रा से बातचीत शुरू हुई और दोनों के बीच संपर्क बना रहा। सिपाही ने दावा किया है कि उसे इस मामले में फँसाने की कोशिश की जा रही है। उसके पक्ष की भी निष्पक्ष जाँच आवश्यक है। फिलहाल, छात्रा के आरोपों और सिपाही के खंडन में विरोधाभास है, जिसका समाधान संबंधित साक्ष्यों और जाँच के निष्कर्षों से ही हो सकेगा।

एसपी ग्रामीण ने की जाँच की पुष्टि

एसपी ग्रामीण अतुल कुमार सोनकर ने मीडिया को बताया कि छात्रा की शिकायत प्राप्त हुई है और मामले की जाँच कराई जा रही है। प्रकाशित खबरों के अनुसार, जमानिया के क्षेत्राधिकारी स्तर पर भी जाँच की बात कही गई है। अधिकारियों ने कहा है कि जाँच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल, उपलब्ध समाचारों से आरोपी की गिरफ्तारी, प्राथमिकी दर्ज होने की स्थिति या किसी अंतिम जाँच निष्कर्ष की पुष्टि नहीं होती। इसलिए मामले को सिद्ध अपराध के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं होगा।

नाबालिग की सुरक्षा और निष्पक्ष जाँच सबसे अहम

यह मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि शिकायतकर्ता कक्षा 10 की छात्रा है। यदि उसकी उम्र 18 वर्ष से कम है, तो जाँच में उसकी सुरक्षा, गोपनीयता और बाल संरक्षण से जुड़े कानूनी प्रावधानों का विशेष ध्यान रखना आवश्यक है। यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम, 2012 (POCSO) बच्चों के विरुद्ध यौन अपराधों से संबंधित प्रावधान करता है। अधिनियम की धारा 23 मीडिया में बच्चे की पहचान उजागर करने तथा उसकी निजता को नुकसान पहुंचाने वाली रिपोर्टिंग पर प्रतिबंध लगाती है। किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम, 2015 की धारा 74 भी संबंधित मामलों में बच्चे की पहचान उजागर करने पर रोक लगाती है। इसलिए छात्रा का नाम, तस्वीर, स्कूल, गांव, परिवार की पहचान या ऐसे विवरण प्रकाशित नहीं किए जाने चाहिए जिनसे उसकी पहचान उजागर हो सकती हो। उसके कथित निजी फोटो या वीडियो को साझा करना, डाउनलोड करना या आगे प्रसारित करना भी गंभीर नुकसान पहुँचा सकता है। जाँच में छात्रा की सुरक्षा सुनिश्चित करने, उसके बयान को संवेदनशीलता से दर्ज करने, डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखने और शिकायत में लगाए गए प्रत्येक आरोप की स्वतंत्र जाँच करने की आवश्यकता है। यदि किसी पुलिसकर्मी की संलिप्तता सामने आती है, तो कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए; वहीं आरोपी को भी निष्पक्ष जाँच और विधिसम्मत प्रक्रिया का अधिकार है।

अब जाँच के निष्कर्षों पर टिकी निगाहें

गाजीपुर का यह मामला नाबालिगों की सुरक्षा, पुलिसकर्मियों की जवाबदेही और डिजिटल माध्यमों से कथित ब्लैकमेलिंग जैसे गंभीर प्रश्न उठाता है। छात्रा ने सार्वजनिक रूप से मदद की गुहार लगाई है, जबकि आरोपी ने आरोपों को खारिज किया है। ऐसे में केवल सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो या एकपक्षीय दावों के आधार पर निष्कर्ष निकालने के बजाय पुलिस को शिकायत, बयानों, उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों और कथित धमकियों की निष्पक्ष जाँच करनी चाहिए। सबसे महत्वपूर्ण यह है कि छात्रा की सुरक्षा और मानसिक स्थिति को प्राथमिकता दी जाए तथा उसे ऐसा माहौल मिले जिसमें वह बिना भय और दबाव के अपनी बात रख सके। मामले में आगे की स्थिति जाँच और आधिकारिक कार्रवाई के बाद ही स्पष्ट होगी।

 

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सुशील कुमार पाण्डेय मैं, अपने देश का एक जिम्मेदार नागरिक बनने की यात्रा पर हूँ, यही मेरी पहचान है I