प्रयागराज पुलिस कमिश्नर पीयूष मोर्डिया का एक्शन: SOG भंग, कई पुलिसकर्मी नपे

प्रयागराज पुलिस कमिश्नर पीयूष मोर्डिया के कार्यकाल में चारों SOG टीमों को भंग करने, हंडिया और मेजा के पुलिस अधिकारियों के निलंबन, VIP ड्यूटी में लापरवाही पर कार्रवाई और साइबर ठगी के मामले में गिरफ्तारी की पूरी रिपोर्ट पढ़ें।

Oct 11, 2026 - 09:09
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प्रयागराज पुलिस कमिश्नर पीयूष मोर्डिया का एक्शन: SOG भंग, कई पुलिसकर्मी नपे
प्रयागराज पुलिस कमिश्नर पीयूष मोर्डिया

प्रयागराज पुलिस कमिश्नर पीयूष मोर्डिया की सख्ती से महकमे में हलचल, SOG भंग करने से लेकर पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई तक कई बड़े फैसले

प्रयागराज, 11 अक्तूबर 2026। प्रयागराज पुलिस कमिश्नरेट में पुलिसकर्मियों की जवाबदेही तय करने और कार्यप्रणाली में सुधार लाने के उद्देश्य से पुलिस आयुक्त पीयूष मोर्डिया के कार्यकाल में कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक कार्रवाइयां सामने आई हैं। अगस्त में थाना प्रभारियों और सहायक पुलिस आयुक्तों के कार्यक्षेत्र में फेरबदल से शुरू हुआ यह सिलसिला सितंबर में चारों स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) टीमों को भंग करने, हंडिया और मेजा के पुलिस अधिकारियों को निलंबित करने तथा VIP ड्यूटी में लापरवाही पर पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर करने तक पहुँचा।

अक्तूबर के पहले सप्ताह में नैनी क्षेत्र की एडीए पुलिस चौकी के प्रभारी पर भी कार्रवाई की खबर सामने आई। दूसरी ओर, साइबर अपराध के एक बड़े मामले में प्रयागराज पुलिस ने मुंबई की महिला डॉक्टर से डिजिटल अरेस्ट के नाम पर 1.78 करोड़ रुपये की ठगी के मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार किया और करीब 64.62 लाख रुपये की रकम फ्रीज कराई। इन घटनाक्रमों से स्पष्ट है कि कमिश्नरेट में अनुशासन, जाँच की निष्पक्षता और अपराध नियंत्रण को लेकर कई स्तरों पर कार्रवाई की जा रही है।

चारों SOG टीमें भंग, 44 पुलिसकर्मियों को हटाया गया

प्रयागराज पुलिस कमिश्नरेट की सबसे बड़ी प्रशासनिक कार्रवाइयों में चारों SOG टीमों को भंग करने का फैसला शामिल है। सितंबर के पहले सप्ताह में सेंट्रल SOG, नगर SOG, गंगानगर SOG और यमुनानगर SOG को तत्काल प्रभाव से भंग करने का आदेश जारी किया गया। इन टीमों में तैनात 44 पुलिसकर्मियों को संबंधित पुलिस उपायुक्तों के समक्ष रिपोर्ट करने का निर्देश दिया गया।

इस कार्रवाई के बाद विशेष टीमों में तैनात पुलिसकर्मियों की भूमिका और निगरानी व्यवस्था पर चर्चा तेज हुई। कुछ समाचार रिपोर्टों में इस कदम को प्रयागराज के मांडा क्षेत्र में अवैध ड्रग फैक्टरी के खुलासे के बाद की कार्रवाई से जोड़कर देखा गया। हालांकि, SOG भंग करने के आदेश का आधिकारिक कारण स्पष्ट रूप से पुष्ट नहीं होने के कारण इसे स्थापित तथ्य के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं होगा।

इस फैसले का प्रशासनिक संदेश यह माना जा सकता है कि विशेष टीमों में तैनाती के साथ जवाबदेही भी जुड़ी है। हालांकि, केवल टीम भंग होने से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि उसके सभी सदस्यों के विरुद्ध व्यक्तिगत रूप से दोष सिद्ध हो गया है।

थाना प्रभारियों और ACP के कार्यक्षेत्र में बड़ा फेरबदल

अगस्त में पुलिस आयुक्त ने कमिश्नरेट की कार्यप्रणाली में बदलाव करते हुए सात ACP और कई थाना प्रभारियों के कार्यक्षेत्र में फेरबदल किया। 14 अगस्त की रिपोर्टों में सात थाना प्रभारियों के बदले जाने की जानकारी दी गई, जबकि अन्य समाचार रिपोर्टों में दस थाना प्रभारियों के कार्यक्षेत्र में बदलाव का उल्लेख है। इसके बाद भी अलग-अलग थानों में नए प्रभारियों की तैनाती की गई। सितंबर में हंडिया, लालापुर और संगम थाने से संबंधित नई नियुक्तियों की खबरें प्रकाशित हुईं। इन फेरबदल को नियमित प्रशासनिक पुनर्गठन और पुलिसिंग व्यवस्था में बदलाव के रूप में देखा जाना चाहिए। प्रत्येक स्थानांतरण या पदस्थापना को दंडात्मक कार्रवाई अथवा लाइन हाजिरी मानना तथ्यात्मक रूप से सही नहीं होगा।

हंडिया में थाना प्रभारी और दरोगा निलंबित

हंडिया थाने के प्रभारी निरीक्षक अनूप सरोज और विवेचक दरोगा बृजेश कुमार के निलंबन का मामला पुलिस की जवाबदेही से जुड़ी प्रमुख घटनाओं में शामिल रहा। सितंबर के पहले सप्ताह में प्रकाशित समाचार रिपोर्टों के अनुसार, जमीन या मकान विवाद से जुड़े मामले में एक पक्ष की पैरवी करने और कार्रवाई के नाम पर कथित तौर पर चार लाख रुपये लेने की शिकायत सामने आई थी। पुलिस आयुक्त के निर्देश पर कराई गई गोपनीय जाँच में दोनों अधिकारियों के विरुद्ध लगाए गए आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए जाने की बात रिपोर्टों में कही गई। इसके बाद दोनों को निलंबित कर दिया गया। यह कार्रवाई इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि भूमि विवाद जैसे मामलों में पुलिस की निष्पक्षता सीधे नागरिकों के अधिकारों और कानून पर उनके भरोसे को प्रभावित करती है। हालांकि, निलंबन विभागीय कार्रवाई है; इसे अंतिम न्यायिक दोषसिद्धि नहीं माना जाना चाहिए। आरोपों की अंतिम स्थिति संबंधित जाँच और सक्षम प्राधिकारी के निष्कर्षों पर निर्भर करेगी।

मेजा थाने में हिरासत और गिरफ्तारी की तारीख को लेकर विवाद, दो अधिकारी निलंबित

18 सितंबर 2026 को मेजा थाना प्रभारी नितेंद्र शुक्ला और अतिरिक्त थाना प्रभारी कमलेश यादव के निलंबन की खबर सामने आई। मामला एक व्यक्ति को थाने में कई दिनों तक रखने और बाद में उसकी गिरफ्तारी दर्ज किए जाने के आरोपों से जुड़ा था।

प्रकाशित रिपोर्टों के मुताबिक, संबंधित व्यक्ति को 15 अगस्त को उसकी क्लीनिक से थाने लाया गया था, जबकि गिरफ्तारी 19 अगस्त को दिखाए जाने का आरोप लगा। मामले में CCTV फुटेज और न्यायालय में उठाए गए सवालों के बाद जाँच हुई। रिपोर्टों में बताया गया कि जाँच के दौरान दोनों अधिकारियों की भूमिका पर प्रथम दृष्टया सवाल पाए गए और निलंबन की कार्रवाई की गई। यह प्रकरण पुलिस हिरासत की वैधानिकता, गिरफ्तारी के समय का सही अभिलेखीकरण और CCTV जैसे साक्ष्यों के महत्व को रेखांकित करता है। किसी व्यक्ति को हिरासत में लेने और औपचारिक गिरफ्तारी दर्ज करने की प्रक्रिया में पारदर्शिता आवश्यक है। इस मामले में आगे की विभागीय और न्यायिक कार्यवाही के निष्कर्षों को अलग से देखा जाना चाहिए।

VIP ड्यूटी में लापरवाही पर भी कार्रवाई

सितंबर के मध्य में प्रयागराज में VIP ड्यूटी के दौरान अनुपस्थिति और निर्देशों के उल्लंघन को लेकर बड़ी कार्रवाई की खबरें प्रकाशित हुईं। 14 सितंबर को इलाहाबाद हाईकोर्ट में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी मौजूद थे। 16 और 17 सितंबर की अलग-अलग रिपोर्टों में ड्यूटी से अनुपस्थित पाए गए पुलिसकर्मियों की संख्या 40 से 44 के बीच बताई गई। कुछ रिपोर्टों में 42 पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर किए जाने, जबकि अन्य में 44 पुलिसकर्मियों को रिजर्व ड्यूटी से अनुपस्थित पाए जाने पर कार्रवाई और स्पष्टीकरण मांगे जाने की जानकारी दी गई। इसलिए इस घटनाक्रम का सटीक विवरण देते समय अलग-अलग आदेशों और रिपोर्टों में दर्ज संख्या का मिलान आवश्यक है। उपलब्ध समाचारों से इतना स्पष्ट होता है कि VIP सुरक्षा ड्यूटी में अनुशासनहीनता के मामले में व्यापक स्तर पर कार्रवाई की गई।

नैनी की एडीए चौकी के प्रभारी पर कार्रवाई

4 अक्तूबर 2026 को प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, नैनी क्षेत्र में एडीए पुलिस चौकी के प्रभारी लेखपाल सिंह को पुलिस लाइन भेज दिया गया। मामला चौकी से करीब 500 मीटर दूर मानस विहार अपार्टमेंट में कथित देह व्यापार की गतिविधियां संचालित होने और स्थानीय स्तर पर इसकी जानकारी व कार्रवाई को लेकर लापरवाही के आरोपों से जुड़ा था। इस प्रकरण में पुलिस चौकी प्रभारी को पुलिस लाइन भेजे जाने की जानकारी सामने आई है। उपलब्ध रिपोर्ट के आधार पर इसे निलंबन कहना उचित नहीं होगा। दोनों विभागीय कार्रवाइयों की प्रकृति अलग है और समाचार में इसका स्पष्ट उल्लेख किया जाना चाहिए।

साइबर अपराध के खिलाफ कार्रवाई: 1.78 करोड़ की ठगी में एक गिरफ्तारी

प्रयागराज पुलिस की साइबर अपराध शाखा ने मुंबई की महिला डॉक्टर को डिजिटल अरेस्ट के नाम पर ठगने वाले अंतरराज्यीय गिरोह के मामले में भी कार्रवाई की। अक्तूबर के पहले सप्ताह में प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार, महिला डॉक्टर से कुल 1 करोड़ 78 लाख 60 हजार रुपये की ऑनलाइन ठगी की गई थी। जाँच में सामने आया कि साइबर अपराधियों ने पहले पार्सल में प्रतिबंधित सामग्री होने का झांसा दिया और बाद में पुलिस तथा अन्य सरकारी अधिकारियों के रूप में पेश होकर महिला को गिरफ्तारी का भय दिखाया। इसी दबाव में उनसे अलग-अलग समय पर रकम ट्रांसफर कराई गई।

इस मामले में प्रयागराज पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार किया। समाचार रिपोर्टों में लगभग 64.62 लाख रुपये फ्रीज कराए जाने की जानकारी दी गई। मामले में अन्य आरोपियों की तलाश और अंतरराज्यीय नेटवर्क की जाँच भी जारी होने की बात सामने आई। यहाँ एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है: ठगी की कुल रकम 1.78 करोड़ रुपये थी, जबकि फ्रीज कराई गई रकम करीब 64.62 लाख रुपये बताई गई। फ्रीज की गई रकम को पीड़िता को वापस मिल चुकी राशि नहीं माना जा सकता; उसकी वापसी की स्थिति अलग से पुष्ट की जानी चाहिए।

जनसुनवाई और थानों के निरीक्षण पर जोर

पुलिसिंग का एक महत्वपूर्ण पक्ष शिकायतकर्ताओं तक अधिकारियों की पहुंच और शिकायतों का समयबद्ध निस्तारण है। उपलब्ध विवरण के अनुसार, क्षेत्रीय स्तर पर जनसुनवाई को मजबूत करने और फरियादियों को हर शिकायत के लिए पुलिस मुख्यालय तक आने की आवश्यकता कम करने की दिशा में व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया गया है।

हालांकि, पुलिस आयुक्त द्वारा स्वयं जनसुनवाई की निगरानी, नियमित औचक निरीक्षण और लंबित शिकायतों की समीक्षा के संबंध में किसी नवीनतम विस्तृत आधिकारिक आदेश या समेकित आंकड़े की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध स्रोतों से नहीं हो सकी। इसलिए इन व्यवस्थाओं के प्रभाव का आकलन करने के लिए शिकायत निस्तारण के आंकड़े, निरीक्षण रिपोर्ट और आधिकारिक आदेश देखना आवश्यक होगा।

जवाबदेही की कसौटी पर प्रयागराज पुलिस

पुलिस कमिश्नर पीयूष मोर्डिया के कार्यकाल में सामने आई इन कार्रवाइयों से कमिश्नरेट में प्रशासनिक फेरबदल, विशेष टीमों के पुनर्गठन और कथित लापरवाही के मामलों में विभागीय कार्रवाई की तस्वीर सामने आती है। SOG टीमों का भंग होना, हंडिया और मेजा के अधिकारियों का निलंबन, VIP ड्यूटी में अनुपस्थिति पर कार्रवाई तथा नैनी की चौकी के प्रभारी को पुलिस लाइन भेजना प्रमुख घटनाक्रम हैं।

इसके साथ ही साइबर अपराध के मामलों में गिरफ्तारी और रकम फ्रीज कराने की कार्रवाई अपराध नियंत्रण के प्रयासों को दर्शाती है। लेकिन पुलिस व्यवस्था में वास्तविक सुधार का आकलन केवल कार्रवाई की संख्या से नहीं किया जा सकता। इसके लिए अपराध दर, शिकायतों के निस्तारण का समय, नागरिकों की शिकायतों पर निष्पक्ष कार्रवाई, हिरासत संबंधी नियमों का पालन और विभागीय जाँच के अंतिम परिणाम भी महत्वपूर्ण हैं।

आखिरकार, प्रभावी पुलिसिंग का उद्देश्य केवल दोषी पाए जाने वाले पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई करना नहीं, बल्कि ऐसी व्यवस्था बनाना है जिसमें आम नागरिक को निष्पक्ष सुनवाई मिले, अपराधियों पर कानून के अनुसार कार्रवाई हो और पुलिस के प्रत्येक स्तर पर जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके।

 

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सुशील कुमार पाण्डेय मैं, अपने देश का एक जिम्मेदार नागरिक बनने की यात्रा पर हूँ, यही मेरी पहचान है I