थाने में कथित पिटाई से रामगोपाल की मौत, परिजनों का पुलिस पर गंभीर आरोप
बहराइच के रामगाँव थाने में हिरासत के दौरान मेडिकल स्टोर संचालक रामगोपाल की मौत पर परिजनों ने पुलिस पर पिटाई और वसूली का आरोप लगाया। प्रशासन ने निष्पक्ष जाँच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई का आश्वासन दिया।
‘तीन घंटे तक पीटा, फिर शव बाहर फेंका’ निष्पक्ष जाँच की माँग तेज
बहराइच। जिले के रामगाँव थाना क्षेत्र में एक मेडिकल स्टोर संचालक रामगोपाल की हिरासत में मौत ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल खड़े कर दिए हैं। परिजनों का आरोप है कि रामगोपाल को थाने में लगभग तीन घंटे तक बेरहमी से पीटा गया, जिससे उनकी मौत हो गई। इसके बाद शव को थाने से बाहर फेंक दिया गया। घटना के बाद परिजन और स्थानीय लोग आक्रोशित हो उठे। मृतक की पत्नी और अन्य परिजन अस्पताल परिसर में विलाप करते नजर आए। परिजनों का कहना है कि जब वे जानकारी लेने थाने पहुंचे तो उनके साथ अभद्रता की गई और गाली देकर भगा दिया गया।
परिजनों के आरोप
परिजनों के अनुसार,
- रामगोपाल को एक मामले में पूछताछ के लिए थाने बुलाया गया था।
- उन्हें एक कमरे में बंद कर मारपीट की गई।
- चीख-पुकार की आवाजें सुनाई दे रही थीं।
- मौत के बाद पुलिसकर्मी शव बाहर छोड़कर चले गए।
- परिवार को देर से सूचना दी गई। परिवार ने आरोप लगाया है कि यह पूरा मामला वसूली से जुड़ा था और पुलिस दबाव बना रही थी।
पोस्टमार्टम और जाँच
जिलाधिकारी के निर्देश पर दो डॉक्टरों के पैनल द्वारा पोस्टमार्टम कराया गया और पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी भी की गई। प्रशासन का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। सीओ नानपारा ने बताया कि मामले की निष्पक्ष विवेचना के लिए जाँच को रामगाँव से स्थानांतरित कर दूसरे थाने को सौंपा गया है। उन्होंने आश्वासन दिया कि दोषी पाए जाने पर किसी को बख्शा नहीं जाएगा।
उठते सवाल
घटना के बाद कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं -
- क्या गिरफ्तारी की प्रक्रिया विधिसम्मत थी?
- क्या मेडिकल परीक्षण समय पर कराया गया?
- परिजनों को समय पर सूचना क्यों नहीं दी गई?
- थाने में सीसीटीवी कैमरे चालू थे या नहीं?
- यदि हालत बिगड़ी तो तत्काल अस्पताल क्यों नहीं ले जाया गया?
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि थानों में सीसीटीवी कैमरों की अनिवार्यता और निगरानी सख्ती से लागू हो, तो ऐसी घटनाओं की सचाई सामने आ सकती है।
राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया
घटना के बाद क्षेत्र में तनाव का माहौल है। कई सामाजिक संगठनों ने निष्पक्ष जाँच और दोषी पुलिसकर्मियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की माँग की है। कुछ स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी इस मामले को गंभीर बताते हुए उच्चस्तरीय जाँच की आवश्यकता जताई है।
संवेदनशील मामला
यह घटना एक बार फिर पुलिस हिरासत में मौत के मामलों पर बहस को तेज कर रही है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित दिशानिर्देशों और मानवाधिकार आयोग की सिफारिशों के बावजूद यदि ऐसे आरोप सामने आते हैं, तो कानून-व्यवस्था और जवाबदेही की व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न लगना स्वाभाविक है। अब सभी की निगाहें पोस्टमार्टम रिपोर्ट और प्रशासनिक जाँच पर टिकी हैं।
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