हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष : कोलकाता में अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी, याद किए जाएँगें पंडित जुगलकिशोर शुक्ल

हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष पूरे होने पर 29-30 मई को कोलकाता में अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित होगी। देशभर के विद्वान, पत्रकार और साहित्यकार शामिल होंगे। ‘उदन्त मार्तण्ड’ और पंडित जुगलकिशोर शुक्ल को विशेष रूप से याद किया जाएगा।

May 28, 2026 - 09:30
May 28, 2026 - 09:45
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हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष : कोलकाता में अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी, याद किए जाएँगें पंडित जुगलकिशोर शुक्ल
दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन

हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष : कोलकाता में अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी, याद किए जाएँगें पंडित जुगलकिशोर शुक्ल

कोलकाता, पश्चिम बंगाल। हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष पूर्ण होने के ऐतिहासिक अवसर पर भारतीय हिंदी प्राध्यापक परिषद एवं कलकत्ता गर्ल्स कॉलेज के संयुक्त तत्वावधान में 29 एवं 30 मई को दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है। हिंदी भाषा, साहित्य और संस्कृति के विकास में पत्रकारिता का योगदानविषय पर आयोजित इस संगोष्ठी में देशभर के विश्वविद्यालयों के हिंदी प्राध्यापक, साहित्यकार, शोधार्थी, पत्रकार तथा विभिन्न अकादमिक संस्थानों के प्रतिनिधि भाग लेंगे।

यह संगोष्ठी केवल एक अकादमिक आयोजन नहीं, बल्कि हिंदी पत्रकारिता की दो शताब्दियों की वैचारिक, सांस्कृतिक और सामाजिक यात्रा का सामूहिक उत्सव भी होगी। विशेष महत्व इस बात का है कि यह आयोजन उसी कोलकाता की ऐतिहासिक धरती पर हो रहा है, जहाँ से हिंदी के प्रथम समाचार पत्र उदन्त मार्तण्डका प्रकाशन प्रारंभ हुआ था।

संगोष्ठी की अध्यक्षता कलकत्ता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आशुतोष घोष करेंगे। कार्यक्रम में राज्यसभा सांसद एवं वरिष्ठ पत्रकार मोहम्मद नदीम उल हक, श्री वेंकटेश्वर विश्वविद्यालय, सिक्किम के कुलपति प्रो. मोहन, साहित्यकार डॉ. प्रेमशंकर त्रिपाठी, वरिष्ठ पत्रकार राज मिठौलिया तथा प्रभात खबर के पत्रकार कौशल किशोर त्रिवेदी सहित अनेक प्रतिष्ठित शिक्षाविद और पत्रकार शामिल होंगे।

भारतीय हिंदी प्राध्यापक परिषद के अध्यक्ष एवं त्रिपुरा विश्वविद्यालय के डीन प्रो. विनोद कुमार मिश्र, प्रो. रामप्रकाश (आंध्र प्रदेश), प्रो. टी.जे. रेखारानी (तेलंगाना), प्रो. एस.आर. जयश्री (केरल) तथा परिषद के राष्ट्रीय संयोजक एवं महासचिव प्रो. संजीव कुमार दुबे (गुजरात) भी इस अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में सहभागिता करेंगे।

कलकत्ता गर्ल्स कॉलेज की प्राचार्या एवं संगोष्ठी संयोजिका प्रो. सत्या उपाध्याय ने बताया कि हिंदी पत्रकारिता ने आधुनिक भारतीय समाज की चेतना के निर्माण, भाषाई अस्मिता को सुदृढ़ करने, साहित्यिक परंपराओं के संरक्षण तथा भारतीय संस्कृति के संवर्द्धन में ऐतिहासिक भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता ने केवल सूचना का माध्यम बनने तक अपने को सीमित नहीं रखा, बल्कि सामाजिक बदलाव, राष्ट्रीय जागरण और सांस्कृतिक संवाद की मजबूत आधारभूमि तैयार की।

दो दिवसीय इस आयोजन में हिंदी पत्रकारिता के इतिहास, उसके सामाजिक योगदान, साहित्यिक प्रभाव, लोकतांत्रिक भूमिका तथा समकालीन चुनौतियों पर लगभग सौ शोध पत्र प्रस्तुत किए जाएँगें। उद्घाटन सत्र में संगोष्ठी में प्राप्त शोध आलेखों पर आधारित संपादित पुस्तक का विमोचन भी किया जाएगा, जो हिंदी पत्रकारिता के विकास और उसके वैचारिक सरोकारों पर एक महत्वपूर्ण दस्तावेज मानी जा रही है।

संगोष्ठी का अंतिम सत्र विशेष रूप से हिंदी के प्रथम समाचार पत्र उदन्त मार्तण्डतथा उसके संस्थापक पंडित जुगलकिशोर शुक्ल की स्मृति को समर्पित रहेगा। इस विशेष सत्र में सार्क जर्नलिस्ट फोरम की सहभागिता भी सुनिश्चित की गई है। प्रो. शंभुनाथ तिवारी की अध्यक्षता तथा अनिरुद्ध सुधांशु के संचालन में आयोजित इस सत्र में नेपाल से सार्क जर्नलिस्ट फोरम के अध्यक्ष रुद्र सुवेदी, प्रो. बंदना पांडेय तथा प्रो. स्मिता मिश्र अपने विचार व्यक्त करेंगे।

आयोजन समिति के अनुसार, यह संगोष्ठी हिंदी पत्रकारिता की विरासत, उसकी जनपक्षधरता और बदलते डिजिटल समय में उसकी चुनौतियों पर गंभीर विमर्श का महत्वपूर्ण मंच बनेगी। कार्यक्रम के दौरान हिंदी पत्रकारिता और साहित्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले साहित्यकारों, पत्रकारों और शिक्षाविदों को सम्मानित भी किया जाएगा।

हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष पूरे होने के इस ऐतिहासिक अवसर पर आयोजित यह अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी न केवल अतीत की गौरवशाली परंपराओं को स्मरण करेगी, बल्कि भविष्य की पत्रकारिता के नए वैचारिक मार्गों को भी रेखांकित करेगी।

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सुशील कुमार पाण्डेय मैं, अपने देश का एक जिम्मेदार नागरिक बनने की यात्रा पर हूँ, यही मेरी पहचान है I