जनाब अख़लाक ‘भारतीय’ के सम्मान में सजी काव्य संध्या, कविता और ग़ज़लों ने बाँधा समाँ
बंगीय हिंदी परिषद और शब्द साधना के संयुक्त तत्वावधान में वाराणसी से आए अख़लाक ‘भारतीय’ के सम्मान में काव्य संध्या आयोजित हुई। कोलकाता, हावड़ा और हुगली के लगभग 40 साहित्यप्रेमियों ने गीत, ग़ज़ल, मुक्तक, दोहा और अन्य काव्य-विधाओं में रचनाएँ प्रस्तुत कीं।
बंगीय हिंदी परिषद और शब्द साधना के संयुक्त आयोजन में कोलकाता, हावड़ा और हुगली के 40 साहित्यप्रेमियों ने लिया हिस्सा
कोलकाता, 24 अक्तूबर। वाराणसी से पधारे वरिष्ठ काव्य साधक जनाब अख़लाक ‘भारतीय’ के सम्मान में बंगीय हिंदी परिषद और शब्द साधना के संयुक्त तत्वावधान में परिषद के ऐतिहासिक सभागार में भव्य काव्य संध्या का आयोजन किया गया। साहित्यिक आत्मीयता और काव्यात्मक अभिव्यक्ति से सजे इस आयोजन में कोलकाता, हावड़ा और हुगली जिले के लगभग 40 साहित्यकारों एवं साहित्यप्रेमियों ने सहभागिता की। कवियों ने स्वरचित मुक्तक, गीत, ग़ज़ल, अग़ज़ल, गद्य कविता, चौपाई और दोहों के माध्यम से अपनी रचनात्मक प्रतिभा का परिचय दिया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता शब्द साधना की अध्यक्ष श्यामा सिंह ने की। जनाब अख़लाक ‘भारतीय’ मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जबकि नंदलाल ‘रोशन’ और रौनक अफ़रोज विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए। शब्द साधना के साहित्य मंत्री शिवम तिवारी ने स्वागत वक्तव्य प्रस्तुत किया। इसके बाद डॉ. उर्मिला साव ने मधुर सरस्वती वंदना से कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
विविध काव्य-विधाओं ने मोहा श्रोताओं का मन
बंगीय हिंदी परिषद के उपाध्यक्ष एवं शब्द साधना के महासचिव राम पुकार सिंह ‘पुकार ग़ाज़ीपुरी’ तथा परिषद के प्रबंध मंत्री कमल पुरोहित ‘अपरिचित’ के आह्वान पर आयोजित इस काव्य संध्या में विभिन्न पीढ़ियों और काव्य-परंपराओं के रचनाकार एक मंच पर एकत्र हुए। काव्य-पाठ के दौरान साहित्यकारों ने अपनी मौलिक रचनाओं के माध्यम से प्रेम, जीवन, समाज और मानवीय संवेदनाओं के विविध पक्षों को अभिव्यक्त किया। गीतों की मधुरता, ग़ज़लों की रवानी, मुक्तकों की संक्षिप्त प्रभावशीलता और दोहा-चौपाइयों की पारंपरिक लय ने सभागार में उपस्थित श्रोताओं को भाव-विभोर किया। गद्य कविता की समकालीन अभिव्यक्ति ने भी आयोजन को विविधतापूर्ण बनाया।
मुख्य अतिथि अख़लाक ‘भारतीय’ ने भी अपनी कई रचनाओं का पाठ किया। उनकी काव्य प्रस्तुतियों को श्रोताओं ने सराहा। उनकी सहभागिता ने सम्मान समारोह को साहित्यिक संवाद और रचनात्मक आदान-प्रदान का विशेष अवसर बना दिया।
साहित्यकारों की व्यापक सहभागिता
काव्य संध्या में शिवम तिवारी, धर्म देव सिंह, डॉ. उर्मिला साव, बिश्वजीत सिन्हा, शकील गोंडवी, सुरेश शॉ, सुरेन्द्र सिंह, दया शंकर मिश्र, कृष्ण कुमार दूबे, कमल पुरोहित ‘अपरिचित’, सेराज खान ‘बातिश’, राम नारायण झा, सहर मजीदी, राम पुकार सिंह ‘पुकार ग़ाज़ीपुरी’, जोया अहमद, रंजीत सिंह, डॉ. शाहिद फ़रोगी, रुख़सार खान, आफताब अहमद ख़ान, रंजना झा, अश्विनी झा, सारांश झा, आलिया खान, मोहम्मद इमाम, लक्ष्मी जायसवाल, आलोक चौधरी, भारती मिश्रा, मोहम्मद अयूब वारसी, मुज़्तर इफ़्तिख़ारी, फौजिया अख़्तर रिदा, हीरालाल सुजान और नश्तर शाहिदी सहित अनेक साहित्यकारों ने भाग लिया।
कार्यक्रम का कुशल संचालन प्रदीप कुमार धानुक ने किया। अंत में कमल पुरोहित ‘अपरिचित’ ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए अतिथियों, रचनाकारों और उपस्थित साहित्यप्रेमियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
यह काव्य संध्या साहित्यिक सम्मान, सृजनशीलता और परस्पर संवाद की साझा अभिव्यक्ति के रूप में सामने आई। आयोजन ने कोलकाता और आसपास के क्षेत्रों में हिंदी साहित्य की सक्रिय परंपरा तथा विभिन्न काव्य-विधाओं के प्रति रचनाकारों के अनुराग को रेखांकित किया।
What's Your Reaction?

